Muslim Womens Conference: देश के पहले मुस्लिम महिला सम्मेलन में महिलाओं को दी शरीयत की जानकारी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से देश का पहला मुस्लिम महिला सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया।

By: दीपेश तिवारी

Updated: 12 Sep 2017, 01:36 PM IST

भोपाल। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से भोपाल के खानू गांव में रविवार को बैठक हुई। वहीं बोर्ड की ओर से तीन तलाक़ से जुड़े मसले ओर शरीयत के नियमों को लेकर सोमवार को मुस्लिम महिला सम्मेलन का आयोजन इकबाल मैदान में किया गया। जो सोमवार को सुबह 10 बजे से शुरू हो गया।


बोर्ड की ओर से इस तरह का यह पहला आयोजन है, जिसमें देशभर की मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं।। तीन तलाक मामले और शरीयत के नियम-कायदों को लेकर बोर्ड ने ये महिला सम्मेलन आयोजित किया है। इस दौरान सम्मेलन में बोर्ड के चैयरमेन मो.राबे हसन नदवी,जरनल सेकेट्री मो. वली रहमानी ओर डॉ आसमा जेहरा भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर यहां उपस्थित महिलाओं को उलेमाओं द्वारा शरीयत के बारे में बताया गया।

सुबह 10 बजे शुरू हुआ..
देश का पहला मुस्लिम महिला सम्मेलन सोमवार सुबह 10 बजे से शुरू किया गया। इस सम्मेलन में केवल महिलाओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

इस्लामी तरीके से हो निकाह...
सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शहर काजी सयैद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि शरीयत पर समझौता नहीं होगा साथ ही उनके मुताबिक इस्लामी तरीके से ही निकाह होना चाहिए।

जानें क्या है तीन तलाक और सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

आपको बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अ-संवैधानिक करार दिया था। वहीं केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने के आदेश दिए थे।
- सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने में तीन तलाक पर कानून बनाने के आदेश के साथ ही एक बार में तीन तलाक को अवैध या गैर-कानूनी कहा।
- आपको बता दें कि तीन तलाक की परम्परा 1400 साल पुरानी है।
- इस परम्परा पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को ऐतिहासिक फैसला दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है।
- जबकि 22 अगस्त को देर शाम सरकार ने इस पर अपना रुख साफ कर दिया।

- लॉ मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भले ही दो जजों ने कानून बनाने की राय दी, लेकिन बेंच के मेजॉरिटी जजमेंट में तीन तलाक को अ-संवैधानिक करार दिया।
- इसीलिए भोपाल में तीन तलाक के मुद्दे पर चर्चा के लिए बोर्ड की ओर से बैठक आयोजित की गई है।
- आपको बता दें कि 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड, अनकॉन्स्टिट्यूशनल और इल्लीगल है।
- बेंच में शामिल दो जजों ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।

तीन तलाक पर फैसला, लेकिन इन पहलुओं पर भी हो विचार :

- जब तलाक-ए-बिद्दत यानी तीन तलाक खारिज हो चुका है, लेकिन सुन्नी मुस्लिमों के पास अब भी तलाक देने के दो विकल्प बाकी हैं। इनमें एक तलाक-ए-अहसन और दूसरा तलाक- ए-हसन शामिल है।
- तलाक-ए-अहसन के तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महीने में एक बार तलाक कहता है।
- इस दौरान 90 दिन में सुलह की कोशिश होती है। यदि सुलह नहीं हो पाती तो तीन महीने में तीन बार तलाक कहकर पति पत्नी से अलग हो जाता है।
- इस दौरान पत्नी इद्दत (सेपरेशन का वक्त) गुजारती है।
- इद्दत का वक्त पहले महीने में तलाक कहने से शुरू हो जाता है।
- तलाक-ए-हसन के नियम के मुताबिक पति अपनी पत्नी को मेन्स्ट्रूएशन साइकिल के दौरान तलाक कहता है।
- तीन साइकिल में तलाक कहने पर तलाक की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
- जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक साथ तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाई है।
- सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन में दखल नहीं दिया सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत पर रोक लगाई है।

सम्मेलन की मुख्य झलकियां:

- करीब पांच हजार महिलाओं ने लिया हिस्सा ।
- मुस्लिम समाज में सोशल रिफार्म के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड चलाएगा मुहिम ।
- मुस्लिम महिलाओं से भरवाया जाएगा संकल्प पत्र, शरीयत पर कायम, इस पर यकीन।
- इकबाल मैदान से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत, देशभर में चलेगा ।
- कहा सुप्रीम कोर्ट का आदर, फैसले का जो हिस्सा शरीयत के खिलाफ उसका निकाला जाएगा हल।
- जलसे में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष कल्बे सादिक भी शामिल  ।
- पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला बिंग ने कहा जलसा यह दिखाने के लिए कि शरीयत के लिए एकजुट हैं मुस्लिम महिलाएं ।
- चार घंटे चला जलसा, पांच हजार महिलाएं हुई शामिल ।
- ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष सहित आधा दर्जन पदाधिकारी पहुंचे, बोर्ड की महिला बिंग की सदस्य भी शामिल ।
- महिलाओं को बताया तीन तलाक पर कोर्ट के फैसले के मायने इस पर बोर्ड का नजरिया।

दीपेश तिवारी
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