अफसरों से विधायक क्यों हैं परेशान, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

अफसरों से विधायक क्यों हैं परेशान, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर
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Anil Chaudhary | Updated: 23 Jul 2019, 05:04:18 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

पक्ष-विपक्ष के विधायकों ने गलत जवाब देने के लगाए आरोप

भोपाल. प्रदेश के सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अफसरशाही के जवाबों से परेशान हैं। विधायकों के मुताबिक अफसर गलत जवाब दे रहे हैं। विधायक विधानसभा में मुद्दा भी उठाते हैं कि अफसरों ने गलत जवाब दिए, लेकिन इससे कोई सुधार नहीं हुआ। हाल ये रहा कि गलत जवाबों के कारण विधायक प्रश्नकाल व शून्यकाल में मंत्री को हकीकत बताते हैं, लेकिन पूरा मुद्दा जांच पर आकर टिक जाता है। मंत्री जांच कराने का आश्वासन देते हैं, लेकिन गलत जवाब पर कोई कार्रवाई नहीं होती। पढि़ए, विधायकों के मुताबिक चुनिंदा सवालों के कठघरे में खड़े जवाब...
- कुणाल बोले- अफसर दे रहे गलत जवाब
कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने बैतूल में हुए पौधरोपण घोटाले पर ध्यानाकर्षण लगाया। इसका जवाब वित्त मंत्री तरुण भनोत ने दिया तो कुणाल ने कहा कि अधिकारी लगातार सवालों के गलत जवाब दे रहे हैं। पहले भी कला मंडली के प्रश्न-बी को खत्म कर दिया गया। सीसीटीवी पर पूछे सवाल पर भी अफसरों ने यही किया। प्रबोधन कार्यक्रम में भी अध्यक्ष को यह समस्या बताई थी। इस पर स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा कि इसकी शिकायत प्रश्न एवं संदर्भ समिति से करें।

- अफसरों ने गोल कर दिए अहम जवाब
विधायक सुनील सराफ ने अलीराजपुर की स्वास्थ्य सेवा का ठेका गुजरात के दीपक फाउंडेशन को देने पर भुगतान की राशि पूछी। प्रश्नकाल में सराफ ने कहा कि केवल जोवट की जानकारी दी है। जवाब में दीपक फाउंडेशन को भुगतान ही नहीं बताया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने अफसरों से जवाब लेकर मौखिक तौर पर भुगतान की जानकारी दी। सराफ ने 50 रुपए के स्टाम्प पर अनुबंध होना बताया, लेकिन इसका कोई लिखित या मौखिक जवाब नहीं दिया गया।
- पौधे बांटे नहीं, जवाब में संख्या बताई
विधायक प्रेम सिंह पटेल ने बड़वानी में पौधरोपण पर सवाल पूछा तो वन मंत्री उमंग सिंघार का लिखित जवाब था कि किसानों का 163130 पौधे वितरित किए गए। पटेल ने कहा कि यह गलत जवाब है। पौधे नहीं बांटे गए। किसानों ने बताया कि एक पौधा नहीं मिला। स्थल पर एक भी पौधा नहीं है। इस पर मंत्री को जांच का आश्वासन देना पड़ा।
- अवैध लाइसेंस, जवाब में मंजूरी का हवाला
विधायक नागेंद्र सिंह ने रीवा व सतना में अवैध क्रेशर व भंडारण पर सवाल पूछा। खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल के लिखित जवाब को नागेंद्र ने गलत बताया। नागेंद्र ने प्रश्नकाल में कहा कि खनिज मंत्री ने वहां लाइसेंस देना बताया है, लेकिन यह असत्य है। प्रदूषण विभाग से पर्यावरण का कोई लाइसेंस या मंजूरी क्रेशर को नहीं दी गई है। अफसर मिले हुए हैं। अवैध तरीके से खनन हो रहा है। इसमें भी पूरा मामला जांच कराने के आश्वासन पर आकर टिक गया।
- वेतन-भत्तों को बताया परियोजना खर्च
भाजपा विधायक संजय पाठक ने कटनी में जलाशयों के जीर्णोद्धार का मामला उठाया तो जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा ने खर्च के डाटा पेश कर दिए। इस पर पाठक ने कहा कि आपको अफसर भ्रमित कर रहे हैं। ये खर्च की राशि वहां के अमले की वेतन-भत्तों की है। अफसर आपको गुमराह कर रहे हैं। इसी ध्यानाकर्षण पर बहस के बाद स्पीकर ने तालाबों के लिए अलग नीति बनाने की व्यवस्था दी थी।
- प्रमोशन में आरक्षण पर उठे सवाल
पूर्व स्पीकर और भाजपा विधायक सीतासरन शर्मा ने प्रमोशन में आरक्षण का सवाल उठाया। उनका तर्क था कि सामान्य वर्ग के पदों में रोक का कोई मुद्दा नहीं है। जवाब में सभी पर रोक बताई गई। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भी कहा कि स्टेटस-को की गलत व्याख्या की गई है। इसी सवाल पर बहस के बीच स्पीकर ने हाईपॉवर कमेटी बनाकर इस मामले में चर्चा की व्यवस्था दी।
- इस बार अपूर्ण उत्तरों से दूरी
बरसों बाद इस बार विधानसभा सत्र में अपूर्ण उत्तरों से अफसरशाही ने दूरी बना रखी है। प्रश्नों के जवाब में इस बार कोई अपूर्ण उत्तर नहीं दिया जा रहा है। दरअसल, स्पीकर ने सत्र के पूर्व अफसरों की बैठक बुलाई थी। इसमें उत्तरों को लेकर सख्ती बरतने की बात कही थी। इसी कारण इस बार अपूर्ण उत्तर नहीं आ रहे हैं।
- उत्तर पर ये भी नई व्यवस्था
आश्वासन को एक महीने में पूरा करने सदन में रिपोर्ट देना होगी।
समय-सीमा बताने में शीघ्र नहीं चलेगा। दिन की संख्या बताना होगी।
सभी कमेटियों को अपनी रिपोर्ट विस अध्यक्ष को देना होगी।

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