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अजब- बीमारी: अंबानी का घर खरीदने के आते हैं ख्याल, तेजी से बढ़ रहा खतरनाक बीमारी का प्रकोप

जानिए कहीं आपमें तो नहीं हैं ऐसे लक्षण

 

भोपाल

Published: December 31, 2021 10:06:59 am

भोपाल. कोई खुद को राजा के जैसा समझ रहे हैं तो किसी को अंबानी का घर खरीदने के ख्याल आ रहे हैं. और तो और कोई आत्महत्या करने की भी सोचने लगा है. ऐसे सभी लक्षण एक खतरनाक बीमारी की ओर इंगित कर रहे हैं जोकि बदले मौसम के कारण हो रही है. सबसे बुरी बात तो यह है कि इस खतरनाक बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है.

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मौसम में लगातार बदलाव हो रहे हैं। दिन और रात का तापमान लगभग समान है। मौसम में अचानक हुआ यह बदलाव लोगों को शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी बीमार कर रहा है। पारे का यह मूड लोगों में अवसाद, चिड़चिड़ापन यहां तक की आत्महत्या के लिए भी उकसा रहा है। दरअसल, अचानक ठंडक बढऩे से सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर ‘मेनिया’ से मामले बढऩे लगे हैं।

चिकित्सकों के मुताबिक मौसम में अचानक बदलाव होने से लोगों की मानसिक स्थितियां तेजी से बदलती हैं, जिससे डिप्रेशन के आसार बढ़ जाते हैं। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि अस्पतालों की ओपीडी में हर रोज छह से आठ मरीज सिर्फ मेनिया के पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये संख्या और ज्यादा हो सकती है लेकिन अब भी लोग इन लक्षणों को गंभीर या बीमारी नहीं मानते, इसलिए डॉक्टर से नहीं मिलते।

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मनोचिकित्सक डॉक्टर अवंतिका वर्मा का कहना है कि हमारे दिमाग में मौजूद रासायनिक तत्व सिरोटोनिन व नोरेपीनेफ्रनीन मौसम के अचानक बदलाव के साथ गड़बड़ होने लगते हैं। इस बदलाव से पीनियल ग्रंथी से निर्मित मेलाटोनिन हार्मोन कम ज्यादा होने लगता है। यही उतार चढ़ाव मूड डिसऑर्डर का कारण बनती है। गर्मी की तुलना में सर्दी में इसके मामले ज्यादा हैं। ऐसे लोगों को डिप्रेशन और अन्य दिक्कतें होने लगती हैं, जिसे मेनिया कहते हैं।

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि इस स्थिति को सीजनल डिफेक्टिव डिसआर्डर कहते हैं। यह गर्मियों, बरसात और सर्दियों में हुए अचानक बदलाव के बाद दिखाई देते हैं। अचानक पारा गिरने से लोगों में डिप्रेशन और मेनिया जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इसमें विचारों व व्यवहार में स्वयं का नियंत्रण कम हो जाता है जिससे उसकी इच्छा हर किसी से बात करने की व डींगे हांकने की होती है। कई बार ऐसे रोगी खुद को अमिताभ बच्चन या प्रधानमंत्री तक समझने लगते हैं।

आत्महत्या करने के विचार आने लगते हैं या मुकेश अंबानी जैसे रईसों का महल जैसा घर खरीदने जैसी इच्छाएं होने लगती है. समय पर इलाज ना होने पर स्थिति मारपीट, हिंसा, घर से भागने से लेकर आत्महत्या जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

वहीं अस्पतालों में मेनिया के अलावा बुखार, वायरल, गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या भी बढऩे लगी है। हमीदिया और जेपी अस्पताल में आने वाले मरीजों में 60 फीसदी रोगी मौसम से पीडि़त पहुंच रहे हैं।

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