अनूठी पहल: यहां थानों में लगती है बच्चों की क्लास, टीचर बन पढ़ाती है पुलिस

भोपाल आईजी योगेश चौधरी ने मिल बांचे अभियान के दौरान सरोजनी नायडू गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल की कक्षा छठवीं को गोद लिया था। 

भोपाल। आपने पुलिस के कारनामों के बारे में सुना होगा, लेकिन मध्यप्रदेश पुलिस बदल रही है। वह सुरक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभा रही है। मध्य प्रदेश के 500 अधिकारी-कर्मचारी अपनी ड्यूटी से एक घंटे का समय निकालकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। भोपाल के तीन थाने तो पाठशाला बन गए हैं। यहां प्रारंभिक शिक्षा के साथ बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया जाता है।




पढ़ाते हैं पसंदीदा विषय 
राजधानी सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में पुलिस, सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों को स्कूल में पढ़ाने का काम कर रही है। बालाघाट और मंडला में तैनात हर अधिकारी स्कूल में अपने-अपने पसंद का विषय पढ़ाने जाता है। यह व्यवस्था तत्कालीन आईजी डीसी सागर ने शुरू की थी। पुलिस ने स्कूलों में टेबिल-कुर्सी से लेकर बच्चों को किताब, बैग और ड्रेस भी बांटी थी। इन दोनों जिलों के करीब 70 अधिकारी-थाना प्रभारी अब भी स्कूलों में जाते हैं।




डीआईजी भी जाते हैं पढ़ाने
भोपाल डीआईजी रमन सिंह सिकरवार ने तीन थानों हनुमानगंज, गोविंदपुरा और निशातपुरा में बाल संजीवनी योजना शुरू की है। इसके तहत झुग्गी बस्ती और सड़क पर भीख मांगने वाले उन बच्चों को पुलिस वाले थाने लेकर आते हैं, जो स्कूल नहीं जाते। उन्हें पहले इन थानों में प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है। जब उनकी रूचि पढ़ाई में लगने लगती है तो उनका सरकारी स्कूल में दाखिला करा दिया जाता है। हनुमानगंज थाना प्रभारी जितेंद्र पाठक बताते हैं कि अब तक 25 बच्चों को स्कूल में दाखिल करा चुके हैं, गर्मियों के बाद फिर अभियान चलाया जाएगा। 


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ट्रेनिंग भी दे रहे हैं
महिला अपराध शाखा द्वारा प्रदेश के कालेजों में लड़कियों को सुरक्षा की ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। भोपाल में एडीजी महिला अपराध अरुणा मोहन राव खुद कालेज में जाती हैं। कालेजों में छात्राओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

12वीं तक की लड़कियों को पढ़ाते हैं
भोपाल आईजी योगेश चौधरी ने मिल बांचे अभियान के दौरान सरोजनी नायडू गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल की कक्षा छठवीं को गोद लिया था। वे हर माह दो बार यहां पढ़ाने जाते हैं। वह 12वीं तक इस क्लास की लड़कियों को पढ़ाएंगे। आईजी पीएचक्यू डीसी सागर ने गांधी नगर के एक स्कूल को गोद लिया है।




कभी भी पहुंच जाते हैं पढ़ाने
भोपाल में आधा दर्जन महिला एवं पुरुष पुलिस अधिकारी बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार इस तरह  पूरे प्रदेश में इस तरह पांच सौ पुलिस अधिकारी ड्यूटी से समय निकालकर किसी न किसी सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जा रहे हैं। यह किसी के दबाव में नहीं बल्कि उन्होंने खुद तय किया है। यह अधिकारी इस दौरान पढ़ाई के साथ-साथ लड़कियों को सुरक्षा के टिप्स भी देंगे।
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Brajendra Sarvariya
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