ठगी मामले में कोर्ट ऑफ एडजीक्यूटिंग ऑफिसर का IT ACT में देश का पहला फैसला

ठगी मामले में कोर्ट ऑफ एडजीक्यूटिंग ऑफिसर का IT ACT में देश का पहला फैसला

KRISHNAKANT SHUKLA | Updated: 22 May 2019, 01:17:29 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

अब बैंक और मोबाइल कंपनी की संपत्ति बेचकर होगी रकम की वसूली

प्रवीण मालवीय, भोपाल. बैंक और मोबाइल कंपनी की लापरवाही से हुई एक करोड़ की ठगी की भरपाई अब उनकी संपत्ति जब्त करके की जाएगी। साइबर लॉ की कोर्ट, कोर्ट ऑफ एडजीक्यूटिंग ऑफिसर ने देश में अपनी तरह के पहला फैलसा देकर मिसाल कायम कर दी है।

आईटी कोर्ट की ओर से पीडि़त को एक करोड़ 32 लाख चुकाने के आदेश के बावजूद बैंक और टेलीकॉम कंपनी ने न तो पीडि़त को हर्जाना दिया था न ही अपील ही की। इसके बाद कोर्ट ने रिकवरी के साथ भुगतान न करने पर आरोपी पक्षों के डिजीटल सिग्नेचर तक निलम्बित करने के आदेश दिए हैं।

ट्रांसफर कर लिए थे एक करोड़ 91 लाख

इंदौर के महाकाली फूड्स के मालिक पंकज कुमार शाह के एकाउंट से साइबर ठगों ने जुलाई 2016 में एक करोड़ 91 लाख अवैध तरीके से ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए थे। ठगों ने अवैध तरीके से वोडाफोन की डुप्लीकेट सिम इश्यू कराकर ओटीपी को हासिल कर लिया और बैंक ऑफ इंडिया के खातों से ऑनलाइन बैंकिंग से यह बड़ी राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दी। साइबर पुलिस की सक्रियता से तब 87 लाख वापस आए थे। फिर पंकज शाह को एक करोड़ से अधिक का नुकसान हो गया।

दिसंबर में दिया आदेश, पालन नहीं

पीडि़त ने सायबर लॉ एक्सपर्ट यशदीप चतुर्वेदी के माध्यम से कोर्ट ऑफ एडजीक्यूटिंग ऑफिसर में केस लगाया। तात्कालीन जज प्रमोद अग्रवाल ने 13 नवंबर 2018 को बैंक, मोबाइल कंपनी और शाखा प्रबंधक को हर्जाना देने के निर्देश दिए। 45 दिन बीत जाने पर भी पालना नहीं होने पर वर्तमान जज मनीष रस्तोगी ने 14 मई को आईटी एक्ट के तहत देश का पहला फैसला दिया जिसमें एक करोड़ 32 लाख रिकवरी करने के आदेश दिए।

आईटी एक्ट के तहत यह अपने आप में देश का पहला मामला है जिसमें न केवल जुर्माना देने के आदेश हुए बल्कि रिकवरी के आदेश भी जारी कर दिए। इससे पीडि़त पक्ष को जल्द राहत मिलने की संभावना बेहद बढ़ गई है।
यशदीप चतुर्वेदी, सायबर लॉ एक्सपर्ट एवं पीडि़त के एडवोकेट


इस तरह के मामलों में आदेशों की पालना नहीं होने की बात अक्सर देखने में आती है, इस तरह के निर्णय से ऑनलाइन ठगी के पीडि़तों को फायदा मिलेगा। आईटी एक्ट की धारा 64 में प्रावधान है कि यदि कम्पनी जुर्माना राशि नहीं देती, डिजीटल सिग्नेचर सस्पेंड किए जा सकते हैं। इसका उल्लेख कर कोर्ट ने कड़ाई से पालना के रास्ते खोल दिए हैं। ’
डॉ. अतुल कुमार पांडे, चेयरपर्सन राजीव गांधी नेशनल साइबर लॉ सेंटर, एलएनआईयू

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