लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस-भाजपा भिडंत के बीच जाने मायावती की धमकी के मायने, MP में कांग्रेस के क्या हो सकते हैं हाल...

लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस-भाजपा भिडंत के बीच जाने मायावती की धमकी के मायने, MP में कांग्रेस के क्या हो सकते हैं हाल...

Deepesh Tiwari | Publish: May, 05 2019 06:46:03 PM (IST) | Updated: May, 05 2019 06:47:21 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

मप्र की कांग्रेस सरकार में भी गिरने का डर...

भोपाल। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनावों की शुरुआत हो चुकी है। कांग्रेस बीजेपी में जबरदस्त कांटे की टक्कर भी नज़र आ रही है। एक ओर जहां कुछ चर्चाओं में कहा जा रहा है कि इस बीच कांग्रेस की रणनीति बीजेपी के मुकाबले ज्यादा कामयाब होती दिख रही है।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी कई तरह की समस्याओं का सामना करती देखी जा रही है, जिसके कारण वह भी अपने जीत के दावों से दूर ही दिख रही है।


कांग्रेस भी फंसी इस मझधार में...
जानकारों का मत है कि ऐसा भी नहीं है कि कांग्रेस बिना किसी अड़चन के लगातार आगे बढ़ती जा रही है। इस संबंध में राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि कांग्रेस के लिए इस समय प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या बसपा की ओर से खड़ी हो रही है।

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ये खड़ी हुई परेशानी...
जहां एक ओर कांग्रेस कई बड़े नेताओं को अपनी ओर मिलाने में सफल रहे हैं। वहीं बसपा की चेतावनी उनके लिए परेशानी इस रूप में भी खड़ी कर सकती है कि लोकसभा जीत का काम करें या राज्य की अपनी सरकार को बचाएं जो दूसरों की मदद से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कुल मिलाकर मप्र की कांग्रेस सरकार में भी गिरने का डर पैदा हो गया है।

इसलिए नाराज हुई मायावती...
दरअसल पिछले दिनों कांग्रेस की ओर से बसपा प्रत्याशी को कांग्रेस में शामिल करा लिया गया। इससे नाराज बसपा अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस को चेतावती देते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस ने अपने रवैये में सुधार नहीं किया तो बसपा मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार को समर्थन जारी रखने पर भी पुनर्विचार करेगी।

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इस दौरान मायावती ने ट्वीट करके कहा- कांग्रेस सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने में भाजपा से कम नहीं है। मध्यप्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी को कांग्रेस ने डरा-धमकाकर जबरदस्ती बैठा दिया है। किन्तु बसपा अपने सिंबल पर ही लड़कर इसका जवाब देगी और अब कांग्रेस सरकार को समर्थन जारी रखने पर भी पुनर्विचार करेगी।

ये है मामला...
दरअसल, गुना-शिवपुरी से बसपा प्रत्याशी धाकड़ लोकेंद्र सिंह राजपूत पिछले दिनों शिवपुरी में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष कांग्रेस में शामिल हो गए।

नामांकन दाखिल करने के बाद बाद लोकेंद्र सिंह तीनों जिलों में जनसंपर्क कर रहे थे। ऐसे में अचानक से बसपा प्रत्याशी के कांग्रेस में आने के बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

इस पर मायावती ने कहा था कि यूपी में कांग्रेसी नेताओं का यह प्रचार कि भाजपा भले ही जीत जाए किन्तु बसपा-सपा गठबंधन को नहीं जीतना चाहिए, यह कांग्रेस पार्टी के जातिवादी, संकीर्ण और दोगले चरित्र को दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार कुल मिलाकर बसपा की इस चेतावनी ने कांग्रेस को भारी परेशानी में डाल दिया है और अब वह फूंक फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है।

 

ऐसे समझें स्थिति...
जानकारों के अनुसार यदि संगठन की बात करें तो भाजपा कांग्रेस से कमज़ोर साबित होती महसूस की जा रही है।

दरअसल एक ओर जहां चुनावों के बीच कांग्रेस की टीम में बीजेपी के दिग्गज भी शामिल होते चले गए, वहीं भाजपा अपने रुठे हुए नेताओं को तक समय रहते नहीं मना सकी। लिहाज़ा बालाघाट, शहडोल और जबलपुर में बीजेपी को बागियों द्वारा पहुंचाए गए बड़े नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

ये भी खास...
वहीं इससे पहले मप्र के पथरिया की विधायक राम बाई (Ram Bai) दमोह में कह भी चुकीं हैं कि 'मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहनजी (बसपा प्रमुख मायावती) के समर्थन की वजह से बनी है. हम कमलनाथ सरकार में 2 बसपा विधायकों के लिए मंत्री पद की मांग करते हैं।

मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के पास जरूरत के लायक खुद के विधायक नहीं हैं लेकिन कांग्रेस को बसपा 2, सपा के 1 और 4 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटों में से 114 कांग्रेस की जीत हुई है, 109 पर भाजपा के उम्मीदवार जीते हैं, 4 पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई है, 2 पर बसपा और 1 पर समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार जीता है।

मध्य प्रदेश में जिन 7 विधायकों के समर्थन से कांग्रेस की सरकार बनी है वह इस तरह से हैं, भगवानपुरा से निर्दलीय विधायक केदार चिदाभाई दावर, बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह नवल, सुसनेर से निर्दलीय विधायक विक्रम सिंह राणा, वारासिवनी से निर्दलीय विधायक प्रदीप अमृतलाल जायसवाल, भिंड से बसपा विधायक संजीव सिंह, पथरिया से बसपा विधायक रामबाई गोविंद सिंह और बीजापुर से समाजवादी पार्टी विधायक राजेश कुमार।

कांग्रेस ने ऐसे मार रही बाजी...
-गुना-शिवपुरी से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बसपा के प्रत्याशी चुनावों के पहले ही लोकेंद सिंह राजपूत कांग्रेस में ही शामिल करा लिया।

-बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात के बाद अरुण यादव के खिलाफ अपनी पत्नी का नामांकन वापस लेने का ऐलान कर दिया है।


-शिवराज सरकार में मंत्री रहे केएल अग्रवाल को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनावों के दौरान कांग्रेस में शामिल कराकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया है।

-पहले चरण की जिन 6 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई है। माना जा रहा है कि वहां बीजेपी को अपनों ने ही नुक्सान पहुंचाया है। ये वे ही रुठे नेता हैं जिन्हें बीजेपी वक्त रहते मना नहीं सकी।

- शहडोल संसदीय क्षेत्र की तो बीजेपी से मौजूदा सांसद ज्ञान सिंह टिकट न मिलसे की नाराजगी के चलते पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के प्रचार के लिए भी घर से नहीं निकले|

- बालाघाट से बीजेपी के मौजूदा सांसद बोधसिंह भगत टिकट कटने की वजह से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

- युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जबलपुर में कार्यकर्ताओं के तगड़े नेटवर्क वाले धीरज पटैरिया को भी पार्टी नहीं मना सकी। लिहाज़ा पटैरिया ने वोटिंग के पहले कांग्रेस का दामन थाम कर बीजेपी को नुकसान पहुंचाया।

हालांकि चुनावों के दौरान नेताओं का दल बदलने का फॉर्मूला पुराना है, लेकिन इस फॉर्मूले के जरिए ही कांग्रेस ने साल 2018 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि इस फॉर्मूले के जरिए वह लोकसभा मे बेहतर प्रदर्शन करेगी।

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