नक्सली प्रभावित क्षेत्रों से MP  में सायबर ठगी

By: Manish Gite

Published: 05 Dec 2015, 11:30 PM IST

झारखंड के ठग गिरोह के दो सदस्यों को सायबर सेल ने किया गिरफ्तार, होशंगाबाद के जिला आपूर्ति नियंत्रक से की थी 1.70 लाख की ठगी...। पत्रिका ने कुछ दिन पहले ही बता दिया था कि झारखंड और बिहार आदि राज्यों के अपराधियों की नजर प्रदेश के बैंक अकाउंट पर है...।

हितेश शर्मा भोपाल
भोपाल। महज बारहवीं से बीए पास युवा फोन पर आम जनता से लेकर अधिकारी तक को लाखों की चपत लगा रहे हैं। इसके लिए झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को एक से दो माह की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वह प्रोफेशनल कॉल सेंटर कर्मचारियों की तरह बात कर लोगों से ठगी कर सके।


गिरोह हर माह सैकड़ों लोगों को ठगी का शिकार बनाता है। ऐसे ही एक गिरोह के दो सदस्यों को सायबर सेल ने गिरफ्तार किया है। दोनों अब तक करीब पांच सौ वारदातों में शामिल रहे हैं। पुलिस अब प्रदेश के ऐसे पीडि़तों की तलाश कर रही है जो गिरोह की वारदात का शिकार हो चुके हैं। गिरोह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से वारदात करता ताकि नक्सलियों के डर से पुलिस उन तक पहुंच ना पाए।


एडीजी राजेन्द्र कुमार के अनुसार होशंगाबाद के जिला आपुर्ति नियंत्रक भीम सिंह तोमर को 20 नवम्बर  को रिजर्व बैंक का अधिकारी बनकर सायबर ठग ने फोन किया। एटीएम कार्ड नम्बर, सीवीवी नम्बर,  पासवर्ड और ओटीपी लेकर रतलाम के एसबीआई की कलेक्ट्रैट शाखा स्थित खाते से 1.70 लाख रुपए निकाल लिए। इस रकम से ऑनलाइन शापिंग व मोबाइल रिचार्ज कराए।


उन्होंने इसकी शिकायत सेल में की। सेल ने ऑनलाइन शापिंग कंपनी, गेट वे कंपनी से ऑर्डर केसिंग करवा दिया। सामान की डिलेवरी फरियादाबाद की भगत सिंह कॉलोनी में होना थी। पुलिस ने दबिश देकर राहुल उर्फ रमेश मंडल मूल निवाी बांका, बिहार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पिछले ती माह से गिरोह के लिए काम कर रहा था। बीए पास आरोपी दिखावे के लिए फैक्ट्री में मजदूरी करता था।


हर काम के बदले मिलता कमीशन
रमेश अब तक करीब ढाई सौ कॉरियर ले चुका है। उसे इन कोरियर को झारखंड भेजना होता था। इसके बदले उसे पांच से दस प्रतिशत कमीशन मिलता था। इसके पास से छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा के आधार कार्ड भी मिले। जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे तैयार कराए गए थे।


झारखंड की कई आईडी भी मिली। इसकी निशानदेरी पर पुलिस ने अजित मंडल निवासी बुढ़ी कुरवा, झारखंड को गिरफ्तार कर लिया। वह बीए सेकंड ईयर का छात्र है। वह प्रतिदिन बारह से पंद्रह लोगों को बैंक अधिकारी बनकर फोन लगाता था। आठ से दस वारदातों में कामयाब हो जाता। इसमें अब तक तीन सौ से ज्यादा वारदात करना स्वीकार किया है। इसे भी ठगी हुई राशि का दस प्रतिशत कमीशन मिलता था।


दिल्ली पुलिस के आने की भनक लगते ही मास्टमाइंड फरार
दोनों ने बताया कि भास्कर मंडल निवासी जामताड़ा गिरोह का सरगना है। वह फोन लगाने वालों को एक से दो माह की ट्रेनिंग देता था। वही फर्जी सिम उपलब्ध कराता था। दस दिन बाद सारी सिम वापस लेकर दूसरी उपलब्ध करा दी जाती।


झारखंड में ही ऐसे दस से ज्यादा गिरोह हैं। वह बारह से ज्यादा राज्यों में सक्रिय हैं। गिरोह में अनिल मंडल, आकाश मंडल, शेखर मंडल, विकास मंडल निवासी झारखंड शामिल हैं। यह मोबाइल व फर्जी सिम उपलब्ध कराते हैं। खातों में ट्रांसफर रकम और शापिंग का सामान भी यही ठिकाने लगाते हैं।


