मध्यप्रदेश में भी 'निर्भय'नहीं हैं बिटिया, तीन दिनों में घटी कई दिल दहला देने वाली वारदात

मध्यप्रदेश में भी सुरक्षित नहीं हैं बेटियां

By: Muneshwar Kumar

Updated: 03 Dec 2019, 07:37 PM IST

भोपाल/ निर्भया से दिशा तक केवल नाम बदले लेकिन पूरे देश में बलात्कार की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ नहीं बदला। इसी का नतीजा है कि बीते दो दिन में मध्यप्रदेश में बलात्कार की कई खौफनाक वारदातें हो चुकी है। अब पूरा देश कह रहा है कि बलात्कारी को फांसी दो।

16 दिसंबर 2012...वो तारीख..जब दिल्ली की चलती बस में एक युवती के साथ हैवानियत की वो घिनौनी वारदात हुई जिसे सुनकर शैतान भी पनाह मांगता। जी हां, ये वही निर्भया कांड था, जिसने पूरे देश में उबाल ला दिया था। कई दिनों तक संसद ठप रही। देशभर में कैंडल मार्च निकाले गए। पीड़ितों को फांसी की मांग होती रही। निर्भया फंड बनाया गया। बेटियों की सुरक्षा की जाने लगी और ऐसा लगने लगा था कि शायद इस देश में बलात्कार की ये आखिरी घटना होगी।

उस समय पूरा देश जाग चुका था लेकिन समय गुजरा और कुछ नहीं बदला। फिर जिंदगी ढर्रे पर लौट गई। फिर हर शहर हर गली में रेप की वारदातें होने लगी। निर्भया के एक गुनहगार को तो दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सिलाई मशीन भी दी क्योंकि वो दरिंदा नाबालिग होने की वजह से बच गया था। खैर तब से लेकर अब तक 2 लाख से ज्यादा बलात्कार की वारदातें हो चुकी हैं। जी हां दो लाख इसके बाद जब भी इस तरह की घटनाएं हुईं। उन पर मुलायम सिंह से लेकर कई नेताओं ने अपनी घटिया राय व्यक्त कीं। बलात्कारियों का भी धर्म और मजहब देखकर विरोध किया जाने लगा।

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हमारे देश में कथित बुद्धिजीवी लोग भी ऐसे बलात्कारियों में फर्क करने लगे। ये सिलसिला चलता रहा और फिर जिस्म के भूखे भेड़ियों ने हैदराबाद में फिर एक सरकारी डॉक्टर को अकेला पाकर कुकर्मों की नई गाथा लिखी। उन हैवानों ने उसे जिंदा जला दिया। इस वारदात ने देश को फिर झकझोर दिया और फिर पूरा देश एक होकर ऐसे बलात्कारियों के लिए फांसी से भी सख्त सजा की मांग कर रहा है। जी हां भले ही फांसी में दोषी को मौत मिल जाती है। लेकिन अवाम किसी हैवान को ऐसी आसान मौत नहीं देना चाहती। किसी की मांग है कि उन्हें भी जिंदा जलाया जाए। कोई कह रहा है कि उन्हें नपुंसक बनाकर भीड़ के हवाले कर दिया जाए। हैरान नहीं हों क्योंकि ऐसी मांग संसद में भी उठी है।

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अभी हैदराबाद की घटना को चंद घंटे भी नहीं गुजरे थे कि मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में जेल से छूटकर आए दरिंदे ने एक नाबालिग के साथ वो खूनी खेल खेला कि अच्छे-अच्छे कातिल भी सहम जाए। 24 साल के इस सनकी कातिल ने पहले तो एक नाबालिग के साथ इकतरफा इश्क किया। उसके साथ अश्लील हरकत की। पुलिस में शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया लेकिन जब वो छूटकर बाहर निकला तो उसने ऑनलाइन मंगाए चाइना चाकू से उस नाबालिग पर 80 वार किया। इतने वहशी तो जानवर भी नहीं होते। लेकिन इंसान उनसे भी बद्तर हो चुका है। उस मासूम की आंतड़ियां तक बाहर निकाल ली गई । बाहर लोग दरवाजा पीटते रहे लेकिन इस खूनी को किसी का खौफ नहीं था।

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उधर महू में भी हैवानों ने पांच साल की मासूम को नहीं बख्शा। माता-पिता के साथ सड़क किनारे सो रही 5 साल की बच्ची को दरिंदा उठा ले गया और दुष्कर्म किया। फिर गला दबाकर मार डाला। बच्ची के शव पर चोट के कई निशान थे।जिससे पता चला कि हत्या से पहले उससे हैवानियत की गई। यहां से पहले श्योपुर में एक नाबालिग की हत्या कर दी गई। इससे पहले मुरैना में भी एक सनकी आशिक ने सरेआम लड़की की हत्या कर दी।

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इन घटनाओं को देख सुनकर नहीं लगता कि ये वही देश है जहां नारियों की पूजा की जाती है। ये वही देश है जहां देवी की आराधना होती है। पुलिस प्रशासन सरकार और समाज सभी ने अपने नाकारापन को सिद्ध कर दिया है। हर कोई एक दूसरे पर गलती डालने में लगा है। बिना ये सोचे समझे कि इन हैवानों से कोई नहीं बचा।

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बलात्कार को रोकने के लिए किसी सरकार के पास न कोई एक्शन प्लान है न कोई कुछ करता नजर आ रहा है। दूसरी बात कि बलात्कार के दोषियों के लिए फांसी का कानून पास होने के बाद भी उस पर अमल नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि इस तरह के मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। इन दानवों का इलाज अब केवल मृत्युदंड ही बचा है।

Muneshwar Kumar
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