पटवारी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला, सदन में हंगामा

सत्ता और विपक्षी दल के सदस्यों में तीखी बहस, दो बार स्थगित हुई कार्रवाई

By: anil chaudhary

Published: 13 Mar 2018, 09:09 AM IST

भोपाल. कांग्रेस के जीतू पटवारी पर विशेषाधिकार हनन के मामले में सोमवार को सदन में सत्ता और विपक्षी दल के सदस्यों में तीखी बहस हुई। स्पीकर ने बार-बार शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने।

इसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। स्पीकर डॉ. सीतासरन शर्मा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पटवारी का मामला विशेषाधिकार हनन समिति को सौंप दिया।

स्पीकर ने प्रश्नकाल समाप्त होते ही भाजपा के यशपाल सिंह सिसौदिया सहित अन्य सदस्यों की ओर से दी गई विशेषाधिकार हनन की सूचना पढ़ी।

उनका कहना था कि पटवारी ने शुक्रवार को आसंदी और सदन की अवमानना की है। पटवारी ने मीडिया को कथित तौर पर चोरों की मंडली कहा था।

 

सिसौदिया ने कहा, पटवारी ने मीडिया का अपमान करने के साथ सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं पर विधायकों को बोलने नहीं दिया। उन्होंने निंदा करते हुए मामला विशेषाधिकार हनन को सौंपने का आग्रह किया।

इसका कांग्रेस सदस्यों ने तीखा विरोध किया। कांग्रेस के रामनिवास रावत ने स्पीकर की ओर मुखातिब होते कहा, जिस कार्रवाई को आप स्वयं विलोपित करा चुके हैं, वह सदन की कार्रवाई में नहीं है तो इस पर चर्चा नहीं होना चाहिए।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कागजात दिखाते हुए कहा कि कार्रवाई से कुछ भी विलोपित नहीं हुआ है। पटवारी ने सदन और सदन के बाहर भी यही बात दोहराई है। इस दोनों दल के सदस्य जोर-जोर से बोलने लगे।

सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे
संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पटवारी से उस दौरान अपने शब्द वापस लेने और माफी मांगने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी। पटवारी ने सदन का अपमान किया है। वे उनकी सदस्यता रद्द की मांग करेंगे। मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने कहा, विधानसभा का निजी हितों के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए।

पटवारी ने व्यक्तिगत सवाल पूछकर सदन का दुरुपयोग किया है। गोपाल भार्गव ने कहा, पटवारी ने सोशल मीडिया पर भी एेसी ही बातें कहीं, इसलिए यह विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह बोले, सवाल पूछना विधायकों का अधिकार है। पटवारी ने भी सवाल पूछा है। इसमें व्यक्तिगत जैसा कुछ नहीं है। कांग्रेस सदस्य सुंदरलाल तिवारी ने नियम प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि विशेषाधिकार हनन का कोई आधार नहीं बनता। उन्होंने इसे सत्तापक्ष का षड्यंत्र बताया। इस पर सत्ता और विपक्षी दल के विधायकों में तीखा विवाद भी हुआ।

 

इधर ये बोले मंत्री रुस्तम सिंह:-

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रुस्तम सिंह ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे और उनके आश्रतों को परिभाषित करने का काम सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग का है। नियम मैंने नहीं बनाए। वे कांग्रेस के सुंदरलाल तिवारी के राज्य बीमारी उपचार योजना के संबंध में लगाए गए ध्यानाकर्षण की सूचना का जवाब दे रहे थे।

मंत्री ने कहा, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले मुखिया, उनके माता-पिता, उनके अविवाहित पुत्र-पुत्री जिसकी आयु 25 वर्ष से कम हो, को ही राज्य बीमारी सहायता निधि योजना का लाभ दिया जाता है।

