पुरुषों के मुकाबले थायराइड की समस्या से ज्यादा ग्रस्त रहती हैं महिलाएं, जानिए लक्षण और उपचार के तरीके

पुरुषों के मुकाबले थायराइड की समस्या से ज्यादा ग्रस्त रहती हैं महिलाएं, जानिए लक्षण और उपचार के तरीके

Faiz Mubarak | Updated: 14 Jul 2019, 05:47:46 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

राजधानी भोपाल में थायराइड की समस्या से कई महिलाएं ग्रस्त हैं। बता दें कि, थायराइड मुख्य रूप से क्लोरीन युक्त पानी पीने से होता है, जिसकी अधिक मात्रा भोपाल के ज़मीनी पानी में मौजूद है।

भोपालः आज के समय में थायराइड ( Thyroid Disease ) लोगों में एक आम सी स्वास्थ्य समस्या बवती जा रही है। थायराइड होने पर वजन बढ़ने या घटने के साथ साथ शरीर की कोशिकाओं ( thyroid Hormones ) में असंतुलन हो जाता है। हालही में हुई एक स्टडी में सामने आया कि, ये समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं ( Thyroid problems in Women ) को थायराइड की समस्या ज्यादा होती है। राजधानी भोपाल में इस समस्या से कई महिलाएं ग्रस्त हैं। बता दें कि, थायराइड मुख्य रूप से क्लोरीन युक्त पानी पीने से होता है, जिसकी अधिक मात्रा भोपाल के ज़मीनी पानी में मौजूद है। ENT स्पेश्लिस्ट डॉ. हितेष वर्मा ने बताया कि, किस तरह इस समस्या से बचा जा सकता है और कैसे घरेलू चीजों का परहेज़ करके इसका उपचार ( thyroid precautions ) किया जा सकता है।

 

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चौकाने के लिए पर्याप्त हैं ये आंकड़े


ऐसा नहीं है कि, थायराइड सिर्फ भोपाल वासियों के लिए ही बड़ी समस्या बना हुआ है, बल्कि WTO की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में लगभग 20 करोड़ लोग थायराइड डिसऑर्डर से ग्रस्त हैं। एसआरएल डाएग्नोस्टिक्स की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, कुल आबादी की बात करें तो 20 फीसदी महिलाओं को थायराइड एंटीबॉडीज के लिए पॉजिटिव ( thyroid symptoms ) पाया गया, जबकि पुरूषों में यह संख्या 15 फीसदी थी। वास्तव में 31 से 45 आयुवर्ग की 18 फीसदी आबादी थायराइड एंटीबॉडीज के लिए पॉजिटिव पाई गईं। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के इस समस्या से ग्रस्त होने का कारण महिलाओं में ऑटोम्यून्यून की समस्या ज्यादा होना है।

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क्या है थायराइड ?

चिकित्सकों का मानना है कि, थायराइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि हमारे गले में आगे की तरफ पाई जाने वाली एक ग्रंथि को थायराइड कहा जाता है। यह तितली के आकार की होती है। यही ग्रंथि शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करने का कार्य करती है। मुख्य रूप से इसका काम भोजन को ऊर्जा में बदलने का होता है। थायराइड ग्रंथि टी-3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन और टी-4 यानी थायराक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है। इन हार्मोंस का सीधा असर हमारी सांस, दिल की धड़कन, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर पड़ता है। साथ ही ये हड्डियों, मांसपेशियों और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखने का प्रभार संभालती है। थायराइड बढ़ने पर जब ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, इसे ही थायराइड की समस्या ( treatment of thyroid patients ) कहा जाता है।

 

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छह प्रकार का होता है थायराइड


-हाइपो थायराइड

जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम मात्रा में हार्मोंस का निर्माण करने लगती है तो उसे हाइपो थायराइड कहा जाता है।


-हाइपर थायराइड

जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोंस का निर्माण करने लगती है तो उसे मेडिकल भाषा में हाइपर थायराइड कहा जाता है।


-थायराइडिटिस

जब थायराइड ग्रंथि में सूजन आती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली एंटीबॉडी का निर्माण करती है, जिससे थायराइड ग्रंथि प्रभावित होती है। उसे थायराइडिटिस के नाम से जाना जाता है।


-गॉइटर

भोजन में आयोडीन की कमी होने पर ऐसा होता है, जिससे गले में सूजन और गांठ जैसी नज़र आने लगती है। आमतौर पर इसका शिकार महिलाएं होती हैं।


-थायराइड नोड्यूल

इसमें थायराइड ग्रंथि के एक हिस्से में सूजन आने लगती है। यह सूजन कठोर या फिर किसी तरल पदार्थ से भरी हुई हो सकती है।


-थायराइड कैंसर

जब थायराइड ग्रंथि में मौजूद टिशू में कैंसर के सेल बनने लगते हैं, तो उसे थायराइड कैंसर कहा जाता है। वैसे तो थायराइड के अन्य लक्षणों को नियमित उपचार करके कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति में थायराइड कैंसर के लक्षण नज़र आने लगे हैं तो, उसे उपचार को लेकर सतर्क होने की ज़रूरत है।

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थायराइड होने पर पीड़ा

ऊपर हमने आपको बताया कि, थायराइड कितने प्रकार के होते हैं। अब हम आपको बता रहे हैं थायराइड होने पर पीड़ित को किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर ऐसी ही कोई समस्या आपके या आपके किसी परिचित के साथ हो, तो तुरंत उसके उपचार के लिए सतर्क हो जाए। अगर शरीर में निम्न प्रकार के लक्षण नजर आते हैं, तो ये थायराइड की ओर संकेत हो सकते हैं।


-कब्ज
-थकावट
-तनाव
-रूखी त्वचा
-वजन बढ़ना
-पसीना आना कम होना
-ह्रदय गति का कम होना
-उच्च रक्तचाप
-जोड़ों में सूजन या दर्द
-पतले और रूखे-बेजान बाल
-याददाश्त कमजोर होना
-मासिक धर्म का असामान्य होना
-प्रजनन क्षमता में असंतुलन
-मांसपेशियों में दर्द
-चेहरे पर सूजन
-समय से पहले बालों का सफेद होना

 

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थायराइड होने के मुख्य कारण


-एंटीबायोटिक लेने से आंतों में यीस्ट (एक प्रकार की फंगस) बनने लगता है। यीस्ट टॉक्सीन थायराइड ग्रंथि को बाधित करता है, जिससे इस ग्रंथि में समस्या उत्पन्न ( thyroid treatment ) होने लगती है।

-पीने के पानी में क्लोरीन होने से थायराइड ग्रंथि बाधित हो जाती है।

-फ्लोराइड युक्त पेस्ट और पानी के कारण भी थायराइड ग्रंथि को काम करने में दिक्कत होती है।

-हाशिमोटो थायराइड जैसे ऑटोइम्यून विकार सीधा थायराइड ग्रंथि पर हमला करके उसे नुकसान पहुंचाते हैं।

-खासतौर पर भले ही थोड़े समय के लिए ये उन महिलाओं को हो सकता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो और इस दौरान वो गर्भावस्था के समय से गुज़र रही हों।

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