काम का जुनून ऐसा कि कम्प्यूटर सीखा और बन गईं 'स्मार्ट

धूप हो या बारिश, खुद बीमार लेकिन कोरोना से लडऩे जाती हैं घर-घर

By: Rohit verma

Updated: 11 Oct 2021, 01:01 AM IST

भोपाल. वैक्सीनेशन में आज प्रदेश देश में अव्वल है। इस मुकाम पर पहुंचाने में प्रदेश की 75 हजार आशा कार्यकर्ताओं का भी बड़ा हाथ है। धूप हो या बारिश, खुद की सेहत और परिवार की चिंता छोड़ ये लोगों को कोरोना के बचाने इस जुटीं हैं। लोगों को वैक्सीन के लिए प्रेरित करती हैं, घर-घर जाकर उनकी जानकारी जुटाती हैं। कई कार्यकर्ता खुद गर्भवती हैं, डॉक्टर ने उन्हें ज्यादा मेहनत करने से मना किया है, इसके बावजूद वे वैक्सीनेशन में लगी हैं। लोगों को असुविधा न हो इसलिए कम्प्यूटर और एंट्री करना सीख कर स्मार्ट कार्यकर्ता बन गईं हैं।

नौ महीने में 22 हजार को लगवाया टीका
वार्ड 44 की आशा कार्यकर्ता किश्वर अली बीते नौ महीने से वैक्सीनेशन कर रही हैं। सुबह पांच बजे उठकर परिवार का काम कर पूरे दिन वैक्सीनेशन करती हैं। किश्वर अब तक 22 हजार लोगों को वैक्सीन लगा चुकी हैं। सेंटर पर ड्यूटी ना हो तो वे घर-घर जाकर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए तैयार करती हैं।

लेकिन नहीं मिल रहा खुद का हक
प्रदेश की 75 हजार आशा कार्यकर्ताओं में से अधिकतर को अब तक सैलरी तक नहीं मिली। आशा-ऊषा कार्यकर्ता संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विभा श्रीवास्तव का कहना है कि आशा कार्यकर्ताएं नौ दुर्गा के रूप में लोगों के हर दुख को हर रही हैं, लेकिन उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा।

अब खुद पोर्टल पर करा रहीं हैं एंट्री
वार्ड 71 की आशा कार्यकर्ता वंदना शर्मा और वार्ड 36 की आशा कार्यकर्ता निशात खान अपने क्षेत्र में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करती हैं। लोगों को हाथ जोड़कर वैक्सीनेशन सेंटर चलने की गुहार लगाती हैं। यही नहीं वैक्सीन के बाद लोगों को सर्टीफिकेट जनरेशन, नाम गलत होने जैसी दिक्कतें होने पर उन्होंने खुद कम्प्यूटर चलाना सीखा ताकि काम सही तरीके से और जल्दी हो सके। अब ये कार्यकर्ता वैक्सीनेशन कराकर खुद कोविन पोर्टल पर एंट्री करा रही हैं।

Rohit verma Desk
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