इतनी मशक्कत के बाद इन मंत्रियों को ही क्यों मिली जगह देखिये विश्लेषण

मध्य प्रदेश मंत्रीमंडल में इन नेताओं को ही मिल सकी जगह

By: Hitendra Sharma

Published: 02 Jul 2020, 03:55 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में मंत्रीमंडल का विस्तार हो गया है गुरुवार को 28 केबिनेट और राज्यमंत्रियों ने राजभवन में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने दिल्ली से ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीयमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी राजभवन पहुंचे इस मंत्रीमंडल के विस्तार से पहले उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को मध्य प्रदेश की प्रभारी राज्यपाल बनाया गया।

गुरुवार को सुबह राजभवन में हुए मंत्रियों की शपथ के बाद अब चर्चा है कि आखिर पार्टी के कद्दावर नेताओं को छोड़कर इन नेताओं को ही मंत्रीमंडल में जगह दी गई आखिर इसके पीछे की असली वजह क्या है? आइये जानते हैं टीम शिवराज के इन मंत्रियों की खाशियत के बारे में।

मध्य प्रदेश में इनको बनाया गया मंत्री
गोपाल भार्गव -
बीजेपी के कद्दावर नेता 1985 से लगातार सागर जिले के रेहली से विधायक है। उमाभारती केबिनेट में पहली बार फिर शिवराज सरकार में मंत्री रहे हैं। 15 वीं विधायनसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं।

विजय शाह -
बीजेपी के बड़े नेता माने जाते हैं। 1990 में पहली बार विधायक बने, उसके बाद लगातार 1993,1998,2003,2008,2013,2018 हरसूद विधायक है, शिवराज मंत्रीमंडल में पहले भी शामिल रहे हैं।

जगदीश देवड़ा -
पहली बार 1990 में विधायक बने, उसके बाद 1993, 2003 में चुनकर आये, 2004 में उमाभारती मंत्रीमंडल में राज्यमंत्री रहे, 2005 और 2008 में शिवराज मंत्रीमंडल में मंत्री बने।

प्रेम सिंह पटेल -
पहली बार मंत्री पद मिला है 1993 बड़वानी विधानसभा से चुनकर आये। उसके बाद 1998, 2003, 2008 और 2018 विधायक बने।

यशोधरी राजे सिंधिया -

मध्य प्रदेश बीजेपी की बड़ी नेता मानी जाती हैं। शिवपुरी से 1998 पहली बार विधायक बनी, 2003 में पहली बार मंत्री बनाई गई, 2007 और 2009 ग्वालियर सांसद रहीं, 2013 में फिर मंत्री बनी, 2018 में विधायक चुनी गई।

भूपेंद्र सिंह -

बीजेपी में संकट के समय काम करने वाले नेता, 1993 में पहली बार विधानसभा पहुंचे, 1998 में विधायक बने, 2009 लोकसभा सदस्य, 2013 में मंत्री बने, 2018 में फिर बामौरा सागर से विधायक चुने गये।

एंदल सिंह कंसाना -

दिग्विजय सिंह के करीबी रहे, 1993 में पहली बार चुनकर आये फिर 1998 में विधायक बने, दिग्विजय केबिनेट में मंत्री रहे। 2008, 2018 में विधायक चुने गये।

ओम प्रकाश सकलेचा -

पहली बार मंत्री पद मिला, पिता मध्य प्रदेश के सीएम रहे हैं। साल 2003 में विधायक बने, 2008, 2013, 2018 में विधानसभा पहुंचे हैं। 12 दिन पहले कोरोना पॉजिटिव हुए। पहली बार मंत्री बने।

विश्वास सारंग -

बीजेपी युवा मोर्चा से राजनीति शुरु, 2008 में नरेला भोपाल से विधायक बने, 2013 में शिवराज केबिनेट में राज्यमंत्री, 2018 में फिर विधायक चुने गये।

ऊषा ठाकुर -
इंदौर में बीजेपी का अलग चेहरा, 2003 पहली बार विधानसबा पहुंची, 2013 और 2018 में महू इंदौर विधायक बनी।पहली बार मंत्री बनी।

मोहन यादव -

2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्रधिकरण अध्यक्ष औऱ राज्यमंत्री का दर्जा मिला, 2013 में पहली बार विधायक बने, 2018 में उज्जैन से विधायक चुने गये। पहली बार मंत्री बने।

अरविंद भदौरिया-
छात्र जीवन से एवीव्हीपी से जुड़े, संगठन में अच्छी पकड़, सीएम शिवराज के करीबी माने जाते हैं नई सरकार बनाने में अहम भूमिका, 2008 पहली बार और 2018 फिर विधायक चुने गये।पहली बार मंत्री बने।

बिसाहूलाल सिंह-
युवक कांग्रेस से राजनीति में आये, पहली बार 1980 विधायक बने, 1993 में दिग्विजय सिंह केबिनेट में राज्यमंत्री, 1998 विधायक, 2003, 2008, 2018 में पांचवी बार अनूपपुर विधायक बने। कमलनाथ सरकार से नाराज होकर पार्टी और विधायकी से इस्तीफ दिया।

राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव-

युवक कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत, पहली बार बदनावर से 2003 में विधानसबा पहुंचे, 2008 और 2018 में कांग्रेस विधायक रहे। सत्ता परिवर्तन के समय सिंधिया का साथ देते हुए इस्तीफा दिया। पहली बार मंत्री बने।

