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केंद्र की सख्ती बिजली सब्सिडी में पड़ रही भारी, हिसाब भी होगा सख्त

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- केंद्र की नई गाइडलाइन, सब्सिडी हर महीने दो, पूरी ऑडिट रिपोर्ट भी भेजो, प्रदेश में तंगहाली के कारण दिक्कतें
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भोपाल

Published: November 19, 2021 08:57:36 pm


भोपाल। बिजली सब्सिडी के मामले में केंद्र की सख्ती मध्यप्रदेश को भारी पड़ रही है। दरअसल, केंद्र सरकार ने साफ कह दिया है कि बिजली की सब्सिडी का भुगतान हर महीने किया जाए। ऐसा नहीं होने पर केंद्र की बिजली योजनाओं की मदद रूक सकती है। मध्यप्रदेश ने सब्सिडी भुगतान में टाइम पीरियड में छूट चाही थी, लेकिन केंद्र ने इससे इंकार कर दिया। अब स्थिति यह है कि मध्यप्रदेश कम से कम तीन महीने की छूट चाहता है, लेकिन उसकी अनुमति भी नहीं मिल पाई है। कोरोना के कारण आर्थिक मोर्चे पर स्थिति बेहतर नहीं है, इस कारण बिजली सब्सिडी को लेकर परेशानी हो रही है। सरकार इसी कारण बिजली सब्सिडी घटाने के प्रयास भी कर रही है, लेकिन अब तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।
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ये 2 अहम बिंदु जिन पर दिक्कतें-
1. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने गाइडलाइन दी है कि राज्य की ओर से बिजली कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी त्वरित दी जाए। मासिक तौर पर भुगतान हो।
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यह मांग व दिक्कत- मध्यप्रदेश चाहता है कि सालभर में कभी भी सब्सिडी देने की छूट मिल जाए। साल के आखिरी में केंद्र सब्सिडी की जवाबदेही तय करें। दिक्कत ये कि यदि सब्सिडी तुरंत दी जाएगी तो वह पैसा तुरंत चुकाना होगा। प्रदेश के पास अभी इतना पैसा नहीं है। सालभर के पीरियड में सरकार बजट एडजेस्टमेंट कर लेती है, लेकिन मासिक या तिमाही भुगतान में यह नहीं हो सकेगा। केंद्र ने इसे इंकार कर दिया है। केंद्र ने फिलहाल अधिकतम तीन महीने की देरी को फौरी तौर पर मौखिक रूप से माना है।
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2. सब्सिडी का पूरा हिसाब और ऑडिट रिपोर्ट दी जाए। यह ऑडिट रिपोर्ट्स भी भुगतान के बाद त्वरित दी जाए। यानी मासिक या तिमाही प्रक्रिया के तहत दी जाए।
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यह मांग व दिक्कत- मध्यप्रदेश सब्सिडी राशि की तरह ही हिसाब व ऑडिट रिपोर्ट्स भी सालाना देना चाहता है। वित्तीय सत्र के अंत में पूरी रिपोर्ट देने की बात कही गई है, लेकिन केंद्र ने इसे माना नहीं है। मध्यप्रदेश को हर महीने रिपोटर्् देने व ऑडिट में दिक्कत ये है कि इससे हर महीने की आर्थिक जवाबदेही तय हो जाएगी। बजट नहीं होने की स्थिति में प्रदेश डिफाल्टर ग्रेड में आ सकता है। सालाना देने पर वह ऑडिट एडजेस्टमेंट कर सकता है।
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इतनी सख्ती क्यों?
दरअसल, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय केंद्रीय योजनाओं की आर्थिक मदद में त्वरित जवाबदेही तय करना चाहता है। केंद्रीय मंत्रालय बिजली में जो राज्य सरकार को आर्थिक मदद देता है, उसका हिसाब अभी सालभर लेट या कई बाद सालों लेट आता है। केंद्रीय मंत्रालय अब सब आनलाइन करने की तैयारी कर रहा है। इस कारण नए नियम लाए गए हैं। अभी राज्यों के स्तर पर एक मद के बजट का उपयोग दूसरे मद में कर लिया जाता है और बाद में साल के आखिरी में समायोजन करके ऑडिट दे दिया जाता है। नियमानुसार एक मद का बजट दूसरे मद में उपयोग नहीं कर सकते। इस कारण केंद्रीय मंत्रालय राज्यों की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए नए नियम लाया है। इससे बिजली में जिस मद का बजट है, उसी में उपयोग करना होगा, क्योंकि हर महीने हिसाब देना होगा।
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मध्यप्रदेश के लिए ज्यादा भारी सब्सिडी-
मध्यप्रदेश के लिए बिजली सब्सिडी का गणित ज्यादा भारी है, क्योंकि सरकार करीब 21 हजार करोड़ की सब्सिडी दे रही है। इस सब्सिडी को कम करने के लिए बीते छह महीने से सरकार प्रयास कर रही है। इसके लिए मंत्रियों का समूह भी गठित किया गया है, लेकिन अब तक इसकी फायनल रिपोर्ट नहीं आ सकी है। आगे चलकर सब्सिडी पर सख्त हुए नियमों के कारण मध्यप्रदेश इसमें भारी कमी करेगा।
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