नामांतरण, सीमांकन, बंटान को लेकर अभी भी परेशान है आम आदमी, तीन माह में ढाई हजार केस निपटे, इसके बाद भी लंबित

- इस जून में जारी सूची में 9 हजार 216 केस पेंडिंग थे, अब 6 हजार 700

- केस हल हुए, लेकिन उतनी रफ्तार से नहीं, जितना लोगों के लिए जरूरी है

 

भोपाल. कोरोना की दूसरी लहर के बाद राजस्व केसों की पेंडेंसी पहली लहर के मुकाबले ज्यादा बढ़ गई थी। जून के बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह तक करीब ढाई हजार से ज्यादा केसों का निपटारा कर दिया गया। इसके बाद भी 6 हजार 700 प्रकरण पोर्टल पर लंबित दिख रहे हैं। इनको लेकर आम आदमी परेशान हो रहा है। अब ये मामले जनसुनवाई में भी आना शुरू हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नामांतरण, सीमांकन के विवादित मामलों में ही देरी होती है, ऐसे में प्रकरण छह माह की सूची में चला जाता है। इस बार अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अलग-अलए एसडीएम कोर्ट में चल रही सुनवाई के काफी केस कोर्ट में अटके हैं। इस कारण भी तहसीलों में भीड़ बढ़ी हुई है।

जिले की कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार व अन्य राजस्व कोर्ट में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, व्यपवर्तन, अभिलेख दुरुस्तीकरण व अन्य के करीब छह हजार सात सौ केस अदालतों में पेंडिंग हैं। जानकार बताते हैं कि जिले में जितना अमला है, वह डेढ़ महीने भी लगकर काम करे तो इतने केस नहीं निपट सकते। इसमें से नामांतरण के काफी विवादित केस भी होते हैं। जिसमें दोनों पार्टी के नाम के विवाद के चलते कई बार पुराने खसरे निकालने पड़ते हैं।

राजस्व केसों की पेंडेंसी
भोपाल जिला--6700

भोपाल संभाग--39451

30 दिन की है समय सीमा
अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, रास्ता विवाद, आवासीय पट्टे के आवेदन की समय सीमा 30 दिन तय की गई है। अफसर को इस सीमा में काम पूरा करके देना है। न होने पर इसके बाद 250 रुपए का फाइन लगता है। इस कारण अविवादित काम तो समय सीमा में हो रहे हैं, लेकिन विवादित काम अटक रहे हैं। ऐसे में छह माह से लेकर दो साल तक के केस अटक जाते हैं। इन दिनों वैक्सीनेशन के कारण अमला काफी व्यस्त है। इस कारण भी देरी हो रही है।

केस-1, दोनों बार आवेदन किए, काम नहीं हुए

हनी मैथिल निवासी कोलार ने पिछली जनसुनवाई में जमीन का नामांतरण न होने की शिकायत की है। मैथिल ने बताया कि 23 मार्च 2021 को उसने आवेदन किया था, लोकसेवा गारंटी केंद्र में 140 रुपए जमा भी किए थे। इसके बाद एक और आवेदन सितंबर में किया था। तभी से चक्कर काट-काट कर परेशान है। लेकिन काम नहीं हो पा रहा। आवेदन कोलार तहसील में जाकर निरस्त हो रहा है।

केस-2, हर बार पांच हजार वर्गफीट जमीन हो रही कम
आशा निवासी सूखी सेवनिया ने बताया कि उनकी दस हजार वर्गफीट जमीन सूखी सेवनिया में है। इस जमीन का नामांतरण भी उनके नाम पर है। जिसके दस्तावेज उनके पास हैं। लेकिन पोर्टल पर जमीन 5 हजार वर्गफीट ही दिखाती है। इस सुधार को कराने के लिए उन्हें हुजूर तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। दो साल पूर्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराया, लेकिन फिर से पोर्टल पर जमीन कम हो गई।

सीधी बात...अविनाश लवानिया

सवाल::राजस्व केसों की पेंडेंसी प्रयासों के बाद भी कम नहीं हो रही?
जवाब: काफी केसों को इन महिनों में निपटाया गया है, पेंडेंसी का ग्राफ पहले से काफी कम हुआ है।

सवाल: आखिर क्या वजह है कि केस समय पर हल नहीं होते?

जवाब: केस समय पर हल न होने के पीछे लोगों के आपसी विवाद होते हैं। इनमें कई बार थोड़ा समय लगता है। लेकिन पूरी कोशिश रहती है कि लोगों को परेशानी न हो। देर करने वाले अफसरों पर जुर्माना भी लगाते हैं।

प्रवेंद्र तोमर Reporting
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