स्वच्छता सर्वेक्षण: इंदौर सेवन स्टार की रेस में, उज्जैन दूसरे पायदान पर, भोपाल पिछड़ा

स्वच्छता सर्वेक्षण: इंदौर सेवन स्टार की रेस में, उज्जैन दूसरे पायदान पर, भोपाल पिछड़ा

Ram kailash napit | Publish: Dec, 09 2018 03:03:03 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

देश की पहली फीकल मैेनेजमेंट सिटी बना इंदौर, राजधानी में अभी यह सिस्टम ही नहीं है

भोपाल. स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान के नए फॉर्मेट में भी इंदौर ने खुद को अव्वल रखा है। केंद्र सरकार ने इंदौर को देश की पहली फीकल मैनेजमेंट सिटी यानी मल-मूत्र का वैज्ञानिक निष्पादन करने वाले शहर का दर्जा दिया है। इंदौर अब सेवन स्टार रेटिंग की दावेदारी में है, जबकि दूसरे पायदान पर उज्जैन है। देश में दूसरा सबसे साफ शहर और सालाना सफाई के नाम पर 177 करोड़ रुपए खर्च करने वाला भोपाल आगे बढऩे के लिए जबलपुर से ही जूझ रहा है। इस बार देश भर के 4043 शहरों में मुकाबला है।
राजधानी में फीकल मैनेजमेंट सिस्टम नहीं है। यहां मांस-मछली सब्जी के कचरे से संचालित ग्रीन एनर्जी प्लांट भी नियमित नहीं हो पा रहा है। कचरे से बिजली बनाने वाला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट 2019 के आखिर तक शुरू होगा। केंद्र इस बार सर्वेक्षण का आधार 5 दिसंबर तक की जानकारी को बनाएगा, लेकिन भोपाल ने अब तक रिपोर्ट पूरी नहीं भेजी है। नगरीय प्रशासन विभाग ने 20 दिसंबर तक भोपाल सहित प्रदेश के बाकी शहरों को रिपोर्ट ऑनलाइन करने कहा है।

चौथे स्वच्छता सर्वेक्षण में किए हैं बदलाव
स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान 2019 के लिए इस बार शहरों को ऑनलाइन रिपोर्ट सबमिट करनी है। ये रिपोर्ट तीन स्तर पर जमा होंगी। इनमें ओडीएफ, ओडीएफ प्लस और सिटी क्लीनिंग-वेस्ट मैनेजमेंट के तथ्य साल में तीन बार तीन चरणों में बताने होंगे। एक बार रिपोर्ट सबमिट होने के बाद केंद्रीय सर्वेक्षण टीमें अपने स्तर पर शहरों में आकर भौतिक सत्यापन करेंगी। सत्यापन दौरे गोपनीय तरीके से होंगे। भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन सबमिट रिपोर्ट में अंतर मिलने पर शहरों से सवाल किए जाएंगे। स्वच्छता फंड के हिसाब का ऑडिट होगा। बताना होगा उन्होंने प्राप्त राशि कहां खर्च की।

 

आप भी कर सकते हैं मदद
बीएमसी कंट्रोल कमांड सेंटर के टोल फ्री नंबर 18002330014 पर कॉल करके आप भी गंदगी वाले स्थान की जानकारी दें। कॉल करने वाले का नाम, वार्ड नंबर, मोबाइल नंबर वगैरह दर्ज कर शिकायत नंबर प्रदान किया जाता है। इसे एएचओ को भेजकर निगरानी की व्यवस्था की गई है।

 

भोपाल में वेस्ट मैनेजमेंट का हाल
वेस्ट टू एनर्जी- 177 करोड़ रुपए का सफाई बजट खर्च कर शहर का कचरा आदमपुर साइट पर डंप हो रहा है। जनवरी 2020 से यहां 20 मेगावॉट बिजली बनाने की योजना है। इसमें बीएमसी को रॉयल्टी मिलेगी।
ग्रीन एनर्जी प्लांट- 1 करोड़ रुपए की लागत से बिट्टन सब्जी मार्केट के पास लगे सब्जी, मांस मछली के कचरे से बिजली बनाने वाला ग्रीन एनर्जी प्लांट नियमित नहीं है। तमाम प्रयासों के बावजूद प्लांट को रोजाना 500 टन कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है।
वेस्ट मैनेजमेंट- 85 वार्डों से प्रतिदिन 750 मीट्रिक टन गीला सूखा कचरा निकलता है। बीएमसी केवल 70 कचरा उठा पाता है। बाकी 30 प्रतिशत शहर में मौके पर ही नष्ट होता है।
वैज्ञानिक निष्पादन- गिनती के वार्डों से डोर-टू-डोर कलेक्शन के नाम पर एस्सेल गु्रप के साथ 1710 रूपए प्रति मीट्रिक टन की दर पर कचरा उठवाने का अनुबंध किया गया है। कचरा आदमपुर में जमा होता है, वैज्ञानिक निष्पादन नहीं हो रहा है।
फीकल मैनेजमेंट- सेप्टिक टैंक के मलबे को जमा करने के बाद बीएमसी के सक्शन वाहन इसे गोविंदपुरा एसटीपी ले जाते हैं। खुले नालों में भी इसे बहा दिया जाता है। शहर में फीकल मैनेजमेंट प्लांट नहीं है।

ये हैं केंद्रीय सर्वे फॉर्मेट
विषय कुल अंक पास होने योग्य
वेस्ट कलेक्शन-ट्रांसपोर्टेशन 360 40 प्रतिशत
सॉलिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट 180 20 प्रतिशत
पब्लिक कम्युनिटी टॉयलेट 135- 15 प्रतिशत
पर्सनल टॉयलेट 135 15 प्रतिशत
खुले में शौच से मुक्त शहर 45 5 प्रतिशत
सूचना, शिक्षा, जागरुकता 45 5 प्रतिशत

 

इंदौर देश की पहली फीकल मैनेजमेंट सिटी बन गया है। सेवन स्टार रेटिंग की पहली दावेदारी भी इंदौर से आई है। स्वच्छता सर्वेक्षण के बदले हुए फॉर्मेट में जानकारी देने वाला उज्जैन दूसरा शहर है। भोपाल-जबलपुर तीसरे नंबर पर हैं।
नीलेश दुबे, संयुक्त संचालक, स्वच्छता सर्वेक्षण, नगरीय प्रशासन

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