भोपाल गैंगरेप: मेडिकल रिपोर्ट में लापरवाही पर दो महिला डॉक्टर सस्पेंड

एक अन्य डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस थमाया, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद हुई बैठक में लिया गया फैसला।

By: दीपेश तिवारी

Published: 12 Nov 2017, 09:59 AM IST

भोपाल। गैंगरेप पीडि़ता छात्रा की मेडिकल रिपोर्ट में लापरवाही बरतने के मामले में सुल्तानिया अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को दो महिला डॉक्टरों को निलंबित कर दिया। मामले में मुख्य ड्यूटी डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।

मेडिकल रिपोर्ट में गडबड़ी सामने आने के बाद सुल्तानिया अस्पताल अधीक्षक डॉ. करन पीपरे को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। डॉ. पीपरे ने शनिवार दोपहर गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन एमसी सोनगरा को जांच रिपोर्ट सौंपी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अधिकारियों ने बैठक की। डॉ. सोनगरा ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में लापरवाही बरतने वाली डॉ. खुशबू गजभिये और डॉ. संयोगिता को संस्पेंड कर दिया गया है, वहीं उस समय ड्यूटी पर रही असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अपूर्वा पारेवाल को नोटिस थमाया गया है। इससे पहले इन डॉक्टरों से मामले में जवाब मांगा गया था।

सीजे ने लिया स्वत: संज्ञान, हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई-
इधर,मप्र हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने भोपाल गैंगरेप मामले पर संवेदनशीलता दिखाई है। सीजे के निर्देश पर मीडिया में प्रकाशित खबरों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इस पर 13 नवंबर को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई होगी। प्रधान न्यायिक रजिस्ट्रार ने एक आदेश जारी कर यह याचिका पंजीकृत करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट की रजिस्ट्री शाखा को जारी निर्देश के साथ मीडिया में प्रकाशित खबरों की क्लिपिंग लगाई गई हैं। इस जनहित याचिका को दर्ज कर इसकी सुनवाई सोमवार को नियत की गई। याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह विभाग प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, डीजीपी, आईजीपी भोपाल रेंज व एसपी भोपाल को पक्षकार बनाया गया है।

दुष्कर्मियों को फांसी के लिए कानून क्यों नहीं बनाती सरकार-
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने शनिवार को सवाल उठाया कि दुष्कर्मियों को फांसी देने के लिए सरकार कानून क्यों नहीं बनाती, जबकि निर्भया कांड के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुष्कर्मियों को फांसी देने पर जोर दिया था। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था। पांच साल बाद भी दुष्कर्मियों को फांसी के लिए कानून नहीं बन सका।

केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार है। यदि मुख्यमंत्री गंभीर थे तो कानून क्यों नहीं बनवा सके। सरकार की इच्छा पर संदेह है। शिवराज सरकार में यह परंपरा हो गई है कि वह हर हादसे के बाद जागती है, और फिर सो जाती है। दुर्भाग्य है कि बार-बार हादसे होते हैं। इसके बाद सरकार की बैठकों और निर्देशों का राग शुरू हो जाता है।

दीपेश तिवारी
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