तुरुप के इक्कों पर टिकी लोकसभा में जीत की बाजी, भाजपा-कांग्रेस ने खेले सबसे बड़े सियासी पत्ते

तुरुप के इक्कों पर टिकी लोकसभा में जीत की बाजी, भाजपा-कांग्रेस ने खेले सबसे बड़े सियासी पत्ते

- जीत का सिक्का जमाने तुरुप का इक्का
- मुश्किल सीटों पर दिग्ग्जों के सहारे जीत

 

 

By: Arun Tiwari

Updated: 10 Apr 2019, 08:11 AM IST

भोपाल : लोकसभा चुनाव की बाजी जीतने के लिए कांग्रेस और भाजपा ने तुरुप के इक्के चल दिए हैं। अधिकांश सीटों में नए चेहरों पर दांव जरुर लगाया है लेकिन मुश्किल बाजी के लिए तुरुप के पत्ते से ही जीत की उम्मीद है।

कांग्रेस ने अब तक २२ उम्मीदवार घोषित किए हैं जिनमें से सात वे दिग्गज हैं जो हारी बाजी जीतने की आस पैदा करते हैं। वहीं भाजपा के बीस उम्मीदवारों में से सात नेता वे हैं जिनका सालों से राजनीति में सिक्का चल रहा है। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के लोकप्रिय और जनाधार वाले नेता माने जाते हैं। दोनों राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बने इस चुनाव में दिग्गजों के सहारे मुश्किल को आसन करने का तरीका निकाला गया है।

ये हैं कांग्रेस के तुरुप :

- दिग्विजय सिंह : भोपाल से उम्मीदवार दिग्विजय सिंह दस साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनको कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस का सबसे लोकप्रिय नेता माना जाता है। कांग्रेस पिछले तीस सालों से भोपाल में जीत को तरस रही है। जीत का सूखा खत्म करने के लिए ही दिग्विजय को भोपाल से उतारा है।

- विवेक तन्खा : जबलपुर से उम्मीदवार विवेक तन्खा राज्यसभा से सदस्य हैं। अभी उनका कार्यकाल दो साल से ज्यादा बाकी है लेकिन कांग्रेस को यहां भी जीत की दरकार है। इस सीट पर कांग्रेस का वनवास खत्म करने के लिए पार्टी के पास तन्खा से बड़ा कोई विकल्प नहीं था। ना ना करते आखिर तन्खा को सहमति देनी ही पड़ी।

- अजय सिंह : अजय सिंह भले ही चुरहट से विधानसभा चुनाव हार गए हों लेकिन आज भी विंध्य में वे कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा हैं। विंध्य की राजनीति पर मजबूत पकड़ के कारण ही कांग्रेस ने उनको सीधी से उम्मीदवार बनाया है। अजय सिंह ही सीधी पर कांग्रेस की टेढ़ी चाल को सीधा कर सकते हैं।

- कांतिलाल भूरिया : रतलाम में भले ही २०१४ में कांतिलाल भूरिया को झटका लगा हो लेकिन उसको उन्होंने सुधार भी लिया। भूरिया कांग्रेस के सबसे बड़े आदिवासी नेता माने जाते हैं। भूरिया के अलावा कांग्रेस रतलाम सीट पर किसी और पर भरोसा नहीं कर सकती।

- नकुलनाथ : छिंदवाड़ा से पहला चुनाव लड़ रहे नकुलनाथ की गिनती भी कांग्रेस के दिग्गजों में की जा रही है। दरअसल ये सीट उनके पिता कमलनाथ की है जो अब मुख्यमंत्री बन चुके हैं। कमलनाथ इस सीट से ९ बार सांसद रहे हैं। ये सीट उनकी प्रतिष्ठा का सवाल है।

रामनिवास रावत : मुरैना से उम्मीदवार रामनिवास रावत विजयपुर से विधानसभा के पांच चुनाव जीत चुके हैं हालांकि इस बार उनको हार मिली है। मुरैना में भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर को कांग्रेस की ओर से रावत ही टक्कर देने में सक्षम हैं।

अरुण यादव : पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री अरुण यादव का गृह क्षेत्र खंडवा है। वे यहां से सांसद रह चुके हैं। उनके पिता सुभाष यादव का इस क्षेत्र में बड़ा नाम रहा है, भाई सचिन प्रदेश में कृषि मंत्री है।

ये हैं भाजपा के इक्के :

- राकेश सिंह : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह लगातार तीन बार से जबलपुर से सांसद हैं। उनके वर्चस्व को तोडऩा कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

नरेंद्र सिंह तोमर : पिछली बार ग्वालियरसे चुनाव जीते केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इस बार मुरैना से उम्मीदवार हैं। तोमर का लंबा चुनावी अनुभव है, वे प्रदेश में मंत्री भी रहे हैं और दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहते सरकार भी बनाई है। तोमर राज्यसभा से भी सांसद रह चुके हैं।

वीरेंद्र खटीक : टीकमगढ़ से केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक को भाजपा ने जीत के भरोसे पर ही फिर से मौका दिया है। खटीक बुंदेलखंड के बड़े नेता माने जाते हैं। वे लगातार इस सीट से जीत रहे हैं।

नंदकुमार सिंह चौहान : खंडवा से उम्मीदवार नंदकुमार सिंह चौहान पांच बार यहां से सांसद रह चुके हैं। राकेश सिंह से पहले वे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रहे हैं।

प्रहलाद पटेल : दमोह से भाजपा ने एक बार फिर प्रहलाद पटेल को उतारा है। प्रहलाद पटेल भाजपा के बड़े लोधी नेता माने जाते हैं, उन्हें इस वर्ग में पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती का विकल्प भी माना जाता है।

फग्गन सिंह कुलस्ते : मंडला उम्मीदवार फग्गन सिंह कुलस्ते भाजपा का सबसे बड़ा आदिवासी चेहरा हैं। वे मंडला से लगातार जीतते रहे हैँ। वे केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। कमजोर परफॉर्मेंस के बाद भी पार्टी को अपने इस पत्ते पर ही भरोसा है।

गणेश सिंह : सतना से लगातार तीन बार के सांसद गणेश सिंह को चुनौती देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के अजय सिंह को शिकस्त दी थी। एक बार फिर पार्टी को उनसे जीत की उम्मीद है।

Arun Tiwari Reporting
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