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BJP Politics- दिल्ली दरबार पर टिकी हैं महापौर के टिकट की निगाहें

- भोपाल-इंदौर का फैसला दिखाएगा दिग्गजों की सियासत पर असर

भोपाल

Published: June 14, 2022 12:13:20 pm

भोपाल। मध्यप्रदेश के 16 नगर निगमों में से भाजपा के लिए महापौर के टिकट का फैसला इंदौर-भोपाल को लेकर ज्यादा मुश्किल हो गया है। इसी कारण दिल्ली से इनका फैसला कराने का रास्ता अपनाया गया है। वजह ये कि दोनों शहरों के समीकरण राज्य की राजनीति को प्रभावित करेंगे।

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इसी के चलते सोमवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान भोपाल से दिल्ली तक गए। वहां रुके और बैठक भी की, लेकिन फिलहाल दोनों शहरों के टिकट को लेकर मंथन जारी है। कई नए नाम भी इस दौरान चर्चा में आए हैं, लेकिन अभी बात नहीं बनी है। वहीं दूसरी ओर ग्वालियर को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसका कारण केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व ज्योतिरादित्य सिंधिया को माना जा रहा है। जबकि यहां से महापौर के लिए पूर्व पार्षद और एमआइसी मेंबर गौरी परमार ने रसीद कटाई है।

दरअसल, भोपाल और इंदौर के समीकरण इसलिए ज्यादा उलझे हैं, क्योंकि यहां महापौर सीटों के फैसले विधानसभा चुनाव 2023 और उसके बाद तक दिग्गजों की सियासत पर असर डालेंगे। इसमें इंदौर के गुणा-भाग महापौर के टिकट से उलट-पुलट हो जाएंगे।

भोपाल में कृष्णा गौर को टिकट का फैसला भी सियासी तौर पर उनका कॅरियर प्रभावित करेगा। वहीं, इंदौर में रमेश मेंदोला को महापौर का टिकट देना पार्टी के लिए मुश्किल भरा है, क्योंकि उनके नाम को लेकर सत्ता-संगठन के ही कई नेता पक्ष में नहीं हैं।

ऐसे समझें इंदौर को:
: यहां से विधायक रमेश मेंदोला मजबूत चेहरा हैं, लेकिन उन्हें टिकट मिलता है तो सियासत के बड़े समीकरण उलट-पुलट हो जाएंगे। ये राज्य की राजनीति को प्रभावित करेंगे।

: वजह ये कि मेंदोला के महापौर बनने का सियासी मतलब भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का सीधे तौर पर इंदौर में पॉवरफुल होना है। यह शिवराज खेमे-सिंधिया खेमे के लिए मुसीबत भरा हो सकता है।

: अभी इंदौर की सियासत ताई और भाई यानी सुमित्रा महाजन व विजयवर्गीय के बीच टक्कर में उलझी रही है।

: सत्ता परिवर्तन हुआ तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और सीएम शिवराज सिंह चौहान के खेमे का समर्थन पाकर मंत्री तुलसी सिलावट इंदौर में पॉवरफुल हो गए।

माफिया से संबंध
मेंदोला के भूमाफियाओं से संबंध माने जाते हैं। उनके साथ तस्वीरें सामने आई हैं। चूंकि महापौर शहर का प्रथम नागरिक होता है, ऐसे में पूरे शहर में मेंदोला की स्वीकारोक्ति भी नहीं हैं।

ऐसे समझें भोपाल को:
यहां संगठन विधायक कृष्णा गौर को मजबूत मान रहा है। उन्हें लेकर पेंच ये है कि वे अभी गोविंदपुरा सीट से विधायक हैं। जो उनकी पारिवारिक परंपरागत सीट है।

यदि कृष्णा महापौर का चुनाव नहीं लड़ती हैं तो 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मंत्री पद की दावेदार हो जाएंगी। ऐसे में उनका सरकार में दीर्घकालीन राजनीति का मौका रहेगा।

यदि वे महापौर का चुनाव लड़ती हैं तो जीत की स्थिति में 5 साल मिलेंगे, पर गोविंदपुरा सीट छीनने का खतरा है।

गोविंदपुरा सीट यदि किसी अन्य उम्मीदवार को 2023 में दी जाती है तो उसके बाद कृष्णा की इस सीट पर वापसी दुष्कर हो जाएगी। इस कारण कृष्णा ने चुनाव से अनिच्छा जताई है।

मायने क्या...
कृष्णा गौर के चयन से दूसरा बड़ा समीकरण ये है कि इंदौर में भी विधायक रमेश मेंदोला को टिकट देने की स्थिति बनती है। इससे इंदौर के समीकरण प्रभावित होंगे।

फॉर्मूला यह भी...विधायकी बरकरारतो विधायकों की हां
सूत्र बताते हैं भोपाल-इंदौर को लेकर विधायक कृष्णा गौर व रमेश मेंदोला ने कहा है कि प्रारंभिक रूप से उन्हें चुनाव नहीं लड़ना, लेकिन संगठन का फैसला माना जाएगा। यदि उनकी विधायकी आगे बरकरार रही तो महापौर पद का चुनाव लड़ने को तैयार हैं। दोनों की बीते रविवार को दिल्ली भी बात कराई गई, पर वहां से संगठन स्तर पर विधायकी पर जवाब नहीं दिया गया।

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