इन 8 मुख्यमंत्रियों ने बेटों को सौंपी राजनीतिक विरासत, 6 कांग्रेसी थे तो दो भाजपाई; 7 के बेटे मंत्री भी बने

इन 8 मुख्यमंत्रियों ने बेटों को सौंपी राजनीतिक विरासत, 6 कांग्रेसी थे तो दो भाजपाई; 7 के बेटे मंत्री भी बने

Pawan Tiwari | Publish: Apr, 13 2019 11:09:12 AM (IST) | Updated: Apr, 13 2019 11:10:20 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

इन 8 मुख्यमंत्रियों ने बेटों को सौंपी राजनीतिक विरासत, 6 कांग्रेसी थे तो दो भाजपाई; 7 के बेटे मंत्री भी बने

भोपाल. राजनीति में अक्सर वंशवाद और परिवारवाद की बात होती है। इस बार के लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री तो एक मौजूद मुख्यमंत्री के बेटे को कांग्रेस ने टिकट दिया है। मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को छिंदवाड़ा संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया गया है तो पूर्व मुख्यमंत्री अजय सिंह को सीधी संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। मध्यप्रदेश में अब तक 18 मुख्यमंत्री हुए हैं। 18 मुख्यमंत्री में से कई ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटों तो सौंप दी है। अपने बेटों को विरासत सौंपने वाले मुख्यमंत्री किसी एक दल के नहीं बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के हैं।

 

मध्यप्रदेश के वो मुख्यमंत्री जिन्होंने अपने बेटों को सौंपी अपनी राजनीतिक विरासत

पंडित रविशंकर शुक्ल
पिता- मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल थे। वो 1 नवम्बर 1956 से 31 दिसम्बर 1956 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पंडित रविशंकर शुक्ल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कद्दावर नेता और एक स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए जब नए राज्य मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री नियुक्त हुए थे। रविशंकर शुक्ल का निधन मुख्यमंत्री रहते हुए हुआ था। पंडित रविशंकर शुक्ल के दो बेटे थे। विद्याचरण शुक्ल और श्यामा चरण शुक्ल।

 

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श्यामा चरण शुक्ल- श्यामाचरण शुक्ल मध्यप्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। वो तीन बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। तीनों बार वो 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। श्यामाचरण शुक्ल पहली बार 26 मार्च 1969 से 28 जनवरी 1972 तक सीएम रहे। उसके बाद दूसरी बार 23 दिसम्बर 1975 से 29 अप्रैल 1977 तक मध्यप्रदेश के सीएम रहे। तीसरी बार वो 9 दिसम्बर 1989 से 4 मार्च 1990 तक प्रदेश के सीएम रहे।


विद्याचरण शुक्ल- 1957 मे पहली बार महासमुंद से लोकसभा चुनाव जीते और सबसे युवा सांसद बने। वे रिकॉर्ड नौ बार लोकसभा के सांसद रहे। 1966 मे पहली बार इंदिरा गांधी कैबिनेट में शामिल हुए। चन्द्रशेखर सरकार में विदेश मंत्री रहे।

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दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह 1993 में पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने उसके वो दोबारा 1998 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। दिग्विजय सिंह का संबंध राघौगढ़ रियासत से है। दिग्विजय सिंह दो बार लोकसभा सदस्य भी रहे। दिग्विजय सिंह के बेटे भी राजनीति में है। उनका नाम जयवर्धन सिंह है।

जयवर्धन सिंह- पिता दिग्विजय सिंह की परंपरागत सीट राघौगढ़ से पहली बार 2013 में विधानसभा चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2018 में इसी सीट से दोबारा चुने गए और मौजूदा समय में प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।

 

अर्जुन सिंह
मध्यप्रदेश की सियासत में अर्जुन सिंह एक बड़ा नाम थे। अर्जुन सिंह तीन बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। कहा जाता है कि उन्होंने प्रदेश में अपना रूतबा दिखाने के लिए एक दिन के लिए सीएम पद की शपथ ली थी और फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंजाब का राज्यपाल बना दिया था। अर्जुन सिंह 8 जून 1980 से 10 मार्च 1985 तक प्रदेश के सीएम रहे। उन्होंने अपनी परांगरागत सीट चुरहट अपने बेटे अजय सिंह राहुल भैया को सौंप दी थी।

अजय सिंह- अजय सिंह राहुल भैया मध्यप्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता हैं तो वहीं, विंध्य में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। अजय सिंह प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी हार हुई ती। जिस कारण से 2019 में अजय सिंह को पार्टी ने सीधी संसदीय सीट से उम्मीदवार घोषित किया है।

 

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वीरेन्द्र कुमार सकलेचा
जनता पार्टी की सरकार में वीरेन्द्र कुमार सकलेचा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। वो 18 जनवरी 1978 से 19 जनवरी 1980 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वीरेन्द्र कुमार सकलेचा के बेटे ओमप्रकाश सकलेचा भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता है।
बेटा- ओमप्रकाश सकलेचा नीमच जिले की जावद विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। ओमप्रकाश सकलेचा शिवराज सरकार में मंत्री भी थे।

 

गोविंद नाराणय सिंह
गोविंद नाराणय सिंह मध्यप्रदेश के आठवें सीएम थे। वो 30 जुलाई 1969 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के सीएम रहे। हर्ष सिंह कांग्रेस नेता थे। उनके दो बेटे हैं दोनों ही सियासत में अपने पिता की विरासत को संभाला। लेकिन उन्होंने कांग्रेस की जगह भाजपा में अपनी सियासत की।

हर्ष सिंह- हर्ष सिंह शिवराज सरकार में मंत्री रहे और रामपुर बघेलान से विधायक निर्वाचित होते थे।
ध्रुवनारायण सिंह- ध्रुवनारायण सिंह भाजपा के विधायक रहे।

 

 

कैलाश जोशी
कैलाश जोशी मध्यप्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता हैं। वो भोपाल संसदीय सीट से सांसद बी रहे। कैलाश चंद्र जोशी 26 जून 1977 से 17 जनवरी 1978 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनके बेटे दीपक जोशी राजनीति में हैं।
बेटा- दीपक जोशी देवास की हाटपिपलिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हैं। शिवराज सरकार में वो मंत्री थे। 2018 का विधानसभा चुनाव वो हार गए हैं।

 

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कमलनाथ
कमलनाथ मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता हैं। दिसंबर 2018 में वो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। इससे पहले कमलनाथ 9 बार लोकसभा सांसद रहे और केन्द्र में कई बार मंत्री भी रहे। उनके बेटे नकुल नाथ अपनी उनकी राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं।
बेटा- नकुलनाथ पहली बार छिंदवाड़ा संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें उनके पिता की परंपरागत सीट छिंदवाड़ा से उम्मीदवार बनाया है।

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