युवा किसानों ने घेरा तो क्या बोले प्रमुख सचिव, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

- 70 हजार की मशीन को 7 लाख में बेचने का दबाव, उद्यमी किसानों ने मंत्रालय में किया हंगामा, लगाए कमीशनबाजी के आरोप

भोपाल. प्रदेश में नए कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने पर ग्रेड सेपरेटर व डि-स्टोनर खरीदने का दबाव बनाने के खिलाफ युवा उद्यमी किसानों ने सोमवार को मंत्रालय में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी को घेर लिया। बड़ी संख्या में ये उद्यमी किसान मंत्रालय पहुंचे और केसरी के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। केसरी बाहर आए, तो नाराजगी के साथ उद्यमी किसानों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। युवा उद्यमी किसानों का कहना था कि उन पर एक ही कंपनी से ग्रेड सेपरेटर खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। बाजार में ग्रेड सेपरेटर 70 हजार रुपए में मिल रहा है, जबकि विभाग केएमपीसी कंपनी से 7 लाख रुपए में खरीदने के लिए दबाव बना रहा है। युवा उद्यमी किसानों ने पीएस को जमकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि उनके लिए यह अनिवार्य ही नहीं होना चाहिए। क्योंकि, उनके स्तर पर उसकी जरूरत नहीं है।
प्रमुख सचिव अजीत केसरी ने मंत्री सचिन यादव से बात करने का हवाला दिया, लेकिन उद्यमी किसान अड़ गए कि अभी ही ग्रेड सेपरेटर को ऐच्छिक करने के आदेश पर हस्ताक्षर करें। केसरी ने कहा कि सेपरेटर खरीदना अनिवार्य नहीं है, यह एच्छिक है। जो नहीं लेना चाहता वह आवेदन देकर इससे छूट ले सकता है। प्रदेश भर से पहुंचे किसान युवा उद्यमियों ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी केएमपीसी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल खेल रहे हैं। इसमें कमीशनबाजी हो रही है और बाद में कहा जाता है कि किसान सब्सिडी का पैसा खा गया। केसरी ने कहा कि जाकर मंत्री के यहां बैठ जाईये, तो किसानों ने कहा कि हम वहां हो आए। आपके यहां ही बैठेंगे। युवा उद्यमियों ने कहा कि इस मशीन को खरीदीने में ही हमारी सब्सिडी चली जाएगी। काफी हंगामा मचाने के बाद केसरी के आश्वासन के बाद युवा शांत हुए।

- ये है मामला
कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 255 उद्यमी किसानों का आवेदन के आधार पर चयन हुआ है। इन उद्यमियों के मुताबिक इस मशीन को खरीदने की शर्त बाद में जोड़ी गई। आवेदन के समय यह शर्त नहीं थी। दरअसल, केंद्र सरकार कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए सामान्य व अपिव को 40 फीसदी व अजजा-जजा को 50 फीसदी अनुदान देती है। यह दस लाख रुपए होता है, लेकिन 7 लाख रुपए की इस मशीन को खरीदने पर आधी से ज्यादा सब्सिडी इसी में चली जाएगी। कमीशनबाजी के लिए यह मशीन खरीदना अनिवार्य किया गया है। इस मशीन को बेचने वाली कंपनी का कोई प्रतिस्पर्धी ही बाजार में नहीं है। इसी कारण इससे मशीन खरीदने के लिए कहा गया है। इस सब्सिडी से ही मशीन खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

- हमने पूरी जानकारी बुलवाई है
कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी ने बताया कि हमने कृषि संचालक इंजीनियरिंग से जानकारी बुलवाई है। उन्होंने कैसे एक ही कंपनी को ग्रेड सेपरेटर सहित अन्य मशीन खरीदने के लिए अधिकृत किया। हमने ये भी पूछा है कि मशीनों के रेट किस आधार पर तय किए गए हैं। कस्टमर केयर सेंटर के लिए ये मशीने खरीदना एच्छिक किया गया है। आवेदक जिला स्तर पर आवेदन देकर इससे छूट ले सकते हैं।

anil chaudhary
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