कलियासाेत डैम : पहली बार बाघ-बाघिन का जाेड़ा दिखा, अब ऐसे रखेंगे इन पर नजर

वन विभाग ने अलर्ट जारी किया...

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी के आसपास बाघों का मूवमेंट कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ समय से इन बाघों शहर के अंदर का रुख करना शुरू कर दिया है। इसी के चलते जनवरी के अंतिम दिनों में एक बाघ भोज विश्वविद्यालय परिसर ( bhoj university campus ) में रात को देखा जा चुका है, यहां एक बाघ के पगमार्क कुलपति के बंगले के बाहर मिले।

लोगों में बाघ को लेकर दहशत अभी कम भी नहीं हुई थी कि कलियासोत डैम के पास पिछले दिनों सुबह के वक्त पहली बार यहां बाघ और बाघिन एक साथ देखे गए।

जिसके संबंध में वन विभाग की टीम ने मुआयना कर बताया कि यह बाघ व्यस्क नहीं है। लेकिन खास बात ये है कि इससे पहले इस बाघ का मूवमेंट भोपाल के आसपास नहीं देखा गया था।

जानकारों के अनुसार यूं तो मिंडोरा व कलियासोत डैम के आसपास बाघों का मूवमेंट बना ही रहता है। कई बार यहां लोगों को बाघ या बाघिन दिखाई दे जाते हैं। लेकिन कुछ दिनों पहले ही पहली बार यहां सुबह के समय बाघ और बाघिन एक साथ देखे गए।

kaliyashot dam bhopal

इस दौरान बाघ टी-3 और बाघिन टी-123 एकसाथ दिखा दिए। वन विभाग के अधिकारियाें का कहना है कि बाघिन टी-123 दूसरी बार अपना जाेड़ा बना रही है।

इसके पहले इसने दाे शावकाें काे जन्म दिया था। शावकाें की उम्र 18 माह से अधिक हाेने के बाद मां ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए छाेड़ दिया है। अब वह नए सिरे से कुनबा बढ़ाने की तैयारी में है। इनके मूवमेंट काे देखते हुए वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

कैमरों से नजर...
बाघों पर नजर रखने के लिए केरवा, कठौतिया सहित अन्य भोपाल के आस-पास के जंगलों में सात थर्मल कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों के माध्यम से बाघों की हरकतों पर निरंतर नजर रखी जा रही है।

क्योंकि यह क्षेत्र बाघों और लोगों की सुरक्षा की दृष्ठि से काफी महत्वपूर्ण था। बेहतर परिणाम आने के कारण वन विभाग कान्हा, बांधवगढ़ और रातापानी अभ्यारण में कैमरे लगाने का निर्णय वन विभाग ने लिया है।

कुलपति के बंगले तक पहुंच चुका है बाघ...
वहीं जनवरी 2020 के आखिरी दिनों में भोज विश्वविद्यालय परिसर में रात को बाघ के मूवमेंट के बाद कुलपति के बंगले के बाहर इसके पगमार्क मिले थे। बताया जा रहा है कि यह बाघ इस क्षेत्र में नया है। इससे पहले कलियासोत डैम और केरवा डैम के बीच स्थित जंगल में तीन बाघ होने के संकेत कई बार मिले हैं।

दरअसल भोज विश्वविद्यालय परिसर चूना भट्टी के पास स्थित कोलार रोड पर है। जिसके पीछे कलियासोत डैम लगा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि संभवतः यह बाघ केरवा के जंगलों से होते हुए यहां तक आ गया होगा।

नया प्लान: अब कैमरों से बाघों और घडिय़ालों की सुरक्षा...
वन विभाग बाघ और घडिय़ालों की सुरक्षा और उन पर निगरानी अब कैमरे से करेगा। पायलेट प्रोजेक्ट में पन्ना नेशनल पार्क और सोन घडिय़ाल अभयारण क्षेत्र में कैमरे लगाने की तैयारी है।

इसके लिए पार्क में 70 मीटर ऊंचाई तक के टॉवर बनाए जाएंगे, जिससे पार्क की हर गतिविधि को कवर किया जा सके। इन कैमरों का कवरेज एरिया पांच वर्ग मीटर से ज्यादा होगी।

दरअसल, सोन में हो रहे रेत के अवैध उत्खनन से घडि़याल संकट में आ गए हैं। कैमरे लगने से अवैध उत्खनन पर अंकुश लग सकेगा। इस प्रोजेक्ट के बेहतर परिणाम आने के बाद कान्हा, बांधवगढ़ नेशनल पार्क और रातापानी अभ्यारण्य में अब बाघों की सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों से पार्क में होने वाली हर गतिविधियों की जानकारी क्षेत्रीय निदेशक और डीएफओ को मिलती रहेगी।

नेशनल पार्कों के कवरेज एरिया के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कैमरों की लोकेशन तय की जाएगी। इनमें नाइट विजन भी रहेगा, जिससे रात की भी तस्वीर भी ले सके। बताया जाता है कि रातापानी अभ्यारण्य में कुछ स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे बाघों की आवाजाही को रिकार्ड किया जाता है।

गश्ती दल को मिलेगी पल-पल की जानकारी
थर्मल कैमरे के माध्यम से नेशलन पार्क की सुरक्षा कर रहे गश्ती दल को कैमरे में रिकार्ड फोटोग्राफ और एसएमएस भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

वहीं इन कैमरों के माध्यम से यह देखा जाएगा कि कौन से डिप्टी रेंजर, वन रक्षक और वन पाल किस क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं, इनका वास्तविक लोकेशन कैमरे से मिल सकेगा। अगर इन लोगों ने अवैध कटाई करने वालों से किसी तरह से लेनदेन कर उसे छोड़ देते तो इसकी भी जानकारी इस कैमरे में कैद हो जाएगी। अवैध उत्खनन कर ट्रेक्टर ट्रालियों की इमेज मैय नम्बर के इस कैमरे के माध्यम से वन विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।

सर्वे का कार्य पूर्ण servey complited ...
बताया जाता है कि इसके लिए सर्वे का कार्य पूर्ण हो गया है, यहां सात कैमरे लगाए जाएंगे। इसका एक कंट्रोल कमांड सेंटर क्षेत्रीय निदेशक और डीएफओ के पास होगा। जिससे अगर किसी तरह के शिकार, अवैध उत्खनन, पेड़ों के कटाई की जाती है तो इसकी इमेज वहां संबंधित अधिकारी के पास तक पहुंच जाएगी।

वाइल्ड लाइफ प्रमुख राजेश श्रीवास्तव के अनुसार पन्ना, संजय सहित कुछ अन्य नेशनल पार्कों में कैमरे लगाने की तैयारी है। प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया है।

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दीपेश तिवारी
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