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भोपाल

बच्चे युवावस्था में आ जाए तो उन्हे जिम्मेदारी सौप दो, नई और पुरानी पीढ़ी में समन्वय जरूरी

शंका समाधान कार्यक्रम में जैन मुनि प्रमाण सागर ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का किया समाधान

भोपालJun 24, 2024 / 12:14 pm

प्रवीण सावरकर

टीटी नगर जैन मंदिर में दो जैन मुनियों का महामिलन, शंका समाधान कार्यक्रम में जैन मुनि प्रमाण सागर ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का किया समाधान

पितृ दिवस पर अपने जीवन में उतारे ये बाते-

अपनी सेवा से माता पिता को हमेशा प्रसन्न रखे
– जो भी कार्य कर रहे उसका श्रेय अपने माता पिता को दे

– माता पिता के यश, प्रतिष्ठा को बढ़ाए

– माता पिता की आध्यात्मिक उन्नति में सहायक बने

– जैसे भगवान को प्रणाम करते हैं वैसे माता पिता को प्रणाम करे
भोपाल. जैन मुनि प्रमाण सागर इन दिनों राजधानी के टीटी नगर टीन शेड जैन मंदिर में विराजमान है। मुनिश्री के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रविवार को जैन मुनि विनम्र सागर भी टीन शेड जैन मंदिर पहुंचे। इस मौके पर दोनों मुनियों का महामिलन हुआ। अनेक श्रद्धालुओं ने भी मुनि संघ के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इसी प्रकार शाम को मंदिर परिसर में शंका समाधान कार्यक्रम हुआ। इसमें अनेक श्रद्धालुओं की शंका का समाधान जैन मुनि ने किया। पितृ दिवस के मौके पर मुनिश्री ने माता पिता की सेवा का संदेश भी श्रद्धालुओं को दिया।
सवाल- सुशीला जैन ने सवाल किया कि कई सामाजिक कार्यकर्ता युवावस्था से वृद्धावस्था तक कार्य करते हैं, लेकिन नई पीढ़ी नई तकनीक से कार्य करना चाहती है, ऐसे में युवा समाजसेवी और बुजुर्गों के बीच वैचारिक मतभेद हो जाते हैं, इसके लिए क्या होना चाहिए। मार्गदर्शन दे।
जवाब- इसके लिए जरूरी है कि दोनों के बीच समन्वय हो। हमारे घरों में भी जब बच्चे वयस्क होते हैं, तो हमे धीरे-धीरे उन्हें अपनी सारी जिम्मेदारी सौप देनी चाहिए। नई पीढ़ी को अवसर मिलना चाहिए। कई बार लोग 75 की उम्र होने के बाद भी अपनी मर्जी से चलाना चाहते हैं। अधिक से अधिक 65 -70 इसके बाद आत्मसेवा में लगो। नई पीढ़ी को मौका दो, प्रतिभाओं को समझो। कई लोग 25-25 सालों तक अध्यक्ष बने रहते हैं। नवाचार के लिए बदलाव जरूरी है। मंदिर और धर्म के कार्य में बूढ़े रहेंगे तो धर्म बूढ़ा हो जाएगा और जवान आएंगे तो धर्म जवान हो जाएगा।
सवाल- पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि आज के दौर में मर्यादाएं टूट रही है। सामाजिक क्षेत्र में दिखावा ज्यादा हो रहा है, ऐसे वातावरण

जवाब- समाजसेवा में समन्वयात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। दिखावा आजकल बीमारी बन गई, इसका सबसे बड़ा कारण बन गया है सोशल मीडिया। आदमी एक केला किसी को खिलाता है और उसकी पोस्ट बनाकर डालता है। इसके लिए सबसे पहली आवश्यकता है सदसंस्कारों के बीजारोपण की। पुराने समय में लोग समाजसेवा को अपनी पूजा और धर्म मानते थे। इसी दृष्टि से कार्य करने की आवश्यकता है।
सवाल- आशीष कुमार ने सवाल किया कि आजकल का युवा पढ़ा लिखा है लेकिन धर्म, संस्कृति से दूर होता जा रहा है, इसके लिए क्या होना चाहिए?जवाब-बचपन से ही बच्चों के जीवन को यथार्त से भर देना चाहिए। जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है, हम सारी जिंदगी जीवन की सच्चाई को झूठलाने में लगे रहते हैं। बचपन में ही जब जीवन के यथार्त को समझेंगे तो जीवन में भटकाव नहीं आएगा।

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