बाघ टी-121 और बाघिन 124 घूम रहे साथ

केरवा में बढ़ेगा बाघों का कुनबा

By: Pushpam Kumar

Published: 20 Jul 2018, 07:28 AM IST

भोपाल. केरवा इलाके में आगामी कुछ महीनों में बाघों का कुनबा में और बढ़ोतरी हो सकती है। इलाके में आई नई मादा बाघिन और नर बाघ को एक दूसरे का साथ खूब रास आ रहा है। दोनों के बीच मेटिंग की अनुकूल परिस्थितियां बनने से वन अधिकारी भी उत्साहित हैं और तीनों बाघों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।

यदि बाघिन को गर्भधारण की परिस्थितियां इसी तरह अनुकूल रहीं तो केरवा के जंगल में दूसरी बार बाघों के कुनबे में नए मेहमान आ सकते हैं। केरवा इलाके में बाघिन टी-123 अपने दो शावको के साथ लम्बे समय से रह रही है। पिछले एक पखवाड़े में बाघिन टी-124 भी यहां आ गई है।

बाघिन के पीछे-पीछे गोल बीट में विचरण करने वाला बाघ टी- 121 भी आ गया है। बाघ से खतरा होने के डर से बाघिन टी123 ने शावकों सहित दोनों से दूरी बना ली है। नर बाघ और नई मादा बाघिन अक्सर 13 शटर के पास के इलाके में नजर आ रहे हैं।

बाघ ने किया शिकार, बाघिन साथ : बुधवार को बाघ ने 13 शटर के पास नीलगाय का शिकर भी किया। बाघिन 121 भी वर्षाकाल इनका मुख्य मेटिंग सीजन ही है, इस पर जिस तरह से बाघ-बाघिन साथ देखे जा रहे उससे इनकी मेटिंग और नए शावकों के जन्म की संभावनाएं बन रही हैं।

बाघों के लिए अनुकूल है केरवा : वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार केरवा क्षेत्र के वनों की स्थिति बाघों के लिए बेहद मुफीद है, दशकों से यहां बाघों का डेरा रहा है। पेयजल से लेकर शिकार की सुगमता और रहने के लिए गुफा जैसे प्राकृतिक आवास तक एक साथ होने के कारण अब भी बाघ यहां लगातार आ रहे हैं।

बाघ प्रजाति की मादाएं अनुकूल वातावरण और शिकार, पेयजल सुगम होने पर ही गर्भधारण करती है। बाघिन गर्भवती होती है तो वह ज्यादा दूर नहीं जाकर केरवा इलाके को ही ठिकाना बनाएगी जिससे तीन से चार महीने में नए शावक जन्म ले सकते हैं।

टी-21 के बच्चे हैं तीनों : बाघिन टी- 21 ने नर टी-121 और मादा- 123 और 124 को जन्म दिया था। दोनो बाघिन और नर बाघ एक ही मां की संतान है। और तीनों के बीच आपसी समझ भी काफी बेहतर है इसलिए बेहद छोटे इलाके में साथ घूमने और आमना-सामना होने के बावजूद संघर्ष की नौबत नहीं आई है।

 

केरवा नर बाघ टी-121 का पुराना इलाका है, यह यहां कभी भी आ जाता है। बाघिन टी-124 भी यहां अक्सर आती रहती है। मादा टी-124 और नर टी-121 बरसात में अक्सर साथ देखे गए हैं। मेटिंग सीजन है, हमें उम्मीद है कि बाघों का कुनबा बढ़ेगा।

एसपी तिवारी, डीएफओ, वन मंडल

 

Pushpam Kumar Desk
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