scriptSurprise, the team of bureaucrats will decide in the case of farmers | आश्चर्य, किसानों के मामले में निर्णय करेगी नौकरशाहों की टीम, न कोई कृषि विशेषज्ञ शामिल और कृषि मंत्री | Patrika News

आश्चर्य, किसानों के मामले में निर्णय करेगी नौकरशाहों की टीम, न कोई कृषि विशेषज्ञ शामिल और कृषि मंत्री

दिग्विजय ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा, नीति तैयार करने के पहले किसानों से करें चर्चा

भोपाल

Published: January 15, 2022 12:55:29 am

भोपाल। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay singh) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra modi) को पत्र लिखकर कहा है कि रबी और खरीफ की फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की नीति बदलने से पहले देश के किसानों के साथ चर्चा जरूर करें। बिना चर्चा खरीदी के मापदंड बदले गए तो किसानों को निराशा होगी और उनमें रोष व्याप्त होगा।
आश्चर्य, किसानों के मामले में निर्णय करेगी नौकरशाहों की टीम, न कोई कृषि विशेषज्ञ शामिल और कृषि मंत्री
आश्चर्य, किसानों के मामले में निर्णय करेगी नौकरशाहों की टीम, न कोई कृषि विशेषज्ञ शामिल और कृषि मंत्री
दिग्विजय ने कहा कि केन्द्र सरकार के तुगलकी फरमान से एक बार फिर पूरे देश में करोड़ों किसान की बर्बादी होने जा रही है। किसानों के महिनों चले आंदोलन के बाद आपने तीन काले कृषि कानून वापस लेकर जो राहत दी थी उस पर अफसरशाही पानी फेर रही है। भारत सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सहमति के बाद भारतीय खाद्य निगम न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेंहू, चावल और धान की खरीदी के नियम बदलने जा रही है। इन नियमों के इस वित्तीय वर्ष 2022-23 से लागू किए जाने की कार्यवाही अंतिम चरण में है।
सिर्फ विदेशों में उच्च गुणवत्ता के माल सप्लाई करने के नाम पर किसानों से जो धान, गेहूं खरीदा जाएगा उसमें कई तरह के परिवर्तन प्रस्तावित है। जैसे गेंहूं में नमी की मात्रा 14 प्रतिशत से घटाकर 12 और धान में 17 से घटाकर 16 की जा रही है। इसी प्रकार गेहूं, कंकड़, पत्थर की मात्रा पहले 75 प्रतिशत थी, जो अब 50 प्रतिशत की जा रही है। धान में यह मात्रा 2 प्रतिशत की जगह 1 प्रतिशत प्रस्तावित है। यही नहीं गेंहूं की फसल में जो अन्य फसलों के दाने आ जाते थे, उसकी मात्रा भी 2 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत की जा रही है।
इसी प्रकार गेंहूं, चावल की फसल में जो दाने सिकुड़ जाते थे उस दर को भी 3 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया जा रहा है। पहले क्षतिग्रस्त या टूट जाने वाले दानों की मात्रा 5 प्रतिशत तक स्वीकार होती थी, जो अब घटाकर 3 प्रतिशत की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ 2014 से देश के किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कर रहे थे जो 2022 तक आते-आते सब्जबाग रूपी दु:स्वपन में बदलती जा रही है। देश के 15 करोड़ किसानों से समर्थन मूल्य पर धान-गेंहूं खरीदने की नीति चंद नौकरशाह कैसे बना सकते है। इस कमेटी में न केन्द्रीय कृषि मंत्री थे न ही राज्यों के कृषि मंत्री। कृषि मामलों के विशेषज्ञ भी नही रखे गए और कमेटी की किसान विरोधी सिफारिशें लागू करने का फैसला हो गया है।

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