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Unique Collection- लैम्प की बिजली से चलता था रेडियो, अब इस पर चल रही रिसर्च

आफताब लईक के संग्रह में शामिल हैं ऐसे लैम्प, कई रिकार्ड में दर्ज हुआ अनोखा संग्रह...>

भोपाल

Updated: May 09, 2022 06:56:03 pm

भोपाल। बिजली को लेकर वर्तमान में कई विकल्प की तलाश हो रही है। इनमें से एक विकल्प लैंप भी है। रोशनी के साथ ही इससे बिजली भी बन सकती है। यह कहना है राजधानी के आफताब लईक (Aftab Laeq) है। इस पर इनकी रिसर्च चल रही है। इन्होंने बताया कि पहले ऐसे कई लैम्प थे जिनकी हीट से रेडियो चलता था।

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पुराने लैम्प का इनके पास अनोखा संग्रह है। दो सौ से ज्यादा पुराने लैंप इनके पास हैं। कड़ी मेहनत के बाद इनके संग्रह से प्रेरित होकर इनकी बेटी खुशनूर इस विषय पर शोध कर रही है जिसे देश में अपनी तरह का पहला शोध बताया जा रहा। दुनिया के शुरुआती केरोसिन लैंप से लेकर कई नायाब लैंप कलेक्शन में शामिल हैं।

बिजली आने से पहले रोशनी के लिए दुनियाभर में कई प्रकार की लालटेन बनी। इनमें से जर्मनी, ऑस्टेलिया, ब्रिटेन आदि देशों में बने लैंप आफताब लईक के पास हैं। लालघाटी निवासी आफताब अपने इस अनोखे संग्रह पर किताब भी लिख रहे है। ये संग्रह अंग्रेजों के उस दौर को याद कराता है जब अंग्रेज रोशनी के लिए का कर रहे थे।

खंगाला इतिहास

इनकी बेटी खुशनूर इस पर शोध कर रही हैं। अपने शोध में इन्होंने देशभर में अलग-अलग पुराने लैंप का इतिहास खंगाला। ये बताती हैं केरोसिन आने से पहले भी लैम्प थे लेकिन उन्हें चलाने के लिए कहीं व्हेल का तेल तो कहीं वनस्पति ऑयल का उपयोग होता था। जो धुंआ ज्यादा देते थे। बताया गया लालटेन यानि लैंप उस समय स्टेटस सिंबल भी था। इसका नया वर्जन सबसे पहले धनी लोगों के पास आता था।

हर काम के लिए अलग डिजाइन

इनके संग्रह में दुनिया के सबसे छोटे लैम्प से लेकर आधुनिक लैम्प भी शामिल हैं जो आजादी से पहले तक इस्तेमाल होते रहे। बिजली न होने के कारण इसका उपयोग स्ट्रीट लाइट से लेकर इमारतों और महलों तक में होता था। कई कंपनियां इसके निर्माण में लगी थी। जिन देशों में निर्यात होना है उसके आधार वे इसे बनाती थी।

विदेशों में बनी लालटेन

विदेश की एक कंपनी डिथ ने इंडिया को देखते हुए इस पर संस्कृत में ब्योरा अंकित करवाया जाता था। विदेशों में जो लैंप बनाए गए उनका भारत और अफ्रीका में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता था। 1853 में एक ऑयल यूज होता था जिसके बाद से केरोसिन नाम दिया गया। इसी के चलते ये केरोसिन लैंप कहलाने लगे। पेरिस में स्ट्रीट लाइट में प्लास्टिक लैंप का इस्तेमाल हो रहा है। इस संग्रह के बारे में आफताब बताते हैं कि 1971 में जब भारत-पाक जंग के दौरान ब्लैक आउट हुआ था तब मां ने अपनी पेटी से गोल बत्ती का एक लैंप निकालकर जलाया। इसी से प्रभावित होकर एंटीक लैंप के कलेक्शन की शुरुआत की।

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