scriptTeam of officers will leave on 28th to discuss the strategic plan to b | दक्षिण अफ्रीका से चीता लाने के स्टेटजिक प्लान पर चर्चा करने 28 को रवाना होगी अफसरों की टीम | Patrika News

दक्षिण अफ्रीका से चीता लाने के स्टेटजिक प्लान पर चर्चा करने 28 को रवाना होगी अफसरों की टीम

- पहले चरण में 10 से 12 चीता लाने की संभावना
- चीता रखने कूनो पालपुर में पांच इनक्लोजर बनकर तैयार

भोपाल

Updated: November 26, 2021 09:28:05 pm

भोपाल। प्रदेश के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में चीता लाने के स्टेटजिक प्लान पर चर्चा करने भारत से पांच सदस्यीय एक टीम 28 नवम्बर को दक्षिण अफ्रीका जा रही है। टीम दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधि से चर्चा कर यह तय करेंगी कि पहले चरण में वहां से प्रदेश में कितने चीता लाए जाएंगे, हालांकि दक्षिण अफ्रीका के अफसरों और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के प्रतिनिधियों में के बीच में हुई चर्चा में यहां 10 से 12 चीता लाने पर सहमति बनी है।
दक्षिण अफ्रीका जाने वाले दलों में मध्य प्रदेश से विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक आलोक कुमार शामिल हैं। जबकि वन मंत्रालय से महानिरीक्षक एवं उप महानिरीक्षक वन और वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आइवी झाला को भी भेजा जा रहा है। यहां दल 8 दिसम्बर को वापस आएगी।
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दल दक्षिण अफ्रीका से श्योपुर के कूनो पालपुर तक चीता को लाने की रणनीति पर बात करेगा। परिवहन के दौरान चीता की सुरक्षा, पार्क में छोडऩे के बाद उठाए जाने वाले सुरक्षात्मक कदमों के संबंध में वहां के अधिकारियों जानकारी देंगे। इसकी बाद कूनो पालपुर से भी एक टीम जाएंगी, जिसमें फील्ड डायरेक्टर के साथ वहीं के आठ अधिकारी दक्षिण अफ्रीका टे्रनिंग के लिए जाएंगे।


चीता लाने की तैयारी अधूरी
चीता लाने की तैयारी अभी अधूरी है। सबसे महत्वपूर्ण काम बाड़ा बनाना है, जिसमें कार्य अभी 30 फीसदी तक अधूरा है। यह बाड़ा 500 हेक्टेयर होगा। इसमें 100-100 हेक्टेयर के पांच बाड़े बनाए गए हैं। इन बाड़ों में नर और मादा चीता को अलग-अलग रखा जाएगा। इनको एक दो माह तक अलग-अलग के साथ ही इन्हें प्राकृतिक रूप से भोजन दिया जाएगा। एक दो माह के अब्जर्वेशन के बाद इन्हें खुले जंगलों में छोड़ा जाएगा।

वादे से मुकरा आईओसीएल
इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसीएल) अपने वादे से मुकर गया है। आईओसीएल ने चीता लाने की तैयारी से लेकर उस पर 5 वर्षों तक इसके संरक्षण में लगने होने वाले खर्च की राशि 100 करोड़ रूपए देने के लिए कहा था। इसमें से एक भी पैसे आईओसीएल अभी तक कूनो पालपुर को एक पैसे नहीं दिया है।

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