इंसान की तरह होता है इस पेड़ का चेकअप, मंत्रियों से ज्यादा है सुरक्षा

इंसान की तरह होता है इस पेड़ का चेकअप, मंत्रियों से ज्यादा है सुरक्षा

क्या आपने सुना है कि इन्सान की तरह किसी पेड़ का मेडिकल चैकअप किया जाता है। क्या कोई पेड़ मंत्रियों से ज्यादा खास हो सकता है। mp.patrika.com आज आपको बताने जा रहा है मध्यप्रदेश के ऐसे ही एक VVIP पेड़ के बारे में...। 


भोपाल। क्या आपने सुना है कि इन्सान की तरह किसी पेड़ का मेडिकल चैकअप किया जाता है। क्या कोई पेड़ मंत्रियों से ज्यादा खास हो सकता है। जी हां हम बताने जा रहे हैं मध्यप्रदेश के ऐसे ही एक VVIP पेड़ के बारे में, जिसकी हर पंद्रह दिनों में जांच सरकार कराती है। इसके एक पत्ते को भी नुकसान नहीं पहुंचे इसके लिए यहां सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहते हैं। इसके साथ ही चारों तरफ इसे फैंसिंग से सुरक्षित रखा गया है।

सरकारी कर्मचारी करते हैं चेकअप
इस पेड़ की देखरेख उद्यानिकी विभाग,राजस्व,पुलिस और सांची नगरपरिषद मिलकर करते हैं। ये सभी विभाग बोधि वृक्ष के लिए हमेशा ही अलर्ट रहते हैं।

पत्ते-पत्ते की सुरक्षा करते हैं गन मैन
आपने किसी व्यक्ति विशेष की सुरक्षा के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कोई पेड़ इतना VVIP हो सकता है जिसकी सुरक्षा में 24 घंटे गार्ड्स तैनात रहते हों, एक पत्ता भी टूट जाता है तो सुरक्षा में लगा प्रशासन चिंतित हो जाता है। तमाम तरह की सुरक्षा लिए यह अतिविशिष्ट पेड़ मध्यप्रदेश की राजधानी के पास स्थित सांची में है।

सांची और सलामतपुर के बीच हाईवे किनारे एक छोटी पहाड़ी पर सुरक्षा जालियों के बीच एक पेढ़ लहलहा रहा है। सामान्य तौर पर लोग इसे पीपल का पेड़ मानते हैं, लेकन इसकी कड़ी सुरक्षा को देख उनके दिमाग में यह प्रश्र जरूर उठता है कि इस पेड़ की इतनी सुरक्षा क्यों। लगभग 15 फीट ऊंचाई तक जालियों से घिरा और आस-पास पुलिस के जवान। ऐसा क्या खास है इस पेड़ मेें। हाईवे से गुजरने वाले जिन लोगों को यह नहीं मालूम कि इस पेढ़ की खासियत क्या है, क्यों यह इतना महत्वपूर्ण है। उन्हे आश्चर्य जरूर होता है।

यह पेड़ वाकई बहुत खास है। बौद्ध धर्म के अनुयाईयों के लिए यह श्रद्धा का केंद्र है, तो प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के लिए श्रीलंकाई राष्ट्रपति की सौगात। लगभग चार साल पहले 21 सितंबर 2012 को श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंद्र राजपक्षे ने इस पहाड़ी पर एक पौधा रोपा था। जो धीरे-धीरे वृक्ष का रूप ले रहा है। भगवान गौतम बुद्ध ने पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर बौधित्व को प्राप्त किया था। अत: बौद्ध धर्म में इस बोधि वृक्ष कहा जाता है। बौद्ध अनुयाईयों के लिए यह पेड़ श्रद्धा और आस्था का केंद्र है।



युनिवर्सिटी पहाड़ी पर रोपा गया था पौधा
21 सितंबर 2012 को इस पहाड़ी पर महिंद्रा राजपक्षे बौद्ध युनिवर्सिटी की आधारशिला रखने आए थे। तब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उन्होंने पहाड़ी बोधि वृक्ष (पौधा) रोपा था। तब से आज तक इसकी सुरक्षा की जा रही है। पौधे को लोहे की जालियों से घेरकर सुरक्षित किया गया है। पुलिस के जवान इसकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। पानी का एक टेंकर खड़ा रहता है। पहाड़ी पर किसी भी अंजान व्यक्ति को चडऩे की इजाजत नहीं होती है। हालांकि अभी युनिवर्सिटी के निर्माण की शुरूआत नहीं हुई है, लेकिन अब तक इस वृक्ष की सुरक्षा में लाखों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इस वृक्ष का एक पत्ता भी सूखता है तो प्रशासन में भागदौड़ मच जाती है।




फिर आए श्रीलंकाई राष्ट्रपति
एक बार फिर Shrilanka के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिमाने सांची आए थे। इस बार श्रीलंकाई राष्ट्रपति बौद्ध धर्म के प्रचारक और भारत में बौद्ध धर्म की पुर्नस्थापना करने वाले अनागरिक धर्मपाल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने अपने पूर्व राष्ट्रपति के हाथों लगाए पेड़ के भी हालचाल लिए।

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