विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के लिए अलग होंगे स्वेच्छानुदान निधि नियम

मंत्रियों के लिए बने नियमों से ही चलाया जा रहा है काम, तैयार हो रहा है नया ड्राफ्ट

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष के लिए स्वेच्छानुदान निधि के लिए अलग से नियम बनेंगे। नए नियमों को लेकर सरकार में मंथन श्ुारू हो गया है। बजट सत्र तक ड्राफ्ट तैयार होने के साथ नए नियमों को मंजूरी मिलने की संभावना है।

मंत्रियों के लिए निर्धारित स्वेच्छानुदान निधि के नियम ही विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष के लिए लागू होते हैं। इन्हीं नियमों के तहत ये क्षेत्र में विकास कार्य सहित अन्य कार्यों के लिए राशि देते हैं। संविधान में विधानसभा अध्यक्ष का ओहदा मंत्रियों से बड़ा होता है, इसलिए विधानसभा सचिवालय चाहता है कि विधानसभा अध्यक्ष के लिए स्वेच्छानुदान नियम भी अलग होना चाहिए। इसी के तहत विधानसभा सचिवालय ने संसदीय कार्य विभाग को नए नियमों का प्रस्ताव भेजा था। इसमें विधानसभा उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया।

विधानसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को संसदीय कार्य विभाग ने देखने के बाद कुछ बिन्दुओं सुधार और संशोधन के लिए वापस सचिवालय को भेज दिया है। असल में संसदीय कार्य विभाग चाहता है कि नियम स्पष्ट हों, जिससे राशि आवंटित करने को लेकर किसी भी प्रकार अड़चन न आए।

स्वेच्छानुदान निधि में भी होना है इजाफा -

विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष की स्वेच्छानुदान निधि भी बढ़ाई जाना है। इसके लिए विधानसभा सचिवालय ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है, जबकि वित्त विभाग दो करोड़ रुपए की स्वेच्छानुदान निधि के लिए तैयार है। विधानसभा उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के लिए एक-एक करोड़ की स्वेच्छानुदान निधि का प्रस्ताव है। संसदीय कार्य विभाग यह प्रस्ताव कैबिनेट में पेश करेगा। कैबिनेट निर्णय के बाद इसे लागू किया जाएगा। मालूम हो कैबिनेट मंत्रियों की स्वेच्छानुदान निधि 50 लाख से बढ़कर एक करोड़ रुपए और राज्य मंत्रियों की 35 लाख के स्थान से 65 लाख रुपए हो चुकी है।

दीपेश अवस्थी
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