सरकार को घेर नहीं पा रहा 96 सदस्यों वाला विपक्ष

सडक़ से सदन तक बिखरी-बिखरी कांग्रेस

कांग्रेस में हावी हुआ गुटबाजी का पुराना रोग

 

By: Arun Tiwari

Published: 04 Mar 2021, 07:19 PM IST

भोपाल : सरकार जाने के बाद कांग्रेस में फिर गुटबाजी का पुराना रोग उभर कर सामने आ गया है। विधानसभा में विपक्षी दल के रुप में कांग्रेस के पास 96 विधायक हैं। यानी इस नाते कांग्रेस को मजबूत और सरकार को मजबूर करने वाले विपक्ष की भूमिका में नजर आना चाहिए लेकिन सदन के अंदर कांग्रेस बिखरी-बिखरी सी नजर आ रही है। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ हैं लेकिन वे भी सदन में कम नजर आ रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में डॉ गोविंद सिंह जैसे-तैसे कमान संभालते नजर आते हैं। चंद विधायकों को छोड़ दें तो बाकी में आक्रमकता ही नजर नहीं आती। सदन में सरकार को घेरने के बड़े-बड़े दावे करने वाली कांग्रेस के पास बड़े मुद्दे होने के बाद भी कोई रणनीति दिखाई नहीं दे रही।

न धार- न आक्रामकता :
सदन के अंदर कुछ विधायक जैसे कुणाल चौधरी, जीतू पटवारी, बाला बच्चन और विजयलक्ष्मी साधौ जैसे कुछ विधायक हैं जो सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं। डॉ गोविंद सिंह इनका साथ बखूबी निभाते नजर आते हैं। लेकिन बाकी विधायक इतने सक्रिय नजर नहीं आते। उनमें न धार नजर आ रही है और न ही आक्रमकता। कांग्रेस के एक वरिष्ठ विधायक कहते हैं कि ये सवाल तो नेता से करना चाहिए, हम तो कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। जिसको जैसा समझ में आता है वैसा करता है। इन्होंने नाम लिखने का तो मना किया लेकिन अपनी लाचारी और कांग्रेस की स्थिति बता दी। कुणाल चौधरी कहते हैं कि वे तो मुखरता से सरकार का विरोध कर रहे हैं, सरकार उनके सवालों से बच रही है। कांग्रेस की स्थिति को टालते हुए डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि ये बजट सत्र है और आने वाले समय में हम सब संगठित होकर सरकार को घेरेंगे।

रणनीति का अभाव :
महंगाई, अपराध और सीधी बस हादसे जैसे बड़े मुद्दे होने के बाद भी कांग्रेस में सरकार को घेरने की रणनीति नजर नहीं आ रही। कांग्रेस में ये योजना ही बनती दिखाई नहीं दे रही कि किस तरह से महंगाई के मुद्दे पर सरकार को तेल पर टैक्स कम करने के लिए मजबूर करना है। सीधी बस हादसे पर स्थगन लाने वाली कांग्रेस सरकार पर सवाल ही खड़े नहीं कर पाई। परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत बड़े सहज तरीके से अपना जवाब दे गए। कांग्रेस ने कुछ मुद्दों पर वॉकआउट जरुर किया है लेकिन सदन के अंदर बहुत प्रभावी विरोध नजर नहीं आया। सीधी बस हादसे के स्थगन पर चर्चा के वक्त लंच के बाद कांग्रेस के नेता ही नदारद थे जिस पर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस गंभीर ही नजर नहीं आ रही। सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने कह कि कांग्रेस अब दल नहीं दलदल हो गया है।

गोडसे पर भी चल रहा घमासान :
सदन के बाहर भी कांग्रेस के अंदर घमासान चल रहा है। पार्टी में गुटबाजी फिर नजर आने लगी है। कांग्रेस के बड़े नेताओं के भी एक मुद्दे पर एक सुर नहीं है। गोडसे की पूजा करने वाले हिंदू महासभा के बाबूलाल चौरसिया ने कांग्रेस के दो खेमे कर दिए हैं। अरुण यादव ने विरोध का झंडा उठाया तो कई नेता उनके साथ आ गए। आधे नेता प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के फैसले के साथ हो गए। अंदरुनी कलह से जूझ रही कांग्रेस सडक़ से सदन तक टुकड़ों-टुकडों में बंट गई है। उसमें न तो नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां दिखती हैं और नहीं 2023 का रोडमैप।

Arun Tiwari Reporting
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