शरीयत पर नहीं होगा कोई समझौता: शहर काजी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भोपाल में  हुई बैठक। 

By: दीपेश तिवारी

Updated: 11 Sep 2017, 01:59 PM IST

भोपाल। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक  भोपाल में हुई। इस दौरान शहर काजी सयैद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि शरीयत पर समझौता नहीं होगा साथ ही उनके मुताबिक इस्लामी तरीके से ही निकाह होना चाहिए।

 रविवार को हुई बैठक में तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मंथन हुआ। दिनभर की चर्चा के बाद बोर्ड पदाधिकारी ये तय नहीं कर पाए कि फैसले का पालन करें या नहीं। इसलिए मामले पर एक राय होने के लिए 10 सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी तीन तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सही व्याख्या कर अपनी रिपोर्ट देगी। वहीं दूसरी ओर सरकार के तीन तलाक मामले पर रुख की बोर्ड ने निंदा की है।

रविवार को पदाधिकारियों ने कहा, शरीयत में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट का हम सभी आदर करते हैं। एक साथ तीन तलाक को रोकने पर्सनल लॉ बोर्ड समाज में तहरीक चलाएगा। मॉडल निकाहनामा लाया जाएगा, जिसमें जिक्र होगा, तीन तलाक गलत है।


बोर्ड की बैठक रविवार सुबह दस बजे खानू गांव स्थित एक निजी कॉलेज में शुरू हुई। इसमें बोर्ड के 51 पदाधिकारियों में से 44 ने हिस्सा लिया। इनमें सांसद असदउद्दीन ओवैसी, पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना वली रहमानी, मौलाना मोहम्मद उमरेन, महफूल उल रहमान, शहरकाजी सैयद मुश्ताक अली नदवी आदि शामिल हैं। दिनभर के मंथन पर बोर्ड सदस्य कमाल फारूखी ने संवाददाताओं को बताया, शरीयत में कोई भी दखल बर्दाश्त नहीं होगा।

मुसलमानों और उनके कानूनों को बाकी दूसरे समुदायों की तरह ही देखा जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश मानने के मामले में उन्होंने कहा, दस सदस्यों की कमेटी में उलेमा, काूननी जानकारी और विद्वान हैं। वे इस मामले में अपनी रिपोर्ट देंगे। उसके बाद ही कोई फैसला होगा।

..तो जाएं कोर्ट
बोर्ड की सदस्य असमां जोहरा ने कहा तलाक के मामले मुस्लिम समाज में सबसे कम हैं। अगर किसी को गलत तरीके से तलाक दिया गया है तो वह कोर्ट का दरवाजा का दरवाजा खटखटा सकती हैं।

तीन तलाक को लेकर जिन महिलाओं ने कोर्ट में याचिका दाखिल की, उन पर उन्होंने उस पर सवाल उठाते हुए जोहरा ने कहा कि उन पर जुल्म हुए तो वह कोर्ट या पुलिस के पास क्यों नहीं गई? हमारे देश में सभी के लिए कानून है। किसी एक की गलती के ये मायने नहीं कि पूरा निजाम ही गलत है।

गेट के बाहर भीड़, सब बेसब्री से कर रहे थे इंतजार:
एक ओर बंद कमरे में बैठक चल रही थी, तो दूसरी ओर कॉलेज परिसर के बाहर लोगों की भारी भीड़ लगी थी। एहतियात के तौर पर कॉलेज के बाहरी गेट को बंद कर दिया गया था, यहां से सिर्फ मीडिया को ही प्रवेश था। इस बैठक की जानकारी देने के लिए दोपहर में ३ बजे मीडिया को पदाधिकारियों से चर्चा के लिए बुलाया था, लेकिन बैठक में पदाधिकारी एक राय नहीं हो पाए, इसके कारण मीडिया से चर्चा का समय आगे बढ़ाना पड़ा।

अदालत के फैसले का हम पूरी तरह सम्मान करते हैं, लेकिन इस फैसले में कुछ चीजों को नजरअंदाज कया गया है। मुस्लिम महिलाओं को जो अधिकार इस्लाम में मिला है, वह शायद और कहीं नही है।
- जहीर काजी, अंजुमन इस्लाम, मुंबई

तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है, लेकिन इस फैसले का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अगर कोई इसका दुरुपयोग करता है, तो वह गलत है। इसमें कुछ विसंगतियां है, इसे दूर करने के लिए ही यह मंथन किया जा रहा है।
- यासिन उस्मानी, मदानी

तीन तलाक को लेकर जो फैसला आया है, उसमें कुछ चीजें छूट गई हैं। साथ ही इसे लेकर गलत प्रचार किया गया है, जिसके कारण लोग भ्रमित हो रहे हैं। इसे लेकर भ्रम की स्थिति नहीं रहे, इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं।
- प्रो. रियाज उमर

दीपेश तिवारी
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