उमंग हेल्पलाइन पर 2 हजार किशोरों ने सुनाई समस्याएं, आखिर क्यों आत्महत्या करने पर उतारू हैं बच्चे?

स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 10 से 19 साल तक के किशोंरों के लिए पढ़ाई से हटकर व्यक्तिगत समस्याएं सुलझाने के लिए उमंग हेल्पलाइन की शुरूआत की है, जिसमें हैरान कर देने वाले मामले सामने आए हैं।

भोपाल/ स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 10 से 19 साल तक के किशोंरों के लिए पढ़ाई से हटकर व्यक्तिगत समस्याएं सुलझाने के लिए उमंग हेल्पलाइन की शुरूआत की है। 13 जनवरी से शुरू हुई इस हेल्पलाइन में सिर्फ चार दिनों के भीतर ही 1958 काॅल पहुंच चुके हैं, काउंसलर द्वारा जिनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया गया। हैरानी की बात ये है कि, इनमें पांच फोन कॉल्स ऐसे भी आए, जिनमें समस्या सुनाने वाले किशोरों में सुसाइड टेेंडेंसी के लक्षण मेहसूस किये गए। काउंसलर्स के मुताबिक, बच्चों के दिमाग परेशानियां आना, समस्याओं का निदान ना होना, खुद के चुने हुए मार्गों पर चलकर रास्ता भटक जाना आम बात है, जिनका परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर परामर्श मिलने से समाधान हो जाता है, लेकिन किशोरावस्था में इनके जहन में आत्महत्या ही एक विकल्प बच पाना एक समस्या है, जिसका सबसे बेहतर उपचार अभिभावक ही कर सकते हैं।

 

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अभिभावकों को किया अवेयर

हालांकि, उमंग हेल्पलाइन पर अपनी समस्याओं को लेकर काउंसलर के समक्ष आए आत्महत्या की इच्छा रखने से ग्रस्त किशोरों की मानसिक मनोदशा को समझते हुए बातों बातों में कांउंसलर द्वारा उनके अभिभावकों से संबंधित जानकारी ली गई, ताकि उनसे संपर्क साधा जा सके। साथ ही उनके अभिभावकाें से संपर्क कर सचेत भी किया गया कि, वो अपने बच्चे को लेकर सजग हो जाएं और उससे किस तरह का व्यवहार रखना शुरु करें। साथ ही उनकी हर एक गतिविधि पर नजर भी रखें। आमतौर पर हम ये सोचते हैं कि, जिन माता पिता के सिर्फ एक बच्चा होता है वो ज्यादा लाड़ प्यार का होता है, लेकिन काउंसिलिंग में सुसाइडटेंडेंसी का शिकार बच्चों में पांच में चार किशाेर अपने माता पिता की एक लोती संतान हैं। यानी ये भी हर जगह संभव नहीं है कि, बच्चा एक लोता है तो वो अपने माता पिता या जीवन से संतुष्ट है।

 

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हेल्पलाइन का उद्देश्य

सोमवार 13 जनवरी से शुरु की गई इस हेल्पलाइन का उद्देश्य प्रदेश में रहने वाले 10 से 19 साल तक के किशोर-किशोरियों के मन की समस्याओं को सुलझाना है। हेल्पलाइन के जरिये बच्चों की पढ़ाई लिखाई के अलावा घरेलू जीवन से जुड़ी समस्याओं का निदान करने का भी उद्देश्य रखा गया है। हेल्पलाइन के जरिये काउंसलर से परामर्श लेने वाले बच्चे की की पहचान और शिकायत गोपनीय रखी जाती है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने इस हैल्पलाइन की शुरुआत करते हुए बताया था कि, अकसर किशोर अपनी कई समस्याएं न तो परिजन और न ही शिक्षकों को बता पाते हैं। उन समस्याओं का निदान करने के लिए ये हेल्पलाइन शुरु की गई है। सभी किशोर खुलकर अपनी अपनी समस्याओं को काउंसलर के सामने रख सकते हैं।

 

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हर समस्या का समाधान संभव

बता दें कि, ये राज्य स्तरीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर सोमवार से लेकर शनिवार तक सुबह 8 से रात 8 बजे तक किशोरों की समस्याओं को सुलझाने का कार्य करेगा। इसमें किशोरों के अलावा उनके अभिभावक और शिक्षक भी किशोरों की समस्याओं से जुड़े सवालों को लेकर संपर्क कर सकते हैं, साथ ही, किस मानसिकता के बच्चे को किस तरह उचित मार्गदर्शन दिया जा सकता है, परामर्श कर सकते हैं। विभाग द्वारा उमंग हेल्पलाइन के लिए टोल फ्री नंबर 14425 जारी किया गया है, जिसपर किशोर अपनी सभी समस्याओं का उचित निदान पा सकते हैं। बता दें कि, इस तरह की हेल्पलाइन के जरिये किशोरों की समस्याओं का निदान करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य हैं।

 

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किशोर ही नहीं अभिभावक भी एक बार जरूर कॉल करें

सामने आए मामलों में ज्यादातर किशोर परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते खुद को समाज और दोस्तों के बीच मेंटेन न रख पाने से निराश हैं,कुछ शारिरिक बदलाव तो कुछ मानसिक परेशानी से ग्स्त महसूस किये गए, कुछ करियर को लेकर फिक्रमंद है, कुछ पढ़ाई, कुछ बेड हेबिट के कारण डिप्रेशन आदि समस्याओं का शिकार हैं। हेल्पलाइन के डायरेक्टर का कहना है कि, अगर आप भी इनमें से किसी भी तरह की समस्या से ग्रस्त हैं तो एक बार जरूर हेल्पलाइन नंबर 14425 को अपना हितेशी समझकर कॉल करें।

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