हिरण-सांभर से ज्यादा मवेशी पसंद कर रहे बाघ

- नौ साल में पांच गुना बढ़ा गाय-भैंस का शिकार
- आसान शिकार पर आश्रित हो रहे हैं बाघ
- यह है स्थिति
526 बाघ हैं प्रदेश में
10 किलो मांस रोज एक बाघ की खुराक
1100 मवेशियों का शिकार हुआ 2010 में
5000 मवेशियों का शिकार हो रहा अब

By: anil chaudhary

Published: 17 Sep 2020, 05:21 AM IST

अशोक गौतम, भोपाल. प्रदेश के बाघों को हिरण-सांभर से ज्यादा मवेशी पसंद आ रहे हैं। मवेशियों के शिकार में उन्हें कम मेहनत में ज्यादा मांस मिलता है। यही कारण है पिछले नौ साल में मवेशियों के शिकार के मामले पांच गुना बढ़े हैं। यह मामले वर्ष 2010 में 1100 के करीब थे, जो अब पांच हजार से अधिक हो गए हैं। मवेशियों के शिकार की सबसे ज्यादा घटनाएं टाइगर रिजर्व के बफर जोन के किनारे वाले इलाकों और सामान्य वन मंडलों में हुई हैं। इसको लेकर किसान ज्यादा विरोध नहीं करते हैं, क्योंकि उन्हें लोक सेवा गारंटी योजना के तहत तत्काल मुआवजा मिल जाता है।
सामान्य तौर पर बाघ को एक दिन में 10 किलो मांस की जरूरत होती है। यानी की प्रदेश में 526 बाघों के लिए प्रतिदिन 5260 किलो मांस की जरूरत होती है। उन्हें मवेशी में हिरण, बारहसिंघा और सांभर से ज्यादा मांस मिलता है। इसके अलावा शिकार करने में मवेशियों से कई गुना ज्यादा मेहनत सांभर, हिरण और चीतल में करना पड़ता है। इसके चलते बाघ मवेशियों का शिकार ज्यादा कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कोर एरिया के बाघों से बफर और सामान्य वन मंडलों के बाघ ज्यादा हेल्दी होते हैं। जब उनके लिए प्रिवेश की स्थिति बेहतर रहती है तो उनमें प्रजनन और वंशवृद्धि की क्षमता भी बढ़ती है। इसी का नतीजा रहा है कि प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला है। यही कारण है कि अब धीरे-धीरे प्रदेश के टाइगर रिजर्व और सामान्य वनमंडलों में बाघों की संख्या 50-50 हो रही है।

- प्रिवेश तैयार करने की जरूरत
वन विभाग को वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट के लिए प्रिवेश तैयार करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, जिससे सामान्य वनमंडलों में भी बाघों को पर्याप्त चीतल, हिरण, बारह सिंघा अथवा सांभर सहित अन्य शाकाहारी वन्यजीव मिल सके। इनके लिए घास के मैदान और पानी की पर्याप्त व्यवस्था करना पड़ेगा। पन्ना, संजय गांधी में घास के मैदान कम हैं, जिससे वहां मवेशियों की संख्या कम है। इसके चलते बाघ नहीं बढ़ पा रहे हैं। सामान्य वन मंडलों में तो घास के मैदान की और ज्यादा समस्या है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मवेशियों का दखल ज्यादा होता है।
- पार्क के बाहर शाकाहारी जीव कम
पार्क के बाहर तथा सामान्य वन मंडलों में चीतल, हिरण, सांभर सहित शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या कम है। कुत्तों का दबाव ज्यादा है, कुत्ते उनका शिकार करते हैं। इसके अलावा सामान्य वन मंडल में शिकारी भी हावी है। किसान और स्थानीय लोग भी इनके दुश्मन होते हैं, क्योंकि ये पूरी फसल नष्ट कर देते हैं।

कुछ सालों में मवेशियों के शिकार की संख्या बढ़ी है, इसलिए सरकार ने किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान किया है। मवेशी वनों में जाएंगे तो बाघ उन पर स्वाभाविक रूप से हमला करेगा। बाघों के लिए मवेशियों का शिकार करना वन्यजीवों से आसान होता है।
- आलोक कुमार, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, मप्र

Kamal Nath
anil chaudhary Desk
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