तो क्या सच में राजनीति छोड़कर जा रही हैं उमा भारती?

तो क्या सच में राजनीति छोड़कर जा रही हैं उमा भारती?

shailendra tiwari | Publish: Feb, 15 2018 06:37:49 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

राजनीति में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं उमा भारती, राजनीति छोड़ने के बहाने भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश

 

भोपाल. मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और देश की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने अगले तीन साल कोई चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। संकेत दिए हैं कि वह राजनीति से किनारा करना चाहती हैं। सीधे शब्दों में कहें तो वह पार्टी के लिए चुनाव प्रचार तो करना चाहती हैं लेकिन सीधे और सक्रिय राजनीति से दूर रहना चाहती हैं। बहाना खुद की तबीयत नासाज होने का बनाया जा रहा है। उमा भारती खुद भी बोल रही हैं कि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहती, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। वजह कुछ और है, उमा भारती ने एक बार फिर सन्यास का सहारा लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को घेरा है।

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ये उमा भारती का अंदाज है
दरअसल, यह उमा भारती का अंदाज है कि वह जब भी राजनीति के हाशिए पर जाती हैं तो वह राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा करने लगती हैं। लेकिन इस बीच वह अपनी ताकत का एहसास पार्टी के भीतर जरूरत कराती रहती हैं। अब पिछले दिनों झांसी में दिए उनके बयान को ही देख लें। उन्होंने कहा था कि जब दो सांसदों वाली पार्टी थी तो मुझे गधों की तरह पार्टी के काम में लगाया, लेकिन आज...? बस यही सवाल है कि आज उमा भारती के पास क्या है? उमा भारती नाराज हैं। इस बात से भी कि उनकी पार्टी के भीतर अहमियत कम हो रही है। पार्टी के फैसलों में उनका कोई दखल नहीं है। उत्तर प्रदेश से सांसद जरूर हैं, लेकिन उन्हें मध्यप्रदेश के भीतर राजनीतिक दखल चाहिए। जो कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मंजूर नहीं है। या कहें कि वह सियासत का बंटवारा नहीं चाहते हैं, इसलिए उमा भारती को मध्यप्रदेश में राजनीतिक तौर पर मजबूत होते नहीं देखना चाहते हैं।

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हाशिए पर भेजकर भाजपा चाहती है कि खुश रहें
उमा भारती का दर्द इतना भर नहीं है। बल्कि वह इस बात से भी नाराज हैं कि उन्हें मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कमजोर क्यों किया? मंत्रिमंडल विस्तार में उनका ओहदा कम होने के संकेत उन्हें मिल गए थे, यही वजह थी कि उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम का बहिस्कार किया था। कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं, बल्कि ललितपुर में एक छोटे कार्यक्रम में शामिल हो रही थीं। उनका विरोध इस बात पर भी था कि जब टीकमगढ़ के सांसद वीरेंद्र खटीक को मंत्री बनाने का फैसला लिया गया तो उनकी राय क्यों नहीं ली गई? बुंदेलखंड की राजनीति में उनसे बिना पूछे हुए इस फैसले ने उन्हें ज्यादा नाराज किया। उन्हें अपने घटे कद से ज्यादा दर्द इस उपेक्षा से हुआ। बात यहीं नहीं रुकी, उसके बाद प्रहलाद पटेल के भाई जालम सिंह पटेल को शिवराज सरकार में मंत्री बनाया गया। कहा गया कि वह लोध वोट को संभालने की राजनीति करेंगे। मतलब जालम सिंह और प्रहलाद पटेल मिलकर मध्यप्रदेश में उमा भारती का विकल्प बनेंगे। उमा भारती इससे भी नाराज हैं।

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उत्तर प्रदेश में भी नहीं मिल रही तवज्जो
उमा भारती झांसी में बोली तो उसकी आवाज मध्यप्रदेश में कम सुनाई दी तो उन्होंने भोपाल में अपने बंगले पर पत्रकारों को बुलाकर ऐलान कर दिया कि वह अगले तीन साल चुनाव नहीं लड़ेंगी। वजह स्वास्थ्य कारण दिए गए। लेकिन जो उमा के करीबी हैं या उन्हें जानते हैं, उन्हें मालूम है कि उमा भारती के पास स्वास्थ्य कारणों का हवाला पिछले कई सालों से है। बावजूद इसके वह सत्ता में मजबूती के साथ बनी रहना चाहती हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी वह हाशिए पर हैं।

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मध्यप्रदेश में तलाश रही हैं जमीन

ऐसे में वह मध्यप्रदेश में ही अपनी वापसी की गुंजाइश तलाश रही हैं, लेकिन शिवराज और दूसरे लोग उनकी राजनीति यहां पर खड़ी नहीं होने देना चाहते हैं जिसके कारण वह गुस्से में हैं। उमा भारती को इस बात का भी दर्द है कि उनके कार्यकर्ताओं या कहें कि उनके समर्थकों को भी शिवराज सरकार तवज्जो नहीं दे रही है। यही वजह है कि अगर उमा भारती विरोध का सुर फूंक रही हैं तो उनके सबसे खास सिपेहसालार अनूप मिश्रा लोकसभा से लेकर ग्वालियर की जमीन पर प्रदेश सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। खुलकर सवाल उठा रहे हैं सरकार की कार्यशैली पर। सवाल खड़े कर रहे हैं सरकार की भूमिका पर। यही वजह है कि जब उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाने की बात पार्टी के भीतर हुई थी तो उन्होंने भोपाल सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन पार्टी उन्हें उत्तर प्रदेश की झांसी सीट पर ले गई। हालांकि उमा भारती उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के भरोसे से उत्तर प्रदेश भी चली गई थीं। लेकिन अपनी राजनीतिक उपेक्षा होने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश में ही राजनीति नजर आ रही है।

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