पूरा दिन प्रोटोकॉल में गुजर जाता है, रेवेन्यू कोर्ट में सुनवाई तक नहीं कर पाते

राज्य भूमि सुधार आयोग की बैठक में अफसर बोले...

By: anil chaudhary

Published: 09 Dec 2017, 09:28 AM IST

भोपाल. प्रदेश में नया भूमि प्रबंधन कैसा हो, जिसमें आम जनता को ज्यादा सहूलियत दी जा सके। यह कम से कम ५० साल और उससे ज्यादा साल तक चले, इसको ध्यान में रखते हुए राज्य भूमि सुधार आयोग सुझाव ले रहा है।
प्रदेश के छह संभागों में हुई बैठकों में एक हजार सुझाव आए हैं। इनकी समीक्षा बैठक कमिश्नर कार्यालय में हुई। बैठक में आयोग के अध्यक्ष आईएनएस दाणी ने अधिकारियों से कहा कि राजस्व कोर्ट के कामों में देरी क्यों होती है। अधिकारियों ने बताया, बड़े शहरों में रेवेन्यू कोर्ट के साथ-साथ प्रोटोकॉल भी रहता है। कभी-कभी पूरा दिन प्रोटोकॉल में निकल जाता है। एेसे में रेवेन्यू कोर्ट में प्रकरणों की सुनवाई तक नहीं कर पाते हैं। संभागायुक्त अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कहा, इस समस्या को सुलझाने प्रदेश में दक्षिण भारतीय पैटर्न अपनाने की जरूरत है। रेवेन्यू कोर्ट व फील्ड तहसीलदार अलग-अलग रखे जाने चाहिए। फील्ड तहसीलदार को दण्डात्मक कार्रवाई करने के अधिकार दिए जाएं। दाणी ने कहा कि यह व्यवस्था बड़े जिलों में की जा सकती है।

 

तहसील-जिले का स्ट्रेक्चर हो अलग
जिले के स्टे्रक्चर की बात आई, तो संभागायुक्त ने कहा, तहसील, डिवीजन व डिस्ट्रिक्ट कार्यालय में तहसीलदार, नायब तहसीलदार व एसडीएम के स्टे्रक्चर नए सिरे से तय होना चाहिए। बड़े जिलों में यह अलग हो तथा छोटे जिलों में अलग। राजस्व व फील्ड वर्क के अधिकारियों के अलग-अलग होने से राजस्व प्रकरणों के निराकरण की गति बढ़ेगी। प्रोटोकॉल के समय अधिकारी मौके पर तैनात रह सकेगा।

 

संहिता में संशोधन के लिए यह रखे सुझाव
कोई भी राजस्व प्रकरण अदम पैरवी में खारिज न हो, मैरिट के आधार पर उनमें डिसीजन हो।
ऑर्डर शीट को तहसीलदार व एसडीएम अपने कंट्रोल में रखें। आदेश वे स्वयं बनवाएं, रीडर के भरोसे न छोंड़े।
पटवारी हल्के बनाने का अधिकार कलेक्टर के पास होना चाहिए।
कलेक्टर ही बंदोबस्त अधिकारी हो, उसके नीचे एक डिप्टी सेटलमेंट ऑफिसर हो। यह अधिकारी अपर कलेक्टर स्तर का हो।
शहरी भूमि प्रबंधन संचालनालय स्थापित हो, ताकि छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी शहरी जमीनों के विवाद तेजी से निराकृत हो

anil chaudhary
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