उमा बोलीं, गुजरात की तर्ज पर एमपी में भी हो सकती है शराब बंदी

मध्य प्रदेश से ज़्यादा आबादी का एवं ज़्यादा पिछड़ा राज्य बिहार जब शराब बंदी से राजस्व की हानि के उन्होंने भी विकल्प निकाल लिए तो हम तो कर ही सकते हैं

भोपाल। राज्य में शराब बंदी की पक्षधर पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने शनिवार को एक के बाद 11 ट्वीट किए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भी गुजरात की तरह बहुत बड़ी संख्या में आदिवासी हैं। जैसे गुजरात ने अपनी शराब बंदी जारी रखते हुए आदिवासियों की परम्पराओं का ध्यान रखा है हम भी उसी तर्ज़ पर मध्य प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी कर सकते हैं। गुजरात में भाजपा की एवं बिहार में एनडीए की सरकार हैं, वहाँ पर शराब बंदी है एवं वहाँ के मुख्यमंत्रियों को इस पर गर्व है। मध्य प्रदेश से ज़्यादा आबादी का एवं ज़्यादा पिछड़ा राज्य बिहार जब शराब बंदी से राजस्व की हानि के उन्होंने भी विकल्प निकाल लिए तो हम तो कर ही सकते हैं। शराब बंदी से अवैध शराब की बिक्री बढ़ेगी ऐसा बोलने से पहले गुजरात एवं बिहार का अध्ययन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्गों के 7-8 लोगों के प्रतिनिधि मण्डल से संवाद करते समय मेरी असंयत भाषा के प्रयोग का चोरी से वीडिओ बनाकर फिर उसकी क्लिप बनाकर कोंग्रस ने अधिकृत तौर पर जारी किया। उससे तो ऐसा लगता है कि शराब बंदी की गम्भीरता से लोगों का ध्यान हटाने के लिए क्या मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी शराब लॉबी की बी टीम का काम करेगी।

अवैध एवं ज़हरीली शराब पर रोक लगाना, राज्य शासन के लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतोगुणी एवं दृढ़ निश्चयी व्यक्ति हैं, यही मेरे विश्वास का कारण हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े एवं एससी, एसटी वर्ग 92 प्रतिशत है तथा इनमें से अधिकतर पिछड़े एवं एससी समुदाय के लोग ही शराब की बुरी लत के कारण बर्बादी, बीमारी, पिछड़ापन एवं गऱीबी के शिकार हैं । इन वर्गों की महिलाओं की संख्या करोड़ों में हैं उनके तो जीवन के सभी कष्टों का कारण ही उनके घर के पुरुषों का शराबी होना है । जिस दिन हम शराब बंदी कर देंगे तभी इन वर्गों का कल्याण होगा ।

दीपेश अवस्थी
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