डीजल बिक्री में 60 प्रतिशत कमी, रोज 30 करोड़ के राजस्व का नुकसान

ट्रक-ट्रांसपोर्ट हड़ताल: दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर फिलहाल असर नहीं...

 

By: Sumeet Pandey

Published: 24 Jul 2018, 07:14 AM IST

भोपाल. ट्रक-ट्रांसपोर्ट की शुक्रवार से चल रही देशव्यापी हड़ताल से न केवल ट्रांसपोर्ट उद्योग को बल्कि सरकार को भी राजस्व के रूप में भारी नुकसान हो रहा है। हड़ताल से डीजल की बिक्री 60 प्रतिशत तक गिरना बताया जा रहा है।

अकेले भोपाल में 12 लाख लीटर डीजल की रोजाना खपत होती है। पंप ऑपरेटरों के मुताबिक प्रदेश में 110 करोड़ रुपए का प्रतिदिन डीजल बिकता है। इससे टैक्स का आंकलन करीब 30 करोड़ रुपए आता है।

दरअसल देश के ट्रक-ट्रांसपोर्टर पिछले चार दिन से हड़ताल पर चल रहे हैं। हड़ताल के चलते माल का परिवहन (दूध-फल-सब्जी जैसी अत्यवाश्यक वस्तुओं को छोड़कर) पूरी तरह से प्रभाावित हो रहा है। ट्रांसपोर्टरों की माने तो कई जगह वाहनों में माल भरा हुआ है और ऐसे वाहन रास्ते में खड़े हो गए हैं। उनकी आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई है।

ट्रांसपोर्टरों ने माल की बुकिंग पूरी तरह से बंद कर दी है। सोमवार को हड़ताल का ज्यादा असर देखा गया। हालांकि बाजार में किसी तरह की उपभोक्ता वस्तुओं की कमी नहीं है। चूंकि बारिश का दौर है, इसलिए ग्राहकी भी कमजोर है।

इससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर हाल-फिलहाल कोई असर नहीं देखा जा रहा, लेकिन बताया जा रहा है कि हड़ताल आगे लंबी खींचती है, वस्तुओं की कमी के साथ भावों में तेजी देखी जा सकती है।
श्री भोपाल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मालपानी ने बताया कि हमारी मांगों पर सरकार ने तुरंत ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिलेगा। ट्रांसपोर्टर ठाकुर लाल राजपूत, राजेन्द्र सिंह बग्गा, विनोद जैन , जितेन्द्र पाल सिंह गिल आदि ने संयुक्त रूप से बताया कि हड़ताल पूरी तरह से सफल है। वाहनों की लोडिंग-अनलोडिंग सहित ट्रांसपोर्टरों द्वारा बुकिंग का काम पूरी तरह से रोक दिया है।

हड़ताल से डीजल बिक्री और राजस्व को इसलिए भी प्रभावित होना नहीं कहा जा सकता क्योंकि जो माल ट्रांसपोर्टर के पास रखा हुआ है, वह उसका हड़ताल खत्म होने के बाद परिवहन करेगा। तब भी उतना ही डीजल लगेगा और विभाग को उसका टैक्स मिलेगा।
- आरपी श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त, राज्य कर

 

ट्रांसपोर्ट अनआर्गनाइज्ड सेक्टर है। जीएसटी के नियमों का सरलीकरण करना चाहिए। पार्ट बी में जो ट्रांसपोर्टर को जिम्मेदारी है, उसमें पेनल्टी का प्रावधान खत्म करना चाहिए।सरकार को ही करीब 30 करोड़ रुपए रोज का रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है।
- कमल पंजवानी, सचिव, प्रांतीय ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसो.

फैक्ट फाइल...

10 हजार करोड़ रु. लगभग डीजल-पेट्रोल से रेवेन्यू आती है राज्य को प्रतिमाह
08 रुपए प्रति लीटर सेस
27 प्रतिशत वैट टैक्स लगाती है राज्य सरकार
100 करोड़ से अधिक का रोजाना कारोबार हो रहा प्रभावित प्रदेश में
12 लाख लीटर रोजाना डीजल बिकता है राजधानी
1.50 करोड़ लीटर डीजल रोजाना बिकता है प्रदेश में
56 प्रतिशत के आसपास टैक्स आता है केन्द्र एवं राज्य का मिलाकर
31.50 रुपए के आसपास आती है डीजल की मूल कीमत

 

Sumeet Pandey Desk
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