10 साल का अब्दुल बिना दोनों हाथों के बने नेशनल तैराक,आज होंगे बाल संसद में मुख्य अतिथि

अगर किसी काम को करने का जज्बा दिल में है, तो कोई भी काम करना कठिन नहीं है।

By: दीपेश तिवारी

Published: 22 Aug 2017, 12:34 PM IST

भोपाल। एेसी ही शख्सियत है, 10 वर्षीय अब्दुल कादिर, जिनके दोनों हाथ नहीं हैं। वे आज नेशनल तैराक हैं। पैराआेलंपिक में तीन गोल्ड और एक सिल्वर मेडल ले चुके हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मंगलवार को बाल संसद और ग्लोबल अभियान कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में अब्दुल कादिर मुख्य अतिथि होंगे।
रतलाम निवासी अब्दुल कादिर इंदौरी सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं। बचपन से ही होनहार अब्दुल पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी अग्रणी हैं। बचपन में एक हादसे के बाद उन्हें दोनों हाथ गंवाने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके पिता की हार्डवेयर की दुकान है। अब्दुल कादिर का कहना है कि उनका एक ही लक्ष्य है कि एशियन और ओलंपिक में वे देश के लिए मेडल लेकर आए। बाल संसद में भाग लेने के लिए अपने माता-पिता और कोच के साथ भोपाल पहुंचे।

बाल संसद और कार्यशाला का होगा आयोजन : मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा वल्र्ड विजन की ओर से बाल संसद और बाल यौन शोषण समाप्त करने के लिए ग्लोबल अभियान कार्यशाला होगी। यह आयोजन समन्वय भवन में होगा। इसमें सुबह 8 बजे से बाल संसद और 11 बजे से प्रदेश में बाल यौन शोषण समाप्त करने के लिए कार्यशाला का शुभारंभ होग।
कार्यशाला में बच्चों से संबंधित कानून, आईटीई, जेजे एक्ट, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा अपराध, कम आयु के बच्चे नशे की गिरफ्त में, पास्को एक्ट, यौन शोषण समाप्त करने के लिए ग्लोबल अभियान कार्यशाला का शुभारंभ होगा। जेजे एक्ट 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा अपराध, कम आयु के बच्चे नशे की गिरफ्त में, पाक्सो एक्ट जैसे विषय रहेंगे।

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से गंवाने पड़े थे हाथ :
कोच राजा राठौर ने बताया कि अब्दुल कादिर लगभग तीन साल पहले अपनी मौसी के यहां भोपाल की मुल्ला कॉलोनी आए थे। वह घर की छत पर बच्चों के साथ खेल रहे थे। उनका हाथ छत की थोड़ी ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन को छू गया। इस हादसे के बाद वे मुंबई में भर्ती रहे। उनके पिता हुसैन इंदौरी भी तैराक हैं। इस हादसे के बाद भी वे अपने बेटे को आगे बढ़ाना चाहते थे। लिहाजा अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही उन्होंने अब्दुल को पैर से लिखना, मोबाइल चलाना आदि सिखा दिया।

इसकी जानकारी जब कोच को लगी, तो उन्होंने इसे तैराकी के लिए तैयार करने का बीड़ा उठाया और दो ढाई माह में ही वे एक कुशल तैराक बन गए। तैराकी में उन्होंने कर्नाटक बेलगांव में हुई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल प्राप्त किया, जबकि इसी वर्ष जयपुर में हुई प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल लाए हैं। हमे भरोसा है कि वह एक दिन पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करेगा।

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दीपेश तिवारी
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