scriptWho defeated Congress in Vindhya and how did BJP defeat them? | विंध्य में किसने लगाई कांग्रेस की लंका और कैसे बजा भाजपा का डंका | Patrika News

विंध्य में किसने लगाई कांग्रेस की लंका और कैसे बजा भाजपा का डंका

locationभोपालPublished: Dec 09, 2023 09:05:50 pm

- विंध्य के दिग्गज कांग्रेसी अपनी सियासी जमीन बचाने में जुटे रहे तो भाजपा को सरकारी योजनाओं का मिला एकतरफा समर्थन

- विंध्य की जिन 24 सीटों पर महिलाओं ने किया ज्यादा वोट सभी भाजपा के खाते में

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प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मंगलवार को करारी हार की समीक्षा करने के लिए सभी जीते- हारे प्रत्याशियों को भोपाल बुलाया गया लेकिन पूरी समीक्षा बैठक ही ईवीएम के इर्दगिर्द घूमते हुए खत्म हो गई। कलनाथ ये कहकर दिल्ली चले गए कि थोड़े दिनों बाद संभवार हार की समीक्षा की जाएगी। लेकिन उससे पहले पत्रिका ने विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस की करारी हार और भाजपा की एकक्षत्र जीत का विश्लेषण किया कि आखिर विंध्य की 30 सीटों में कांग्रेस को 5 पर क्यों सिमट गई और भाजपा 25 तक कैसे पहुंच गई। पढ़िए पत्रिका की विशेष रिपोर्ट…...

कांग्रेस के दिग्गज हार के डर से घर में सिमट गए

दरअसल जब बड़े नेताओं को ही हार की चिंता सता रही हो तो अन्य सीटों पर नेता कैसे पस्त रहे होंगे इसका अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है। दरअसल विंध्य में कांग्रेस के दो बड़े चेहरे हैं अजय सिंह राहुल और कमलेश्वर पटेल। लेकिन दोनों ही नेता अपने घर में इतना बुरा घिरे थे कि इनका मन कहीं और लगता ही नहीं था। अजय सिंह की बात करें तो साल 2018 के चुनाव में भाजपा के शरदेंदु तिवारी ने इन्हें चुरहट के सियासी मैदान में चारो खाने चित्त कर दिया था। लिहाजा अजय सिंह राहुल से सामने इस बात अपनी सियासी जमीन बचाने की बड़ी चुनौती थी। दरअसल जानकार बताते हैं कि राहुल पिछले चुनाव में खुद को दूसरी सीटों में ज्यादा झोंक दिया था इसलिए खुद की सीट हार गए। लेकिन इस बार राहुल ने ये गलती नहीं की बल्कि खुद की सीट तक खुद को सीमित रखा ताकि प्रतिष्ठा बची रहे और राजनीति चलती रहे। वहीं बात कमलेश्वर पटेल की करें तो कांग्रेस का बड़ा ओबीसी चेहरा और पहले मंत्री भी रहे कमलेश्वर को उनकी सीट पर बसपा ने ऐसा घेरा कि वो सिहावल की सियासी चकल्लस में ही फंस गए और इतना बुरे फंसे की हार का मुंह देखना पड़ा। खैर कुछ लोग बताते हैं कि कमलेश्वर की इस हार से विरोधी के साथ- साथ अपने भी बेहद खुश हैं। कुलमिलाकर जब दिग्गज ही चौतरफा इतना बुरे फंसे हो तो अन्य सीटों का फंसना लाजमी है।

कांग्रेस के दिग्गजों ने विंध्य की इन सीटों पर किया प्रचार

दिग्गज का नाम- सीट

राहुल गांधी- सतना

प्रियंका गांधी- चित्रकूट, रीवा, सिहावल

भाजपा में सिर्फ सरकारी योजनाओं का चला सिक्का

बात विंध्य भाजपा की करें तो प्रचंड जीत के पीछे का कारण सिर्फ सरकार की योजनाएं हैं जिसमें लाडली बहना योजना प्रमुख है। क्योंकि यदि उन 34 सीटों की बात की जाएं जिनमें पुरूषों की अपेक्षाकृत महिलाओं का वोट प्रतिशत ज्यादा है तो उसमें ज्यादा सीटें विंध्य क्षेत्र की ही हैं। खैर जनता ने कई कद्दावरों का आईना भी दिखाया है। लेकिन कुछ लोगों का एक तर्क ये भी है कि रीवा से विधायक राजेंद्र शुक्ला को अंतिम वक्त में मंत्री बना देने से भी काफी कुछ असर हुआ है। लेकिन दूसरी ओर लोगों का ये भी कहना है कि अगर राजेंद्र शुक्ला का इतना ही सियासी वर्चस्व था तो अपने बगल की सीट सेमरिया से अपने खासमखास केपी त्रिपाठी को चुनाव क्यों नहीं जीता पाए। क्योंकि ये बात किसी से छिपी नहीं है कि केपी त्रिपाठी की फंसी हुई टिकट के लिए शुक्ला ने भोपाल तक कैसे लॉबिंग की थी। ऐसे में क्षेत्रीय विशेषज्ञों का बिल्कुल स्पष्ट मत है कि भाजपा के सभी दिग्गजों सतना से गणेश सिंह, सीधी से रीती पाठक और रीवा से राजेंद्र शुक्ला समेत तमाम कद्दावर अपने चुनाव पर फोकस कर रहे थे और सब सरकारी की योजनाओं और मोदी के चेहरे को अपने काम से ज्यादा गिनवा रहे थे जिसका फायदा भाजपा को प्रचंड बहुमत के रूप में मिला है।

भाजपा के दिग्गजों ने यहां किया प्रचार

दिग्गज का नाम- सीट

नरेंद्र मोदी- सीधी, सतना

अमित शाह- रीवा

जेपी नड्डा- त्योंथर, सिरमौर, सेमरिया, रीवा
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महिलाओं की बंपर वोटिंग वाली सीटें बीजेपी के खाते में

प्रदेश की उन 35 सीटों की बात करें जहां पुरूषों की अपेक्षाकृत महिलाओं ने ज्याद वोटिंग की थी। तो उनमें 24 सीटें विंध्य क्षेत्र की ही हैं। और दिलचस्प बात ये है कि वो सभी सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। वहीं सतना जिले में तो और रोचक मामला सामने आया कि वहां कि 7 सीटों में 6 सीटों पर महिलाओं ने ज्यादा वोट किया और वो सीटें भाजपा जीत गई लेकिन सतना शहर की सीट जहां सांसद गणेश सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर थी उस सीट में महिलाओं ने कम वोटिंग की और भाजपा ये सीट हार गई।

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