ALERT: जमुनिया-बैरागढ़ कलां तक सिमटा तालाब, FTL से 5 किमी पीछे हुआ पानी

ALERT: जमुनिया-बैरागढ़ कलां तक सिमटा तालाब, FTL से 5 किमी पीछे हुआ पानी

KRISHNAKANT SHUKLA | Publish: May, 18 2019 10:11:48 AM (IST) | Updated: May, 18 2019 10:44:48 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

देश-दुनिया की एजेंसियों को भोपाल की पहचान बड़े ताल की फिक्र, शासन को नहीं

देवेंद्र शर्मा, भोपाल. शहर की ‘जीवन रेखा’ बड़ा तालाब को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। सैटेलाइट से तस्वीरें ली गईं। इसके बाद हुए अध्ययन में पाया कि खजूरी सडक़ के लाखापुर से जमोनिया छीर- बैरागढ़ कलां तक तालाब के किनारों से पानी पांच किमी अंदर तक सिमट गया है। अर्बन एक्सपर्ट प्रखर राठी ने इसरो के भुवन व गूगल अर्थ से ये सैटेलाइट इमेज निकालीं थीं।

गौरतलब है कि भोपाल के ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा ये हिस्सा दलदली है। यहां एफटीएल के भीतर सघन वन विकसित हो गया है। भोज वेटलैंड में इस भूमि में पौधरोपण किया गया था। भले ही एफटीएल के भीतर सघन वन विकसित हो गया है, लेकिन प्रोजेक्ट में एफटीएल से 50 मीटर दायरे में सघन वन विकसित करने का दावा अब तक पूरा नहीं हो सका है।

1984 में खानूगांव का 80% क्षेत्र था पानी में

अप्रैल 2017 में इंदौर की फ्रेंड्स एसोसिएशन ने नगर निगम के लिए सैटेलाइट इमेज के आधार पर नक्शे बनाए थे। इस दरमियान पाया कि 1984 में बड़ा तालाब के भीतर खानूगांव का पूरा क्षेत्र शामिल था। आसपास लबालब पानी हुआ करता था। अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण पानी पीछे सरक गया।

अब निगम को करवाना चाहिए सर्वे

नदी- जल संरक्षण को लेकर काम करने वाले केएस तिवारी का कहना है कि एफटीएल अभी 31 वर्ग किमी बताया जा रहा है। ये आंकड़ा 1964 में हुए सर्वे के आधार पर है। इसके बाद परिस्थितियां काफी बदली हैं। निगम को एफटीएल का नया सर्वे कराना चाहिए, इसमें तालाब का एफटीएल काफी कम मिलेगा।

उनका कहना है कि जिस तरह कोहेफिजा, खानूगांव से लेकर वीआइपी रोड, लालघाटी, हलालपुरा, बैरागढ़, सीहोर नाका से आगे तक ग्रामीण अंचलों और भदभदा, नेहरू नगर में तालाब किनारे निर्माण हुए हैं। इसे दबाया गया है, उससे तालाब अभी बमुश्किल 22 से 23 वर्ग किमी तक ही सिमट गया है। ये शहर की पारिस्थितिकी के लिए घातक है।

तालाब पर एक नजर

  • 3869.316 हैक्टेयर है बड़ा तालाब का फुल टैंक लेवल
  • 86.187 किमी है
  • तालाब की एफटीएल
  • ट्रेवर्स (गोलाई में दूरी)
  • 3072 हैक्टेयर है
  • रामसर साइट एरिया
    नोट- नगर निगम के लिए कंसल्टिंग एजेंसी द्वारा तैयार नक्शे के अनुसार।

ये हो रहा नुकसान

  • तालाब से जलापूर्ति वाले क्षेत्रों पर असर, उनके लिए पानी कम जमा होगा, वह भी प्रदूषित रहेगा
  • शहर के वातावरण के साथ ही पहचान के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। संस्कृति का हिस्सा है तालाब
  • सबसे बड़ी मानव निर्मित जल संरचना का तमगा हमसे छिन सकता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी
  • जलीय जीव-जंतुओं और वनस्पति के साथ तालाब पर निर्भर रहने वाले परिवार प्रभावित होंगे
  • तालाब का दायरा सिकुडऩे से पर्यटन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा

अतिक्रमण बढ़ा है

बड़ा तालाब हमारी पहचान है। ये सही है कि अतिक्रमण बढ़ रहा है। तालाब को बचाने की बहुत जरूरत है। हम तालाब की सीमा को समाप्त नहीं होने देंगे। इसे लेकर गंभीर हैं। नए तथ्यों को भी दिखवाया जाएगा।
आलोक शर्मा, महापौर

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