हादसों से नहीं लिया सबक, हाइवे पर मौत के टर्निंग पाइंट ने बढ़ाई मुसीबत

बीआरटीएस कॉरिडोर से तेज गति से चलने वाली बसों पर नहीं लगी लगाम

भोपाल. भोपाल-इंदौर हाइवे पर सफर करने वाले यात्रियों को हमेशा हादसे का डर बना रहता है। शाम ढलने के बाद यहां ये निकलना और ज्यादा मुश्किल भरा हो जाता है। मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, ऐसे में वाहन चालकों को मार्ग पर बने टर्निंग पाइंट नजर नहीं आते और वहां से निकलने वाले वाहन चालक अक्सर हादसे का शिकार हो जाते हैं।

हाइवे मार्ग के अंतर्गत लालघाटी से संतनगर के सीहोर नाके तक और खजूरी ग्रामीण क्षेत्र तक मार्ग पर जहां जहां टर्निंग पाइंट बने हुए हैं उन सभी जगहों पर वाहन चालकों को हादसे का डर बना रहता है। यहां पर आए दिन हादसे होते रहते हैं या फिर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

 

इसकी वजह लालघाटी से सीहोर नाका क्षेत्र तक शहरी क्षेत्र निर्मित होने के बावजूद भी टर्निंग पाइंट पर ना तो कहीं सांकेतिक निशान हैं ना ही रेडियम, ना ब्रेकर बना हुआ है। ऐसे में कॉरीडोर में चलने वाली लाल बसें और वोल्वो बसों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगता है।

टर्निंग पाइंटो पर अंधेरा होना भी बड़ी परेशानी
कॅारीडोर सहित आम रास्तों पर भी अंधी रफ्तार से बसें दौड़ती रहती हैं। लगातार हो रहे हादसों के बाद भी बसों की रफ्तार पर अंकुश नहीं लग रहा है। टर्निंग पाइंट पर हादसे रोकने के इंतजाम नहीं होने से इस मार्ग पर सबसे ज्यादा सडक़ दुर्घटनाएं हुई हैं। ईसाई कब्रिस्तान के पास हलालपुर क्षेत्र में हादसे होते हैं।

कई जगहों पर मुख्य मार्ग पर लाइट जलने से सडक़ हादसों में कमी आई है। सवारी बसें शहरी क्षेत्र में भी तेज गति से निकलती हैं और कई बार अनियंत्रित होकर जालियों व डिवाइडरों में जा घुसी हैं।

 

आशवासन के बाद भी नहीं हटा कॉरिडोर
बैरागढ़ के व्यापारियों से बैठक के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने कॉरिडोर को हटाने का आशवासन दिया था, लेकिन दिल्ली से आई टीम ने सर्वे के बाद इसे हटाने की आवशयकता नहीं समझी और कॉरिडोर को नहीं हटाया गया।

इन्दौर-भोपाल चलने वाली बसें कॉरिडोर से तेज रफ्तार में निकलती हैं। इन पर कार्रवाई होना चाहिए। दूसरी ओर टर्निंग पाइंट पर हादसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करना चाहिए।
विवेक दरियानी, रहवासी

टर्निंग पाइंट पर आए दिन एक्सीडेंट होते है। टर्निंग पाइंट पर ना तो कहीं सांकेतिक निशान हैं ना ही रेडियम, ना ब्रेकर है। ऐसे में वोल्वो बसों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगता है, जिससे हादसे हो जाते हैं।
सुमित कनोजिया, रहवासी

Rohit verma
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