scriptTigers come from the belt of Kerwa, Kathotia, Kaliasot, it is necessar | केरवा, कठौतिया, कलियासोत की पट्टी से आते हैं बाघ, इसे सुरक्षित करने मानवीय बसाहट का दबाव रोकना जरूरी | Patrika News

केरवा, कठौतिया, कलियासोत की पट्टी से आते हैं बाघ, इसे सुरक्षित करने मानवीय बसाहट का दबाव रोकना जरूरी

locationभोपालPublished: Oct 07, 2022 11:35:40 pm

- वर्ष 2012 में कठौतिया में करंट से मारा गया था एक बाघ, आज 10 साल बाद बन रहे बही हालात,

- आस-पास गांव के लोगों ने जंगली ***** से फसल बचाने लगा रखे हैं तार, उनमें दौड़ता है करंट,- बाघ खेतों में गया तो कहीं हो न जाए पुनरावृत्ति, वन विभाग को रहना होगा अलर्ट

- वन विभाग की टीम और मैनिट प्रबंधन के बीच बैठक हुई, इसके बाद एडवाइजरी जारी की है, पशुओं को अंदर रखने की सलाह

केरवा, कठौतिया, कलियासोत की पट्टी से आते हैं बाघ, इसे सुरक्षित करने मानवीय बसाहट का दबाव रोकना जरूरी
वन विभाग की टीम और मैनिट प्रबंधन के बीच बैठक हुई, इसके बाद एडवाइजरी जारी की है, पशुओं को अंदर रखने की सलाह
भोपाल. रातापानी से भोपाल तक बाघ के आने की पट्टी केरवा, कठौतिया और कलियासोत की तरफ से है। बाघ टी-1 और बाघिन टी-2 की पांचवीं पीढ़ी का बाघ अपनी मां से अलग होकर रातापानी से करीब चालीस-पचास किलोमीटर दूर यहां तक आ पहुंचा है। बाघिन जन्म के अठारह माह में अपने बच्चों को अलग कर देती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बाघिन की तरफ से छोड़े गए दो और शावक बाघ यहां तक पहुंंच सकते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो वन विभाग के लिए ये समय चुनौती भरा है। क्योंकि बाघ जिस पट्टी से आते हैं उस पर मानवीय दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे रोकना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खेतों में इन दिनों फसल खड़ी है, इसेे बचाने के लिए लोग कंटीले तार लगाते हैं, जिसमें करंट रहता है। अगर बाघ मैनिट से निकलकर खेतों की तरफ गया तो उसके साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है।
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