फिल्म से पहले राष्ट्रगान में दिव्यांगों को खड़ा होना जरूरी नहींः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से पहले सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के वक्त खड़े होने के मामले में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को सिनेमा हॉल के भीतर खड़ा होना जरूरी नहीं है। 

By: Manish Gite

Published: 18 Apr 2017, 04:51 PM IST


भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से पहले सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के वक्त खड़े होने के मामले में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को सिनेमा हॉल के भीतर खड़ा होना जरूरी नहीं है। 30 नवंबर को कोर्ट ने देश के सभी सिनेमा हॉलों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाने और वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मान में खड़े होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने देशभर के सभी स्कूल और कॉलेजों में राष्ट्रगीत और वंदे मातरम जरूरी करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह में केंद्र से जवाब मांगा है। इस याचिका पर 23 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

ये फैसला दिया था सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर 2016 को 'जन गण मन' से जुड़ा एक अहम आदेश दिया था। कोर्ट ने देशभर के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्र गान बजाना अनिवार्य कर दिया। साथ ही पर्दे पर राष्ट्र ध्वज भी दिखाना जरूरी कर दिया। इसके साथ ही यह भी कहा कि सभी दर्शक तिरंगे और राष्ट्र गान के सम्मान में खड़े होंगे। इस पूरे फैसले जिस शख्स की याचिका पर यह अहम फैसला हुआ वह भोपाल के निवासी श्याम नारायण चौकसे थे।


गांधी की समाधि देख हुए थे आहत
राजधानी निवासी श्याम नारायण चौकसे इससे पहले भी देशभक्ति की मिसाल पेशकर चुके हैं। उन्होंने इससे पहले भी एक याचिका लगाई थी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि की दूर्दशा देख यह याचिका लगाई थी। चौकसे की इस याचिका ने भी देशभर में काफी सुर्खियां बटौरी थी।


क्या कहा था चौकसे ने
1. चौकसे ने अपनी याचिका में कहा था कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए राष्ट्रीय गान के चलन पर रोक लगना चाहिए।
2. एंटरटेनमेंट शो में ड्रामा क्रिएट करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
3.याचिका में यह भी कहा गया था कि एक बार शुरू होने पर राष्ट्रीय गान को अंत तक गाया जाना जरूरी है। बीच में बंद नहीं होना चाहिए।
4. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अक्टूबर में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

यह है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
1. राष्ट्रीय गान राष्ट्र की पहचान, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक देशभक्ति से जुड़ा हुआ है। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा है कि ध्यान रखा जाए कि किसी भी व्यावसायिक हित में राष्ट्रीय गान का इस्तेमाल नहीं हो सके।
2. राष्ट्रीय गान का इस्तेमाल किसी भी तरह की गतिविधि में ड्रामा क्रिएट करने के उद्देश्य से नहीं होना चाहिए।
3. इसे वैरायटी सॉन्ग के रूप में भी नहीं गाया जा सकता है।
Manish Gite
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