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पंचायत चुनाव रदद करने की राह नहीं आसान, राह में कानूनी पेचीदगियां बेशुमार

कानूनी दांव-पेंच में फंस गई पंचायत
- विधि विशेषज्ञों की राय पर टिका चुनाव
- पंचायत विभाग के पीएस ने दी आयोग को अध्यादेश के संबंध में जानकारी

भोपाल

Updated: December 27, 2021 10:38:20 pm

Jitendra Chourasiya, भोपाल. प्रदेश में ओबीसी आरक्षण की आंच से झुलसे पंचायत चुनाव अब कानूनी दांव पेंच में उलझ गए हैं। सरकार ने बिना ओबीसी आरक्षण चुनाव नहीं कराना तय किया है, लेकिन इसके लिए कानूनी आधार अब तक पूरी तरह नहीं सका है। सरकार ने संशोधन अध्यादेश रदद करने का फैसला करके नोटिफिकेशन भी कर दिया, लेकिन अब चुनाव का भविष्य विधि विशेषज्ञों की राय पर टिक गया है, जिसका चुनाव आयोग को भी इंतजार है। चुनाव आयोग ने अपने वकीलों को अध्यादेश की वापसी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संबंध में सोमवार दोपहर 12 बजे अवगत कराते हुए उनसे विधिक राय मांगी है। आयोग को इस लीगल ओपिनियन का देर शाम तक इंतजार बना रहा।
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CM Shivraj Singh Chauhan MP CM Shivraj Singh Chauhan Sick News
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प्रमुख सचिव निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचे-
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सोमवार को मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आयुक्त बसंत प्रताप सिंह और सचिव बीएस जामोद को अध्यादेश वापसी के संबंध में जानकारी दी। इसके बाद आयोग ने इस मामले में विधिक राय मांगी है, ताकि आगे फैसला लिया जा सके इसकी वजह ये है कि अभी आयोग ने ओबीसी आरक्षण वाली सीटों को छोडकर बाकी जगह चुनाव कराने की प्रक्रिया जारी रखी है, लेकिन अब अध्यादेश रदद हो जाने से स्थिति बदल गई है, इस कारण आयोग ने विधिक राय मांगी है।
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कानूनी उलझनें यूं बेशुमार-
आयोग ने जिन बिंदुओं पर लीगल ओपीनियन मांगा है, उसमें अध्यादेश वापसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी जिक्र है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव जारी रखी जाए। यही नहीं अगर चुनाव निरस्त होते हैं तो फिर कब होंगे। चूंकि आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है तो क्या इसे निरस्त किया जा सकता है? वहीं 3 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगा। क्या इसके पहले चुनाव निरस्त करना जरूरी है। इसके अलावा जिन लोगों ने नामांकन पत्र भर दिया है, अगर वह सीटें ंआरक्षित होती हैं तो फिर उनका क्या होगा।
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पिछले तीन दिनों से असमंजस
आमजन और जन प्रतिनिधि असमंजस में हैं कि जिन लोगों ने पहले और दूसरे चरण के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है, उनका क्या होगा। कई उम्मीदवारों ने तो चुनाव प्रचार की सामग्रियां भी खरीद ली हैं। वाहन, टेंट और कार्यलय बुक कर चुके हैं। चूंकि पहले चरण का चुनाव 10 दिन बाद होना है, इसके चलते निर्वाचन अधिकारियों ने भी चुनाव से जुड़ी तैयारियां जैसे टेंट, भोजन व्यवस्था, मतदान दल के लिए वाहन की व्यवस्था कर ली थी। चुनाव निरस्त होने के बाद इनके आदेश और एडवांस निरस्त करने होंगे।
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ओबीसी आरक्षण के लिए मांगा समय
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने ओबीसी आरक्षण के लिए समय मांगा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मप्र राज्य निर्वाचन आयोग ने ओबीसी सीटों को आरक्षण के संबंध में एक हफ्ते का समय दिया था। पंचायतीराज आयुक्त आलोक कुमार सिंह ने आयोग के आयुक्त बसंत प्रताप सिंह से ओबीसी आरक्षण में लगने वाले समय सीमा के संबंध में अवगत कराया।
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अब आगे ये कदम संभावित-
- विधिक राय के हिसाब से चुनाव आयोग कदम उठाएगा, संभावना चुनाव स्थगित होने की।
- जिन रोटेशन पर चुनाव हो रहे अध्यादेश रदद होने से वह लागू नहीं इसलिए चुनाव होना मुश्किल।
- कोर्ट के निर्णय के आधार पर ही आगे पूरा मामला तय होगा, सुनवाई तीन जनवरी को होना है।
- सरकार को ओबीसी आरक्षण के लिए वापस सर्वे व अन्य जरियों से ओबीसी आबादी का आकलन करना होगा
- यदि सरकार ओबीसी आबादी का नया आकलन करती है तो उसके हिसाब से चुनाव कराने कोर्ट व चुनाव आयोग से मंजूरी लेना होगी।
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अब तक ये हुआ घटनाक्रम-
- पंचायत चुनाव रोटेशन के मामले में सुप्रीमकोर्ट में कांग्रेस पहुंची, सुप्रीमकोर्ट ने २७ फीसदी ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी।
- सुप्रीमकोर्ट के आदेश के तहत चुनाव आयोग ने बिना ओबीसी आरक्षण के बाकी सीटों पर चुनाव कराने की प्रक्रिया को करना तय किया।
- विधानसभा में ओबीसी आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव न कराने का शासकीय संकल्प पारित किया गया।
- शिवराज सरकार ने कैबिनेट में पंचायत चुनाव संबंधित अध्यादेश को रदद करने का प्रस्ताव मंजूर किया और राज्यपाल को भेजा।
- राज्यपाल ने अध्यादेश को रदद करने की मंजूरी दी, सरकार ने देर शाम उसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया, फिर निर्वाचन आयोग को सूचना दी।
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