कलेक्टर का नाम बदलने पर आखिर अफसर क्यों नहीं है सहमत...

— अफसर बोले- आखिर जरूरत क्या, नाम बदलने से क्या आएगा बदलाव..?

- राज्य प्रशासनिक सेवा व तहसीलदार संघ सहित अन्य वर्गों से चर्चा, कोई नहीं हो रहा नाम बदलने पर सहमत

प्रदेश में कलेक्टर का पदनाम बदलने के लिए गठित पांच आईएएस अफसरों की केसरी-कमेटी की बैठक में अब तक कोई भी इस पर राजी नहीं हुआ है। पिछले दो दिनों से कमेटी विभिन्न वर्ग से सुझाव लिए। इसमें अधिकतर लोगों ने पूछा कि आखिर कलेक्टर का पदनाम बदलने की जरूरत क्या है। दोनों ही सेवाओं के प्रतिनिधियों ने पूछा कि इससे क्या फर्क पड़ जाएगा। हालांकि कमेटी अभी बैठकों के और दौर करेगी, जिसके बाद केसरी कमेटी इस पर अपनी रिपोर्ट देगी।

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आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष व वाणिज्य-कर विभाग के अपर मुख्य सचिव आईसीपी केसरी की अध्यक्षता में कमेटी ने प्रशासन अकादमी में शुक्रवार को बैठक की। आईएएस एसोसिएशन, राज्य प्रशासनिक सेवा और तहसीलदार संघ के प्रतिनिधियों सहित अन्य वर्गों से कमेटी ने दो दिनों में बात की है।

बैठक में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रांताध्यक्ष जीपी माली ने कहा कि कलेक्टर पदनाम को बदलने से क्या फर्क पड़ेगा यह भी देखने की जरूरत है। यह नाम बरसों से चल रहा है, इसलिए यह लोगों में अलग पहचान रखता है।

तहसीलदार संघ के प्रांताध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि पदनाम बदलने की आवश्यकता ही क्या है? आखिर क्यों यह बदलाव किया जा रहा है। इससे क्या परिवर्तन आएगा। क्या कलेक्टर के काम बदल जाएंगे? अभी तो यही पता नहीं कि इससे बदलाव क्या होगा और क्यों नाम बदला जा रहा है। वहीं आइएएस एसोसिएशन की ओर से केसरी खुद ही अन्य साथियों से चर्चा करते रहे। अधिकतर ने कलेक्टर पदनाम न बदलने की बात कही। इसमें कहा गया कि जब कोई जरूरत ही नहीं है, तो फिर यह बदलाव करने पर क्यो टाइम व समय खर्च किया जा रहा है।

इसमें यह भी कहा गया कि सीएम कमलनाथ ने पदनाम बदलने के लिए कहा है, इस कारण इसे लेकर निर्णय करना है।

कैसे पड़ा कलेक्टर नाम-

अंग्रेजों के शासनकाल के समय राजस्व वसूलने के लिए जो अफसर रखे गए, उन्हें अंग्रेजों ने कलेक्टर नाम दिया था। कलेक्टर यानी राजस्व कलेक्टर करने वाला। इसी को आधार बनाकर पदनाम बदलने पर विचार शुरू हुआ है। सीएम कमलनाथ ने सत्ता संभालने के बाद कहा था कि कलेक्टर का नाम बदला जाएगा।
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तीन-चार विकल्प चर्चाओं में-
शासन स्तर पर कलेक्टर के तीन-चार नाम चर्चाओं में हैं। इसमें जिला मजिस्ट्रेट, जिलाधीश, जिला अधिकारी व जिला प्रबंधक सहित अन्य नाम है। नाम बदलना चाहिए या नहीं और यदि बदलना चाहिए तो क्या नाम रखना चाहिए, इसका निर्णय करने को लेकर ही केसरी-कमेटी बनाई गई है।

यह कमेटी सीएम को अपनी रिपोर्ट देगी, फिर सीएम इस पर फैसला करेंगे। कुछ अफसरों ने जरूर नाम बदलने की स्थिति में जिलाधीश और जिला मजिस्टे्रट नाम को बेहतर बताया है।

राज्यों में अलग-अलग नाम-
देश में विभिन्न राज्यों में कलेक्टर के अलग-अलग नाम प्रचलित हैं। उत्तरप्रदेश में कलेक्टर को डीएम यानी डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट कहा जाता है। वहीं बिहार व झारखंड में समाहर्ता नाम है। वहीं पंजाब व चंडीगढ़ में कलेक्टर को डीसी यानी डिप्टी कमिश्नर कहा जाता है।

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विभिन्न वर्गों से होना है बात-

केसरी कमेटी सांसद-विधायक, नगरीय व पंचायत प्रतिनिधि, भोपाल में मंत्रालय से लेकर दिल्ली तक पदस्थ आईएएस, विभिन्न सरकारी सर्विस, सुशासन संस्थान, प्रशासन अकादमी और वरिष्ठ पत्रकारों सहित विभिन्न वर्गों से पदनाम में बदलाव पर सुझाव लेगी। इसके लिए 23 फरवरी तक विभिन्न चरण में बैठक करके सुझाव लिए जाने हैं।
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harish divekar Reporting
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