कूनो अभयारण्य बना बाघ टेरेटरी, अब वंशवृद्धि के लिए बाघिन भेजेंगे

कूनो अभयारण्य बना बाघ टेरेटरी, अब वंशवृद्धि के लिए बाघिन भेजेंगे

Jitendra Chourasia | Publish: Dec, 08 2017 11:34:28 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

गिर के शेर का होता रहा इंतजार...

भोपाल. कूनो अभयारण्य गिर के शेरों के इंतजार में बाघ की टेरेटरी बन गया। अब सरकार कूनो के बाघ के लिए बाघिन भेजेगी। यदि बाघ भेजे जाते हैं, तो टेरेटरी की जंग हो सकती है। गिर के शेर आते हैं, तो भी उनका आमना-सामना बाघ से होगा, इसलिए सरकार ने वंशवृद्धि के लिहाज से बाघिन भेजने का फैसला किया है। इसके लिए कानूनी पहलुओं पर मंथन चल रहा है। कूनो करीब ७५० वर्ग किलोमीटर में है। पूरा अभ्यारण्य खाली पड़ा होने के कारण बाघ ने बड़े क्षेत्र को अपनी टेरेटरी बना लिया है। बीते एक साल में चार से पांच बार यहां बाघ की उपस्थिति दर्ज हुई है। इसी कारण यहां बाघ को बसाने का निर्णय बीते मंगलवार को सरकार ने लिया था। एक बाघिन भेजने के बाद ही दूसरे बाघ या बाघिन कूनो भेजे जाएंगे।

कानूनी मंथन में जुटी सरकार
यह मामला सुप्रीमकोर्ट में है, इसलिए बिना सुप्रीमकोर्ट को रिपोर्ट किए सरकार बदलाव नहीं कर सकती। इसके लिए विधि विभाग से भी परामर्श लिया जाएगा। मामले में अब क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने प्रकरण में पार्टी बनने के लिए कोर्ट में आवेदन लगाना तय किया है। वहीं, पर्यावरणविद् अजय दुबे भी इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अवमानना केस लगाने की बात कह चुके हैं।
दो दशक से इंतजार : कूनो का गिर के शेरों का इंतजार दो दशक से भी ज्यादा पुराना है। ६० करोड़ खर्च करके इसे बसाया गया है। गुजरात के अडि़यल रवैये के चलते करीब डेढ़ साल पहले यहां दूसरे राज्यों के शेर लाने पर भी प्लानिंग शुरू हुई थी, लेकिन वह मामला भी आगे नहीं बढ़ सका।

 

७५० वर्ग किलोमीटर में है कूनो अभ्यारण्य
६० करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किया अभ्यारण्य
०१ साल में चार-पांच बार चिह्नित हुआ बाघ

कूनो में बाघ पहले ही आ चुका है, इसलिए बाघिन भेजने पर विचार चल रहा है। निर्णय सीएम स्तर पर होना है।
- दीपक खांडेकर, एसीएस, वन विभाग, मध्यप्रदेश
गुजरात के डर से प्रदेश अपने हित न भूले। सरकार के बाघ लाने के निर्णय के खिलाफ हम भी सुप्रीमकोर्ट जा रहे हैं।
- रामनिवास रावत, क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक, विजयपुर-श्योपुर
कूनो अभ्यारण्य गिर के शेरों के लिए बना था, इस कारण सरकार को बाघ बसाने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
- दुर्गालाल विजय, क्षेत्रीय भाजपा विधायक श्योपुर

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