बड़ी चुनौतियां हैं, मुश्किल लक्ष्य

- क्या है प्रदेश के अहम विभागों की स्थिति और भविष्य की चुनौतियां

By: anil chaudhary

Published: 14 Jul 2020, 05:16 AM IST

भोपाल. शिवराज सरकार के नए मंत्रियों के सामने अपने-अपने विभागों को लेकर कई चुनौतियां हैं। कोरोना काल में तमाम सेक्टर की व्यवस्थाएं ध्वस्त हुई हैं। इनको पटरी पर लाने की चुनौती मंत्रियों के सामने है। साथ ही सामने २५ उपचुनाव है, इसलिए उनको हर काम बहुत सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि इनके विभागों के मामले चुनावी मुद्दा बनकर भी इनके दरपेश होंगे। पढि़ए जनता से सीधी तरह जुड़े कुछ विभागों की स्थिति और चुनौतियां...

स्वास्थ्य : बीमार स्वास्थ्य सुविधा से कोरोना की जंग
कोरोना संक्रमण काल में स्वास्थ्य विभाग संभालना सबसे बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ही सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत है।प्रदेश में सिर्फ 1220 आईसीयू बेड हैं। साधारण बेड की संख्या लगभग 20 हजार है, जिसे कोरोना नियंत्रण की वैकल्पिक व्यवस्थाओं को जोड़कर लगभग 70 हजार किया है। सरकारी अस्पतालों में 70 फीसदी पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञों के 3278 पदों पर 1029 डॉक्टर काम कर रहे हैं।
जल संसाधन : 50 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य
मध्यप्रदेश में इस समय 33 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। मुख्यमंत्री ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 50 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। इसमें मौजूदा वर्ष में ही 1.94 लाख हेक्टेयर सिंचाई बढऩा है। शिवराज सरकार ने अपनी पिछली पारी में सिंचाई परियोजनाओं को भरपूर दोहन किया है, ऐसे में अब बांधों से और ज्यादा सिंचाई के लिए पानी निकालना मुश्किल होगा। नई परियोजनाओं को बनाना भी एक चुनौती है।

 

वित्त - पटरी पर लाना होगा अर्थव्यवस्था
कोरोना के कहर से अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गई है। 36 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। तीन महीने से राजस्व वसूली भी ठप है। 20 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र है। इसमें मुख्य बजट लाया जाना है। इस मुख्य बजट को व्यवस्थित रूप से पास कराना और क्रियान्वित करना चुनौतीपूर्ण रहेगा। साथ ही मध्यप्रदेश में विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण सहित अन्य गतिविधियों को वित्तीय मोर्चे पर संचालित करना भी बड़ी चुनौती है। कोरोना के कारण अब अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाना बड़ी चुनौती है।

उद्योग वाणिज्य- कोरोना के कहर के कारण उद्योग
उद्योग-धंधे लगभग ठप हैं। 150 से ज्यादा बड़े उद्योग अभी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहे हैं। 22 हजार से ज्यादा उद्योग भी 50 से 60 फीसदी क्षमता पर संचालित हैं। ज्यादातर उद्योग लॉकडाउन में स्टांप ड्यूटी, बिजली के फिक्स चार्ज और अन्य तमाम टैक्स की माफी चाहते हैं, लेकिन सरकार ने केवल अक्टूबर तक बिजली बिल के फिक्स चार्ज की वसूली को स्थगित किया है। इन उद्योग-धंधों में वापस सौ फीसदी उत्पादन और आर्थिक स्थिति को संभालना बड़ी चुनौती है।

नगरीय प्रशासन- जमीन पर लाना होगा मास्टर प्लान
पिछली कांग्रेस सरकार ने भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट घोषित कर दिया था और दावे-आपत्ति बुलाई थी। इन दावे-आपत्तियों पर अभी सुनवाई नहीं हो सकी है। अब यह मास्टर प्लान लाना बड़ी चुनौती है। सरकार इसे नए सिरे से बनाएगी। इसी तरह 83 नगरीय निकाय के मास्टर प्लान भी विभिन्न स्टेज पर अटके हुए हैं, इन्हें लाना बड़ी चुनौती है। साथ ही भोपाल-इंदौर में मेट्रो का काम तेजी से पूरा करना और 2022 तक मेट्रो को लाना भी चुनौतीपूर्ण रहेगा।

ऊर्जा- घाटे से उबरना बड़ी चुनौती
पिछली कांग्रेस सरकार में बिजली के बिल 100 तक सिमट गए थे। अब सरकार ने इस योजना को रिफॉर्म किया है और संबल योजना के तहत केवल गरीबों को इसका लाभ देना तय किया है। ऐसे में भारी-भरकम बिजली बिलों को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती होगा। साथ ही घाटे में चल रही बिजली कंपनियों को उभारना भी बहुत बड़ी चुनौती है। नई बिजली दरों के बोझ से जनता को राहत दिलाना भी बड़ी चुनौतीपूर्ण रहेगा।

स्कूल शिक्षा- पढ़ाई से बदलाव तक कई चुनौती
नए मंत्री के लिए कोरोना काल में स्कूलों को संक्रमण की आशंका से बचाकर संचालित कराना बड़ी चुनौती रहेगा। साथ ही यदि संक्रमण के कारण स्कूल शुरू नहीं हो पाते हैं, तो ऑनलाइन क्लास और बच्चों के की शिक्षण व्यवस्था को व्यवस्थित करना भी बड़ी चुनौती है। इसके अलावा इस बार स्कूल चलें हम अभियान भी नहीं चल सका है, इसलिए नामांकन बरकरार रखना भी बड़ी चुनौती है। साथ ही कोरिया पैटर्न स्टीम मॉडल अपनाकर शिक्षण व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं। इन बदलावों को बरकरार रखना भी चुनौती है।

लोक निर्माण विभाग- चुनावी मुद्दा होंगी सड़कें
पिछले दो साल से प्रदेश में सड़कों निर्माण नहीं हो पाया है। पिछली बारिश में अधिकतर सड़कें जर्जर हो चुकी थी। इन सड़कों की मामूली मरम्मत हुई, लेकिन हालत खराब है। तकरीबन 3००० की एमडीआर (मुख्य जिला मार्ग) सड़के बनना है। इसके अलावा 2००० किमी की अन्य सडकें भी बनना है। बारिश का मौसम आ जाने से सड़क निर्माण में बाधा तो आएगी ही सड़के भी खराब हो जाएगी। ऐसे उपचुनाव में सड़क बड़ा मुद्दा रहेगा। कई पुलों का निर्माण भी होना है। विभाग में भ्रष्टाचार रोकना भी एक चुनौती है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास- गांवों में रोजगार दिलाना होगा
प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन में तकरीबन 15 लाख प्रवासी श्रमिक लौटे हैं। इनमें से 80 फीसदी गांवों में ही लौटे हैं। सरकार ने इन्हें मनरेगा से रोजगार दिलाने का दावा किया है, लेकिन इन्हें व्यवस्थित और नियमित रोजगार दिलाना एक चुनौती है।

 

Kamal Nath
anil chaudhary Desk
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