वॉटर ऑडिट : महज 6 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तक 15 साल में भाजपा सरकार ने पहुंचाया पानी

वॉटर ऑडिट : महज 6 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तक 15 साल में  भाजपा सरकार ने पहुंचाया पानी

Deepesh Tiwari | Publish: Jun, 17 2019 08:23:36 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

- पानी पर अरबों रुपए की बारिश, फिर भी प्यासा रह गया प्रदेश

भोपाल@जितेन्द्र चौरसिया की रिपोर्ट...

प्रदेश में वॉटर ऑडिट कराने की तैयारी में जुटी कमलनाथ सरकार पिछली भाजपा सरकार के पानी पर खर्च और इंतजामों की प्रारंभिक रिपोर्ट देखकर भौंचक्की रह गई है। पिछली शिवराज सरकार 15 साल में महज छह फीसदी ग्रामीण आबादी को ही पेयजल मुहैया करा सकी। जबकि, इस दौरान औसत 35 हजार करोड़ रुपए गांवों में पानी पर खर्च किए गए।

दरअसल, सरकारी रेकॉर्ड के हिसाब से वर्तमान में 12 फीसदी ग्रामीण आबादी को ही पेयजल उपलब्ध हो पाया है। इसमें से छह फीसदी 2003 के पहले कांग्रेस सरकार के समय की आपूर्ति है।

इस हिसाब से 2003 से 2018 तक सिर्फ छह फीसदी अतिरिक्त ग्रामीण आबादी को पानी पहुंचाया जा सका। जबकि, इस दौरान दो हजार से ढाई हजार करोड़ रुपए सालाना पानी की योजनाओं पर खर्च किए गए।

facts

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पानी की समीक्षा के दौरान पिछली सरकार का ट्रैक रेकॉर्ड निकलवाया तो यह तथ्य पाए गए हैं। अब देखा जाएगा कि पिछली परियोजनाओं में कितनी राशि सही तरीके से खर्च की गई। सरकार ने अगले पांच साल में 50 फीसदी ग्रामीण आबादी तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।


जिस तालाब में मवेशी नहाते, उसका पानी पीते हैं लोग
द मोह जिला मुख्यालय से करीब 48 किलोमीटर दूर दहागांव के जिस तालाब में मवेशी नहाते हैं, ग्रामीण उसी का पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। 800 की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर गोंड जनजाति के लोग रहते हैं।

गांव के सभी छह हैंडपंप सूख चुके हैं। कमोबेश इस पूरे इलाके में हालात ऐसे ही हैं। दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में करीब 100 से अधिक गांव पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इस इलाके में लोगों को 2-3 किमी दूर जाकर एक बाल्टी पानी मिल पाता है।

परिवहन में घोटाला
सरकार ने गर्मी में पानी के परिवहन की स्थिति जांची तो पिछले सालों के रेकॉर्ड देखकर चकित रह गई। इस बार जिलों से जो डिमांड आई वो पिछले साल की तुलना में बेहद कम है।

दस्तावेज की पड़ताल की गई तो पिछली बार 70 करोड़ का पानी का परिवहन संदिग्ध मिला है। वर्ष-2017-18 में 136 निकायों में टैंकरों से पानी भेजा गया, जबकि 2018-19 में 120 निकायों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति हुई।

जबकि, इन दोनों सालों से ज्यादा जलसंकट इस साल है, लेकिन गर्मी खत्म होने की स्थिति आने तक महज 32 निकायों में पानी का परिवहन हुआ है। नगरीय प्रशासन विभाग ने पाया है कि पिछले दो सालों में ऐसे कई निकायों में टैंकरों से आपूर्ति की गई, जहां पेयजल उपलब्धता थी। इसका हिसाब करना चाहा गया तो भी पूरे रेकॉर्ड नहीं मिले।

7 साल, 700 गांव
जल निगम 2012 में बना था। सात साल में निगम ने 700 गांवों तक पानी पहुंचाया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। औसत काम की स्थिति में भी यह संख्या चार गुना से ज्यादा होनी चाहिए थी।

प्रदेश की बनेगी कुंडली
सरकार वॉटर ऑडिट के तहत जल स्त्रोतों की कुंडली बनाएगी। कौन सा जल स्त्रोत कब बना, कितना खर्च रहा, अभी की स्थिति, क्षमता आदि देखी जाएगी। ऐसे मामलों पर जांच बैठाई जाएगी, जिनमें भारी खर्च के बावजूद स्थिति खराब है।

ये है 15 साल का ट्रेक रेकॉर्ड


शहरों में ऐसे हाल-
197 निकायों में ही पेयजल योजना पूरी
181 निकायों में पेयजल योजना अधूरी
150 करोड़ से ज्यादा पानी परिवहन पर खर्च
378 नगरीय निकाय हैं प्रदेश में

 

गांवों में ऐसे हाल
15787 नल-जल योजनाएं गांवों में
1450 नल-जल योजनाएं पूर्णत: बंद
600 योजनाएं भू-जलस्तर गिरने से बंद
166 योजनाएं लाइन क्षतिग्रस्त होने से बंद
327योजनाएं जीर्ण-शीर्ण होने से बंद
596 योजनाएं जल स्त्रोत फेल होने से बंद

 

आपूर्ति की स्थिति अभी

96 निकायों में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति
62 निकायों में दो दिन छोड़कर जलापूर्ति
38 निकायों में 3 दिन छोड़कर जलापूर्ति

 

पानी की स्थिति जांची तो पाया है कि पिछली भाजपा सरकार 15 साल में केवल छह फीसदी ग्रामीण आबादी तक पानी पहुंचा सकी। भाजपा के समय पानी पर केवल भ्रष्टाचार हुआ। खूब झूठ बोला गया। हम गड़बडिय़ों की जांच कराएंगे।
- सुखदेव पांसे, मंत्री, पीएचई

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