scriptTooth worm can be dangerous for patients suffering from heart disease | शोध- दांतो की बीमारी वाले मरीजों में होता है हृदय रोग ज्यादा गंभीर | Patrika News

शोध- दांतो की बीमारी वाले मरीजों में होता है हृदय रोग ज्यादा गंभीर

- रहें अलर्ट: गांधी मेडिकल कॉलेज में एक हजार हार्ट मरीजों पर शोध

- हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है दांतों का कीड़ा

भोपाल

Published: July 31, 2022 11:27:26 am

भोपाल। अगर आप हृदय संबंधी जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे हैं तो अलर्ट हो जाएं, क्योंकि दांतों का कीड़ा बीमारी को और बढ़ा सकता है। यह तथ्य गांधी मेडिकल कॉलेज के दंत चिकित्सा विभाग द्वारा एक हजार से ज्यादा जन्मजात हृदय मरीजों पर किए गए शोध में सामने आया है। विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज भार्गव ने बताया कि जिन मरीजों को पायरिया, दांतों में कीड़ा या अन्य बीमारियां हैं, उनमें अन्य मरीजों की तुलना में हृदय रोग ज्यादा गंभीर था।

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ऐसे समझें
डॉ. भार्गव के अनुसार मुंह में करीब 700 तरह के खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं। दांतों में पाया जाने वाले प्लॉक (परत) में कई बैक्टीरिया होते हैं। भोजन के दौरान यह टूटकर खून की नलियों के जरिए हृदय तक पहुंच जाती है। जहां परत अटकती हैं, वहां ब्लॉक बनने लगते हैं।

तीन बार ब्रश के साथ माउथवॉश का करें इस्तेमाल
ऐसे मरीजों को अपनी मूल बीमारी के साथ मुंह की साफ-सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए। डॉ. भार्गव ने बताया कि अगर लंबे समय तक दांत में दर्द बना रहे, मुंह में सड़न या स्वाद में बदलाव हो तो डॉक्टर से जरूर चेक कराना चाहिए। इसके साथ ही नियमित रूप से दांतों की सफाई और माउथवॉश आवश्यक है। माउथवॉश बैक्टीरिया कोखत्म करने के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

दांतों को नुकसान होने के कारण (Causes of Tooth Decay)
- जानकारों की माने तो मिठाइयों में कई बैक्टीरिया पाये जाते हैं। अधिक मिठाई खाने वाले लोगों के मुँह में अधिक बैक्टीरिया चला जाता है। बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन कर दांतों के इनामेल को नुकसान पहुंचाते हैं और नियमित रूप से दांतों की सफाई न होने से स्थिति और भी बदतर हो जाती है।

- कोल्ड ड्रिंक ज्यादा पीने से दांतों को काफी नुकसान पहुंचता है और डिब्बाबंद जूस में मिठास ज्यादा होने से इसके सेवन से भी दांत खराब होने लगते हैं। इसकी बजाए ताजा जूस पीने से दांतों को कोई हानि नहीं पहुँचती और सेहत भी बेहतर होती जाती है।

- अगर आप एनर्जी बढ़ाने के लिए कॉफी का सेवन करते हैं तो दांत खराब होने की सम्भावना रहती है क्योंकि ज्यादा कॉफी पीने से दांतों पर पीलापन जमा होने लगता है जो ब्रश करने पर भी दूर नहीं होता।

- कुछ लोग तनाव और नींद की कमी के चलते अपने दांतों को आपस में रगड़ने लगते हैं जिससे दांत कमजोर होने लगते हैं।
- बोतलों के ढक्कन खोलने के लिए अगर आप भी दांतों का इस्तेमाल करते हैं तो संभल जाइये क्योंकि ऐसा करने से दांतों में दरारें आने लगती हैं और दांत कमजोर होकर टूट भी सकते हैं।

- कुछ लोग बर्फ खाने के बेहद शौकीन होते हैं लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में बर्फ खायी जाये तो दांतों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि ज्यादा बर्फ खाने से दांतों में दरारें आ सकती हैं।

- अक्सर माना जाता है कि बच्चे ही पेंसिल को चबाने की आदत रखते हैं, लेकिन बहुत से बड़े लोगों को भी काम के दौरान पेन मुँह में रखने और चबाते रहने की आदत पड़ जाती है। इस आदत से जल्द से जल्द छुटकारा न मिले तो दांत खराब हो सकते हैं।

- कैंडी की अधिकांश किस्मों में एसिड होता है, लेकिन खट्टी कैंडीज में खट्टापन देने के लिए बहुत अधिक मात्रा में एसिड होता है। इसलिए इन कैंडी को खाने से बचें क्योंकि यह आपके दांतों के इनामेल में बड़ी क्षति का कारण बन सकता है।

- दवाएं दो तरीके से दांतों के इनामेल को नुकसान पहुंचा सकती है- लार की मात्रा को कम कर मुँह में सूखापन का कारण बनकर या इसमें मौजूद अम्लीय तत्व की मौजूदगी के कारण। इसके अलावा दवाओं या सप्लीमेंट में विटामिन-सी की मौजूदगी इन्हें अत्यधिक अम्लीय बनाती हैं, जो इनामेल को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसके अलावा दांतों को इनके बीमारियों के कारण भी नुकसान पहुंचाता है-