डॉ प्रभुराम चौधरी -

सिंधिया समर्थक, 1985 में पहली बार विधायक बने, 1994 से अखिल भारतीय कांग्रेस कमैटी के सदस्य, 2008 में फिर विधायक, 2018 में तीसरी बार सांची से विधायक बने। कमलनाथ मंत्रीमंडल में मंत्री रहे।

इमरती देवी -

सिंधिया को लेकर हमेशा बयानबाजी कर समर्थक जताया, राजनीति में सभी उपलब्धियों को सिंधिया की देन माना। 2008 में डबरा से कांग्रेस विधायक बनी, 2013 और 2018 फिर विधानसभा पहुंची, कमलनाथ मंत्रीमंडल में शामिल रही। सिंधिया के साथ ही कांग्रेस को छोड़ा।

प्रदुम्न सिंह तोमर-

पूरी राजनीति सिंधिया के इर्द गिर्द कट्टर सिंधिया समर्थक, ग्वालियर विधायसभा से 2008 में चुने गये 2018 में फिर विधायक बने। कमलनाथ सरकार में केबिनेट मंत्री रहे। सिंधिया खेमे के साथ ही कांग्रेस छोड़ी, विधायकी से इस्तीफा दिया। नालियां साफ करने की छवि के बाद संघर्षशील नेता के रुप में पहचान।

महेंद्र सीसोदिया-

2013 में पहली बार विधायक बने, कांग्रेस के टिकट पर 2018 फिर विधायक चुने गये। कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे। सिंधिया के साथ ही कांग्रेस छोड़ी, विधायकी से इस्तीफा दिया। गुना जिले में अच्छी छवि के नेता की पहचान, कांग्रेस में रहते हुए दिग्गी गुट को छोड़ सिंधिया के कट्टर समर्थक बने।

ब्रिजेंद्र यादव -

किसान कांग्रेस से राजनीति शुरु, 2018 उपचुनाव में विधायक बने फिर मुंगावली से 2018 दूसरी बार चुने गये। सिंधिया समर्थक नेता, सिंधिया खेमे के साथ ही कांग्रेस छोड़ी, विधायकी से इस्तीफा दिया। पहली बार मंत्री बने। गुना - असोकनगर में यादव समाज के वोट को फिर से बापस पाने की जुगत में मिली जगह।

सुरेश धाकड़ -

किसान कांग्रेस और पंचायत चुनाव की राजनीति से विधानसभा पहुंचे, 2018 में पहली बार ही पोहरी से विधायक बने। सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस छोड़ी। पहली बार मंत्री बने। शिवपुरी में सिधिया का दबदबा कायम रखने और उपचुनाव में धाकड़ वोट बैंक की खातिर मिला मंत्री पद।

ओपीएस भदौरिया -
सिंधिया समर्थक, पहली बार मेहगांव से 2018 में विधायक बने, सिंधिया खेमे के साथ ही कांग्रेस छोड़ी, विधायकी से इस्तीफा दिया। पहली बार मंत्री बने। भिण्ड जिले की सीटों पर उपचुनाव के चलते चंबल में क्षत्रिय वोट बैंक को साधने की कोशिश।

गिर्राज डंडोतिया -

पहली बार मंत्री पद मिला, सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। 2018 में पहली बार मुरैना की दिमनी सीट से चुन कर विधानसभा पहुंचे। सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस छोड़ी। पहली बार मंत्री बने। मुरैना में कई सीटों पर उपचुनाव, जागितगत समीकरण के चलते ब्राह्मण वोट को साधने की कवायद।

भारत सिंह कुशवाह-
पहली बार मंत्री बने। 2013 में पहली बार विधानसभा पहुंचे, 2018 में ग्वालियर ग्रामीण से विधायक बने। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के करीबी माने जाते हैं।

इंदर सिंह परमार -
छात्र जीवन से संघ जुड़े, 2013 में पहली बार विधायक बने, 2018 में फिर विधायक शुजालपुर चुने गये और अब पहली बार मंत्री बने।

रामखिलावन पटेल -
कुर्मी समाज का बड़ा चेहरा, पहली बार 2008 में विधानसभा पहुंचे और 2018 में फिर अमरपाटन से बीजेपी विधायक बने। पहली बार मंत्री बने।

हरदीप सिंह डंग -
कांग्रेस के छात्र संगठन से राजनीति शुरु की, 2013 में पहली बार विधायक बने और 2018 सुवासरा से कांग्रेस विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। सत्ता परिवर्तन के दौरान सिंधिया का साथ दिया। पहली बार मंत्री बने।

राम किसोर कांवरे-

भारतीय जनता युवा मोचा से राजनीति की शुरुआत, 2013 में पहली बार विधायक बने और 2018 परसवाड़ा से फिर विधानसभा पहुंचे। पहली बार ही मंत्री बनाये गये।

आखिरकार मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर छाए सियासी बादल छंट गए हैं। शिवराज की मिनी कैबिनेट बनने के 71 दिन बाद 2 जुलाई को मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। 21 अप्रेल को पांच मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी। फिर लॉकडाउन के चलते मंत्रिमंडल का गठन अटक गया था।

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