संगठित तरीके से हो रही वारदात
गिरोह चार हिस्सों में बंटकर वारदात करता है। मोबाइल उपलब्ध कराने वाला, सिम लाने वाला, फोन लगाने वाला और सामान की डिलेवरी लेना वाला। सभी सिम व मोबाइल फर्जी पतों से खरीदे जाते हैं। फिर डिलेवरी के सामना को गिरोह के सभी सदस्य एक जगह पहुंचा देते। यहां सामान की बिक्री कर केश एकत्रित किया जाता। वहीं फर्जी नामों से खुले बैंक एकाउंट का पैसा भी निकालकर एक खाते में पहुंचा दिया जाता है।


तीन राज्यों के नौ जिलों से हो रही प्रदेश सहित देशभर में वारदातें
सायबर ठग मध्य प्रदेश में बिहार, पश्चिम बंगाल और बिहार बैठकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। यहां सक्रिय गिरोह प्रदेश में ही नहीं, देश के कई राज्यों में सक्रिय हैं, जिन क्षेत्रों से ठगी की वारदातें हो रही हैं, वे नक्सल प्रभावित इलाके हैं। सायबर सेल के अधिकारियों को आशंका है कि नक्सली अपनी हाईटेक विंग के जरिए वारदातों को अंजाम दे रहे हैं या नक्सलियों ने इस तरह के गिरोहों को अपना संरक्षण दे रखा है।


सायबर फ्रॉड की अस्सी फीसदी वारदातें बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों से हो रही है। झारखंड में जामताड़ा, देवघर, दुमका, लातेहार, गढ़वा, पलामू, बिहार के किशनगंज, मूंगेर, बांका, भागलपुर, कटिहार, बनका और पश्चिम बंगाल के नादियाद, हावड़ा, आसनसोल व रानीगंज क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रदेश में इस साल फोन पर ठगी की करीब 2000 वारदातें हुई, जिसमें से करीब 1800 वारदातें इन्हीं क्षेत्रों से अंजाम दी गई हैं। पुलिस ने मामलों की पड़ताल शुरू की तो पता चला अधिकांश मामलों में अपराधियों की लास्ट लोकेशन इन्हीं क्षेत्रों में मिली। सिम कार्ड भी फर्जी नामों से इन्हीं क्षेत्रों से खरीदी गए थे।


जंगल में पुलिस भी खाती खौफ
नक्सलियों की तरह सायबर अपराधियों ने भी जंगल में डेरा जमा रखा है। अधिकांश जगह इतने अंदरूनी इलाकों में हैं कि पुलिस भी नक्सलियों के डर से यहां तक पहुंचने में खौफ खाती है। कुछ प्रकरणों में जांच के सिलसिले में जब सायबर सेल की टीम बिहार पहुंची, तो स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने भी साथ देने से इंकार करते हुए हाथ खड़े कर दिए। स्थानीय पुलिस से मदद नहीं मिल पाने से टीमों को भी हर बार खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र की पुलिस भी कई बार दबिश दे चुकी है। नक्सलियों का आतंक होने से किसी भी राज्य के अधिकारी यहां जाने से डरते हैं।

फर्जी खातों में लाखों का ट्रांजेक्शन
बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों से हो रही वारदातों से सेल के अधिकारी भी परेशान हैं। खास बात यह है कि ठगी की रकम से या तो रिचार्ज किए गए हैं या खरीदी। अधिकांशत: इलेक्ट्रानिक्स व आधुनिक गजट्स ही खरीदे गए। गिरोह फर्जी पते पर बुलाए गए सामान को बाजार में बेच देते हैं। गिरोह के सदस्य इस रकम को विभिन्न राज्यों के बैंक में खुले खातों में जमा करा देते हैं। फिर इस रकम को किन्हीं अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। सायबर सेल को कुछ ऐसे खातों की जानकारी मिली है।

गिरोह को पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं
फोन पर होने वाली सायबर ठगी की वारदातों में अधिकांश कॉल बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों से आते हैं। यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं। हम स्थानीय पुलिस अधिकारियों की मदद से इस तरह के गिरोहों को पकडऩे का प्रयास कर रहे हैं।
-राजेन्द्र कुमार, एडीजी, सायबर सेल
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