पायरिया- शरीर में कैल्शियम की कमी होने, मसूड़ों की खराबी और दांत-मुँह की साफ सफाई में कमी रखने से होता है। इस रोग में मसूड़े पिलपिले और खराब हो जाते हैं और उनसे खून आता है। सांसों की बदबू की वजह भी पायरिया को हीन माना जाता है।

- जब आप दांतों को ब्रश करते हैं तो उस समय मसूड़ों से खून निकलता है।
- सांसों से बदबू आती है।
- दांत ढीले हो जाते हैं या दांतों की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है।
- पायरिया मसूड़ों को पीछे हटा देता है।
- मसूड़ों का लाल होना, मुलायम होना या मसूड़ों में सूजन आना पायरिया के लक्षण को प्रकट करते हैं।
- चबाने पर दर्द महसूस होता है।
- दांतों के बीच अंतराल बढ़ जाता है और दांत टूटकर गिरने लगते हैं।
- अपने मुंह का स्वाद परिवर्तित हो जाता है।
- आपके शरीर में सूजन आने लगती है।

छोटे बच्चों में दांतों को नुकसान पहुंचने का कारण : causes of tooth decay
बच्चों में मसूड़ों की बीमारी प्लाक के निर्माण के कारण होती है। पट्टिका कीटाणुओं की एक चिपचिपी, अदृश्य परत होती है जो आपके बच्चे के मसूड़ों और दांतों पर स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। पट्टिका में विषाक्त पदार्थों को पैदा करने वाले बैक्टीरिया होते हैं जो उसके मसूड़ों को जलन, क्षति और नुकसान पहुँचाते हैं। हर दिन उसके मुँह में सैकड़ों बैक्टीरिया पनपते हैं-

- अंगूठा चूसने से
- मुंह में कुछ भी डालते रहने से
- पेंसिल चबाने से

दांतों का क्षय होने से बचाने के उपाय (Prevention and Precaution Tips for Tooth Decay)
जीवनशैली और आहार दोनों में बदलाव लाने पर ही दांतों को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं-

- ब्रशिंग नियमित करें, इससे प्लाक और बैक्टीरिया के निर्माण को रोकने में मदद मिलती है, जो दंतक्षय और पेरियोडेंटल बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

- अपने दांतो को ज्यादा जोर से रगड़ कर ब्रश न करें इससे उनकी चमक जल्दी फीकी पड़ जाएगी। अपने सफेद चमकदार दांतों पर हल्के हाथों से और आराम से ब्रश लगाएं।

- आपको पता नहीं चलेगा लेकिन दांतों को पीसने या टकराने से इनेमल हट जाता है और डेंटिन दिखने लगता है, इनेमल और डेंटिन उन चार अवयवों में से है जिनसे मिलकर दांत बनते हैं, डेंटिन दूसरा हार्ड टिशू है जो इनेमल के अंदर होता है, इसमें खोखली ट्यूब्स होती है जो तंत्रिकाओं तक पहुंचती है, फिर इससे दांतों मे संवेदनशीलता महसूस होने लगती है।

- शर्करा और स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि इस तरह के खाद्य पदार्थों में मौजूद चीनी लार में बैक्टीरिया के साथ प्रतिक्रिया करके दंतक्षय बढ़ाने और इनेमल को समाप्त करने वाले एसिड का निर्माण करती है।

- जीभ भी बैक्टीरिया को एकत्र करती है, इसलिए ब्रश करने के बाद एक जीभी से जीभ को साफ करना चाहिए।

- यदि आपके मसूड़ों में सूजन हो जाती है या उनसे खून बहता है तो एक दंत चिकित्सक से परामर्श लें। दांतों और मसूड़ों के दर्द को अनदेखा न करें।

- हर छह महीने में अपने दांतों की जांच करवाएं, वर्ष में दो बार डेंटल क्लीनिंग करवाएं।

- रेड वाइन, सोडा, खट्टेफल और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ छोड़ दें, लेकिन, फिर भी आप एक या दो ड्रिंक पीना चाहते हैं तो स्ट्रॉ का इस्तेमाल करें ताकि इसमें मौजूद एसिड पूरे मुँह में न फैल सके।

- इसका मतलब है कि सुबह के समय कम से कम दो बार और सोने से पहले भी दो बार और दिन में कम से कम एक बार कुल्ला करना चाहिए। ब्रश से पहले फ्लॉसिंग कर दांतों में फंसे भोजन और बैक्टीरिया को दूर किया जा सकता है।

- दांतों की साफ-सफाई के लिए नियमित रूप से अपने दंत चिकित्सक या दंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाएं, जिससे पायरिया के प्रारम्भिक लक्षण में ही उसकी जांच हो सके और रोग होने से पहले ही उसका उपचार किया जा सके।

- कुछ दवाएं या धूम्रपान करना पायरिया रोग होने के कारण बन सकते हैं, शुष्क मुंह भी इसका कारण बन सकता है। अत शुष्क मुंह न रखे और धूम्रपान का सेवन न करें।

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