मंत्रियों के लिए खुला खजाना, कर्मचारी नाराज

- विधायकों ने विधायक निधि बढ़ाने की मांग दोहराई

भोपाल। मंत्रियों की स्वेच्छानुदान निधि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपए किए जाने से राज्य कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। सरकार के खिलाफ लामबंद हुए कर्मचारियों ने 17 जनवरी को भोपाल में प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने का निर्णय लिया है। नाराजगी इस बात को लेकर है कि कर्मचारियों के मामले में सरकार खजाने की माली हालत खराब होने की बात कहती रही लेकिन मंत्रियों के लिए खजाना खोल दिया है। मंत्रियों के लिए खजाना खोले जाने के बाद विधायक भी सक्रिय भी हुए हैं। उन्होंने विधायक निधि बढ़ाए जाने की मांग दोहराई है।

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने कर्मचारियों से वादा किया था कि उन्हें केन्द्र के समान महंगाई भत्ता दिया जाएगा। साथ ही वेतन विसंगति सहित अन्य विसंगतियां दूर करने का वचन भी दूर किया था, लेकिन एक साल बाद भी ये वचन अधूरे हैं। राज्य कर्मचारी केन्द्रीय कर्मचारियों की तुलना में डीए में पिछड़े हैं। केन्द्र सरकार ने जुलाई 2019 में अपने कर्मचारियों का प्रतिशत डीए बढ़ा दिया लेकिन राज्य सरकार ने खजाने की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए इस मामले को ठण्डे में डाल दिया गया। इससे राज्य के 10 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें नियमित कर्मचारियों सहित अध्यापक संवर्ग, शिक्षक संवर्ग और पंचायत कर्मचारी शामिल हैं।

विधायको की मांग बढ़े विधायक निधि -

मंत्रियों की स्वेच्छानुदान निधि बढऩे के बाद विधायकों के खेमे से भी विधायक निधि बढ़ाए जाने की मांग उठने लगी है। राज्य के विधायकों का वर्तमान में विधायक निधि एक करोड़ 85 लाख और 15 लाख रुपए स्वेच्छानुदान राशि है। इस तरह यह राशि मिलाकर दो करोड़ रुपए है। विधायक इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए की मांग कर रहे हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि क्षेत्र में विकास कार्य इत्यादि के लिए यह राशि कम पड़ती है, इसलिए इसे बढ़ाया जाए। इसको लेकर विधायकों को आश्वासन ही मिल रहा है। हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में भी विधायकों ने विधायक निधि बढ़ाए जाने की मांग की थी। उस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सदन में विधायकों को विधायक निधि बढ़ाए जाने का भरोसा दिलाया था।

2016 में बढ़ा थी विधायक निधि -

शिवराज सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016 में विधायकों की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हुई थी। उसी दौरान विधायक निधि में भी बढ़ोत्तरी हुई थी। उस समय विधायक निधि 80 लाख थी, इसे बढ़ाकर एक करोड़ 85 लाख रुपए किया गया। इसके बाद से इस राशि में बढ़ोत्तरी नहीं हुई।

किसने क्या कहा -

मंत्रियों का प्रस्ताव पुराना था, इसलिए मंत्रियों की स्वेच्छानुदान निधि बढ़ाई गई है। विधायकों की विधायक निधि के बारे में बजट सत्र में विचार होगा। राज्य कर्मचारियों को डीए भी मिलेगा। हमारी सरकार ने कर्मचारियों को वचन दिया है। यह वचन पूरा किया होगा। - तरुण भनोत, वित्तमंत्री

 

कांग्रेस सरकार का एक साल का अनुभव यह रहा कि बजट से जुड़े अधिकांश वादे पूरे नहीं हुए। आमजन परेशान हैं, लोग उम्मीद करते हैं कि विकास के कार्य विधायक पूरे कर देंगे, लेकिन विधायक निधि कम होने से कार्य नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए विधायक निधि बढ़ाई जाना चाहिए। पिछले सत्र में भी यह मांग उठी थी, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई। - अजय विश्नोई, विधायक

जब भी राज्य कर्मचारियों की बात होती है तो सरकार आर्थिक तंगी का हवाला दे देती है। डीए मामले में भी ऐसा ही हुआ। अन्य मांगें भी लंबित हैं। सरकार को वचन याद दिलाने के लिए 17 जनवरी को भोपाल में राज्य स्तरीय आंदोलन किया जाएगा। - लक्ष्मीनारायण शर्मा, महामंत्री तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ

दीपेश अवस्थी
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned