इस लोकसभा चुनाव में होने जा रहा है ये खास, परिणामों की घोषणा पर ये पड़ेगा प्रभाव...

इस लोकसभा चुनाव में होने जा रहा है ये खास, परिणामों की घोषणा पर ये पड़ेगा प्रभाव...

Deepesh Tiwari | Updated: 08 May 2019, 02:33:49 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

परिणाम आने में और देरी हो सकती ?

भोपाल। लोकसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं और इससे पहले ही आयोग की ओर से चुनाव परिणाम के लिए 23 मई की तिथि भी घोषित कर दी गई है।


लेकिन लोकसभा चुनाव में पहली बार इवीएम से जुड़ी वीवीपैट की पर्चियों का मिलान भी किया जाना है। ऐसे में राजधानी भोपाल सहित कई जिलों व देश के कई शहरों के लोगो में रिजल्ट के 23 मई को आने पर संदेह बना हुआ है।

दरअसल कुछ लोगों का मानना है कि यदि इवीएम की गिनती के बाद वीवीपैट की पर्चियों की भी गिनती की जाएगी, तो परिणाम आने में और देरी हो सकती है।

ऐसे होगी गिनती...
दरअसल वीवीपैट पर्चियों के औचक मिलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों साफ किया कि मिलान का काम हर विधानसभा क्षेत्र में केवल पांच मतदान केंद्रों पर ही होगा। मतलब जब 23 मई को लोकसभा चुनाव में मतों की गणना होगी तो देश के 10.35 लाख मतदान केंद्रों में से केवल 20,600 केंद्रों पर ही यह गिनती होगी।


ये पड़ेगा असर...
अब तक पर्ची मिलाने का काम प्रति विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र के लिए लॉटरी प्रणाली के माध्यम से चयनित केंद्र के लिए होता था। हालांकि, वीवीपैट मशीनें सभी मतदान केंद्रों पर लगाई गई है।

चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार परिणामों की घोषणा पर इस प्रक्रिया का कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा, 'प्रत्याशी को ईवीएम से गणना के बाद परिणाम का पता चल जाएगा, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा में दो से तीन घंटे की देरी हो सकती है।'

उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग औचक मिलान के लिए पांच भिन्न टीमों को काम सौंपता है तो परिणामों का ऐलान करने में देरी नहीं होगी। लेकिन अगर संख्या पांच टीमों से कम हैं तो प्रत्येक स्टेशन पर लगने वाले समय के अनुपात में ही देरी होगी। भारत में 4120 विधानसभा सीटें हैं और अगर इनमें पांच से गुणा कर दिया जाए तो पर्ची का मिलान 20,600 मतदान केंद्रों पर होगा।

 

वीवीपैट मशीन क्या है: ज्ञात हो वीवीपैट मशीन एक ऐसा उपकरण है जिससे मतदान करने पर एक पर्ची निकलती है और उसमें वह चुनाव चिह्न अंकित होता है जिसे एक व्यक्ति ने वोट देने के लिए चुना होता है। यह पर्ची सात सेंकड के भीतर निकलती है और एक डिब्बे में गिर जाती है यानि कुल मिलाकर इसे मतदाता घर नहीं ले जा सकता।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 21 विपक्षी पार्टियों के नेताओं की उस याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत के आठ अप्रैल के उस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।

जिसके तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक से बढ़ाकर पांच मतदान केन्द्रों पर ईवीएम में पड़े मतों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान करने का आदेश दिया गया था, यह याचिका आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में विपक्ष के नेताओं ने दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम में पड़े मतों से वीवीपैट पर्चियों के औचक मिलान का काम 5 मतदान केंद्र तक किया था, लेकिन अब वे मांग कर रहे हैं कि इसे कम से कम 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए।

ईवीएम में पड़े मतों और वीवीपैट पर्चियों के मिलान का काम कई विधानसभा चुनावों में किया जा चुका है, पर लोकसभा चुनावों में यह काम पहली बार किया जाएगा।

वहीं सूत्रों से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या 800 से ढाई हजार तक हो सकती है। चूंकि चंडीगढ़, दमन व दीव, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार, दादरा व नगर हवेली में कोई विधानसभा नहीं है। इसलिए पांच मतदान केंद्रों का चयन औचक होगा इसका मतलब यह हुआ कि 25 मतदान केंद्र और अतिरिक्त जुड़ जाएंगे।

चुनाव आयोग ने 2014 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा था कि पर्यवेक्षक और पीठासीन अधिकारी सबकुछ जांचने के बाद प्रत्येक चक्र की गणना के बाद उम्मीदवार परिणामों पर हस्ताक्षर करेंगे।

आयोग ने इस बार देश भर में 10.35 लाख मतदान केंद्र बनाए हैं, जबकि 2014 में इनकी संख्या 9.28 लाख थी यानी इस बार इनकी संख्या में 10.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। करीब 39.6 लाख ईवीएम मशीनें और 17.4 लाख वीवीपैट मशीनों का इन मतदान केंद्रों में इस्तेमाल हुआ है।

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