वह सामाजिक न्याय विभाग से इस संबंध में पहल करेंगे कि अगर परिवार के सदस्य की आयु 25 वर्ष से अधिक है तो उनका गरीबी रेखा का राशन कार्ड अलग बनाया जाए। तिवारी ने कहा, गरीबी रेखा सर्वे वर्ष 2011 में हुआ था। आज उनमें से कई लोग 25 पार कर चुके हैं। अलग राशन कार्ड बनाने का समर्थन भाजपा के शैलेन्द्र चौहान और कांग्रेस के आरिफ अकील ने भी किया।

अपने ही विधायकों से घिरी सरकार:
सदन में सोमवार को अजब स्थिति बन गई। सत्तापक्ष के सदस्यों यहां तक कह दिया कि सदन में गलत जानकारी दी जा रही है। अफसर जो जवाब लिखकर देते हैं, मंत्री उसी को पढ़ देते हैं। जमीनी हकीकत उससे अलग होती है।

प्रश्नकाल के दौरान भाजपा की नीना वर्मा ने एनएच ३१ लेबड़ से मुलथान फोरलेन का मामला उठाया। उन्होंने कहा, यह बीओटी मार्ग ऊबड़-खाबड़ हो गया है। इस पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। जिम्मेदार कंपनी टोल टैक्स वसूल रही है, लेकिन मेंटेनेंस नहीं करवा रही है। लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह ने उनकी बात पर असहमति जताते हुए कहा कि मार्ग खराब नहीं है।

कुछ जगह असमतल है। भाजपा के यशपाल सिंह सिसौदिया ने नीना वर्मा का समर्थन करते हुए कहा, 260 किलोमीटर के मार्ग का निरीक्षण किया था, यह मार्ग वास्तव में खराब है। कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी उनका समर्थन किया।

अफसर के निलंबन का ऐलान
भाजपा विधायक सूबेदार सिंह ने एक अन्य सवाल पर आरोप लगाया कि किसानों को अनुदान की उपलब्ध कराई गई सूची फर्जी है।

अफसरों ने जो जवाब लिखकर दिया, मंत्री ने उसे ही पढ़ दिया। उन्होंने कैलारस एसएडीओ पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाकर जांच कराने की मांग की। यह अफसर तीन बार तबादले के बाद भी वहीं पदस्थापना पाने में सफल हो जाता है। मंत्री जांच को तैयार थे, लेकिन अफसर को हटाने पर सहमत नहीं दिखे। विधायक अपनी बात पर अड़े रहे।

आखिरकार मंत्री ने अफसर को हटाने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा से जुड़ा सवाल करते हुए भाजपा के आरडी प्रजापति ने आरोप लगाया कि अफसर दोषी पाए जाने के बाद भी नहीं हटाया जा रहा है। विधायक के आग्रह पर मंत्री विजय शाह ने अधिकारी को निलंबित किए जाने का ऐलान किया।

विधायक के सवाल पर अनुत्तरित रहे मंत्री
भाजपा के कैलाश जाटव ने गोटेगांव क्षेत्र में मंडी बोर्ड से सड़क निर्माण का मामला उठाया। उन्होंने पूछा, काम किसकी अनुशंसा पर हुआ है। कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की गैरमौजूदगी में कृषि राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक के आग्रह पर बनी होगी। इस पर जाटव ने कहा, उन्होंने एेसा कोई पत्र नहीं लिखा, यदि कोई पत्र है तो मंत्री दिखाएं। इस पर मंत्री बोले, क्षेत्र के लोगों ने की होगी। मंत्री के सटीक जवाब नहीं देने पर स्थिति बिगड़ती देख स्पीकर ने कहा कि मंत्री पत्र उपलब्ध करा दें।

गौर बोले, भ्रष्टाचार होता है
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि उद्यानिकी विभाग में हितग्राहियों के नाम जोडऩे-घटाने में भ्रष्टाचार होता है। सूची उजागर की जाना चाहिए। कांग्रेस विधायक विजय सिंह सोलंकी ने खरगोन जिले में उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से लाभांवितों की सूची मांगी तो सरकार की ओर से उन्हें सूची के स्थान पर संख्या थमा दी गई। विधायक ने इस पर एतराज जताया।

anil chaudhary Desk
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